फर्रुखाबाद: नगरपालिका चुनाव 2012 में सत्ता की हनक और ग्लैमर का तड़का भी लगेगा| आरक्षित पदों पर महिलाओ को आगे करना मर्दों की मजबूरी है या मानसिक सहमति, इसका पता तो नगरपालिका चुनाव के बाद नगरपालिका के अगले कार्यकाल की गतिविधिओ से पता चलेगा| महिलाएं जो परदे से बाहर निकल नामांकन कक्ष तक पहुची है इनमे से कितनो के दीदार आम जनता को सार्वजनिक जीवन में होंगे ये जरुर गर्त में है मगर जेएनआई का यह पेज 2017 में भी पढ़ा जा सकेगा| तब ये इतिहास होगा जिसकी बुनियाद 2012 में आपकी नजर पेश है-













