हजरत शेख मकदूम के 688वें उर्स में अकीदतमंदों की उमड़ी भीड़

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कमालगंज (फर्रुखाबाद): हजरत शेख मकदूम बुर्राक लंगर जहां का 688वें उर्स में हजारों अकीदतमंदों ने शिरकत की। उर्स का आयोजन रवायती अंदाज में 4 मई से शुरू हुआ व आज 10 मई को इसका समापन हुआ।

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बताते हैं कि हजरत शेख मकदूम भोजपुर रहा करते थे। जब इनका भोजपुर में देहांत हुआ तब इनके शव को ले जाने को लेकर भोजपुर व शेखपुर के लोगों में विवाद हो गया। भोजपुर के लोग वहीं दफनाना चाहते थे जबकि शेखपुर के लोग उनके शव को शेखपुर लाना चाहते थे। यह विवाद चल ही रहा था कि इनका शव अपने आप उड़कर शेखपुर दरगाह स्थल पर आकर रुक गया।

पीछे से शेखपुर के लोग छड़ी लेकर लै चल पीर की आवाज देते हुए चले आ रहे थे। उसी की रिवाज में हर वर्ष छड़ीबाज शेखपुर से भोजपुर के लिए जाते हैं और बड़े ही रिवायत के साथ उनके शव को वापस शेखपुर लाते हैं।
इसी परिप्रेक्ष्य में सज्जादा नसीन हजरत गालिब मियां को लेने के लिए खिरका लेकर छड़ीबाज भोजपुर पहुंचे। खिरका पहनाकर अचेत अवस्था में डोले पर लिटाकर सज्जादा नसीन को शेखपुर लाया गया। शेखपुर मजार के पास रखते ही सज्जादा नसीन को होश आ जाता है। होश आने के बाद मस्जिद में नमाज अदा की गयी। इसके बाद नातिया मुशायरा भी हुआ।

प्रसाद के रूप में लड्डू बांटे गये। वहीं लड्डुओं की परम्परा के बारे में बताया जाता है कि बाबा को दफनाने के समय गुड़ बांटी गयी थी। उसी के परिप्रेक्ष्य में इसे बदल कर बेसन के लड्डुओं को वितरित करने की परम्परा पड़ गयी। अब लोग दूर दूर से शेखपुर के लड्डू खरीदकर ले जाते हैं और बड़े ही चाव से उनका लुत्फ उठाते हैं। वहीं लोगों की दरगाह पर मन्नत पूरी होने पर मीठी रोटी चढ़ाते हैं।

ब्लाक प्रमुख राशिद जमाल सिद्दीकी, मंत्री नरेन्द्र सिंह के पुत्र सचिन यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष तहसीन सिद्दीकी, अनुपम दुबे, इदरीश निजामी आदि ने शिरकत की।

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