गंगा व रामगंगा में उफान, कई गांव में मुसीबत की बाढ़

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फर्रुखाबाद:(अमृतपुर संवाददाता) रामगंगा नदी में अचानक बढ़े जलस्तर ने अमृतपुर थाना क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गांव भावन में बाढ़ का पानी घरों और झोपड़ियों में घुसने से ग्रामीणों के सामने रहने और खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है। गांव का उप स्वास्थ्य केंद्र भी बाढ़ के पानी की चपेट में आ गया है।
वहीं लोहिया सेतु पर गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से पांच सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 137.15 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 137.10 मीटर है। इससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। दूसरी ओर रामगंगा नदी में भी उफान बना हुआ है। भमदत्ता द्विवेदी सेतु पर रामगंगा का जलस्तर 136.95 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 137.10 मीटर के करीब है।
ग्रामीणों के अनुसार रामगंगा का पानी तेजी से गांव की ओर पहुंचा और देखते ही देखते कई घरों में घुस गया। प्रभावित परिवार अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। कई परिवारों के सामने सिर छिपाने की समस्या खड़ी हो गई है। बताया गया कि लेखपाल गौरव यादव ने गांव पहुंचकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। वहीं कानूनगो दिनेश शर्मा ने भी प्रभावित गांवों का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया। ग्रामीणों को जल्द राहत सामग्री उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है। रामगंगा का पानी हीरानगर, गुंडेरा, भावन, अमैयापुर, खखिन और गला समेत आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच गया है। करीब आधा दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं। बाढ़ का पानी मुन्ना, हसन पाल, रामस्वरूप, वीरेश, कल्याण, राजू, संजू, गुड्डू, मेघनाथ, रामराज, इबारत राम, रतन राम, रामअवतार, पिंटू, टिंकू, जयपाल, सियाराम, केशराम, मिथिलेश और खुशीराम समेत कई ग्रामीणों के घरों तक पहुंच चुका है। पानी भरने से ग्रामीणों का सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
पांच साल से अधूरा पड़ा उप स्वास्थ्य केंद्र भी डूबा
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बनाया जा रहा उप स्वास्थ्य केंद्र करीब पांच वर्षों से अधूरा पड़ा है। अब बाढ़ का पानी अधूरे भवन में भी भर गया है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब वर्षों बाद भी स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण पूरा नहीं हो सका तो आपदा के समय प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं कहां मिलेंगी। वहीं क्षेत्र के अमरज्योत इंटर कॉलेज में कक्षाएं संचालित होती मिलीं। ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ पीड़ितों के ठहरने अथवा राहत के लिए वहां कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखाई दी। लगातार बढ़ते जलस्तर से ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत सामग्री, सुरक्षित स्थानों पर ठहरने की व्यवस्था और प्रभावित परिवारों को जरूरी मदद उपलब्ध कराने की मांग की है।

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