10 दिसंबर को होगा साल का आखिरी ग्रहण, क्या करें क्या न करें?

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शनिवार 10 दिसंबर को चंद्र ग्रहण आने वाला है। ये ग्रहण आखिरी ग्रहण होगा। जी हां ये ग्रहण इस साल का आखिरी ग्रहण होगा। ये ग्रहण पूरे भारत में दिखाई देगा। इसका असर सभी पर होगा। यह ग्रहण मृगशिरा नक्षत्र, वृषभ राशि में होगा।

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भारत में चंद्रग्रहण का पूरा असर होगा इसलिए धार्मिक दृष्टि से सूतक काल में स्नान, दान, पूजा पाठ करने से दोष लगेगा। ग्रहण काल और सूतक काल का पालन करना चाहिए। ग्रहण का मोक्ष होने के बाद स्नान,दान और पूजा-पाठ करना चाहिए। हिन्दू धर्म में ग्रहण को अशुभ माना जाता है साथ ही ज्योतिष शास्त्र में भी माना गया है कि ग्रहण का सभी राशियों पर शुभ-अशुभ प्रभाव होता है।

क्या करें, क्या न करें ग्रहण में

चंद्रग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले और सूर्यग्रहण शुरू होने के 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। सूतक काल में खाना खाना, सोना और सांसारिक सुखों का त्याग कर देना चाहिए। सूतक काल में बच्चे, बूढ़े और रोगी रियायत के तौर पर आवश्यक मात्रा में शुद्ध भोजन पदार्थ ले सकते है। जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा अशुभ हो या शत्रु राशि में है उन्हे चंद्रग्रहण नही देखना चाहिए।

इस मंत्र का जाप करें

चंद्रग्रहण के समय चंद्र देव के मंत्र श्रांश्रींश्रौं स: सोमाय नम: का जप करना चाहिए।

क्या होता है सूतक काल

दरअसल सूतक काल वह समय होता है जब से ग्रहण का असर शुरू होता है। यह वैज्ञानिक तथ्य है कि ग्रहण लगने के कुछ घंटों पूर्व ही सूर्य और चंद्रमा से निकलने वाली किरणें अपना दुष्प्रभाव फैलाना शुरू कर देती हैं। इन किरणों में अल्ट्रावाइलेट की मात्रा ज्यादा होती है। जो कि हर तरह की चीजों पर अपना असर डालती है। हिंदू धर्म में इसी कारण सूर्य ग्रहण के 12 और चंद्र ग्रहण के 9 घंटे पहले से सूतक काल का नियम बनाया है। इस समय में हर तरह का खान-पान आदी की मनाही होती है, इस काल में एक स्थान पर बैठकर कोई मंत्र जाप कर सकते हैं।

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