फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) हाथरस रेलवे स्टेशन परिसर में एक अधेड़ व्यक्ति का शव मिलने से सनसनी फैल गई। मौके पर पहुंची जीआरपी ने शव की तलाशी ली तो उसके पास से आधार कार्ड, पैन कार्ड और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच में मोबाइल नंबर को ट्रेस किया गया, जिससे उसकी पहचान औरैया जिले के किशनी निवासी रामवीर के रूप में सामने आई। फर्रुखाबाद जीआरपी भी लोहिया अस्पताल जाँच करने पंहुची|
पुलिस टीम जब रामवीर के घर पहुंची तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। परिजनों ने बताया कि रामवीर जिंदा है और गंभीर रूप से झुलसने के बाद उसे इलाज के लिए सैफई भेजा गया था, जहां उसका उपचार चल रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया कि जब रामवीर अस्पताल में भर्ती है, तो उसका मोबाइल हाथरस में मिले शव के पास कैसे पहुंच गया।
इस रहस्यमयी मामले ने पुलिस के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जीआरपी थाना अध्यक्ष फर्रुखाबाद शेर सिंह ने बताया कि उच्च अधिकारियों के आदेश पर सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में झुलसे व्यक्ति के इलाज होने की जानकारी के लिए लोहिया अस्पताल के अलावा प्राइवेट अस्पतालों में जानकारी जुटाने के लिए जांच पड़ताल की गई थी। लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। उन्होंने बताया कि मामला हाथरस से जुड़ा हुआ है और रामवीर सिंह का आपराधिक इतिहास भी रहा है। उसके खिलाफ मुरादाबाद में कार्रवाई हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि उसका मोबाइल मृतक के पास कैसे पहुंचा।
वहीं, जीआरपी थाना अध्यक्ष हाथरस सिटी स्वेश कुमार ने जेएनआई को बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मोबाइल मृतक तक कैसे पहुंचा और शव की असल पहचान क्या है। उन्होंने कहा कि मृतक की शिनाख्त होने के बाद ही पूरे मामले का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल यह घटना पुलिस के लिए एक पेचीदा पहेली बन गई है, जिसका जवाब तलाशने के लिए कई पहलुओं पर जांच जारी है।
हाथरस रेलवे स्टेशन पर मिला था शव, जिंदा व्यक्ति का निकला मोबाइल — पुलिस जांच में उलझी गुत्थी





