फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) प्रदेश में शीतलहर और घने कोहरे के चलते शिक्षा निदेशक (बेसिक) उत्तर प्रदेश द्वारा 28 दिसंबर 2025 को कक्षा 1 से 12 तक के समस्त परिषदीय, मान्यता प्राप्त, सहायता प्राप्त, राजकीय एवं अन्य सभी बोर्डों के विद्यालयों में 29 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 तक अवकाश घोषित किया गया है। शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट रूप से छात्रहित और मौसम विभाग के पूर्वानुमान का हवाला देते हुए इन तिथियों में पूर्ण अवकाश का निर्देश दिया गया है।
वहीं दूसरी ओर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी फर्रुखाबाद द्वारा उसी दिन जारी कार्यालय आदेश ने शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। बीएसए कार्यालय के आदेश के अनुसार जनपद के समस्त आंगनवाड़ी केंद्रों, परिषदीय, अशासकीय सहायता प्राप्त एवं सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों (आईसीएसई/सीबीएसई बोर्ड) में केवल 29 और 30 दिसंबर 2025 को छात्र-छात्राओं के लिए अवकाश घोषित किया गया है। इसके साथ ही आदेश में यह भी कहा गया है कि विद्यालयों में कार्यरत सभी शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहकर निर्वाचन कार्य (एसआईआर), विभागीय
कार्य एवं उच्चाधिकारियों से प्राप्त अन्य आदेशों का अनुपालन करेंगे।
दोनों आदेशों की तुलना करने पर यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा निदेशक के आदेश में 29 दिसंबर से 1 जनवरी तक अवकाश का उल्लेख है, जबकि जिला स्तर पर जारी आदेश में छात्रों के लिए अवकाश की अवधि कम कर दी गई है और शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। इसी विरोधाभास के कारण शिक्षकों और कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि उन्हें उच्च स्तरीय आदेश का पालन करना है या जिला स्तर के निर्देशों का।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब शिक्षा निदेशक का स्पष्ट आदेश मौजूद है तो जिला स्तर पर अलग निर्देश जारी करना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की है कि स्थिति स्पष्ट करते हुए एक समान निर्देश जारी किए जाएं, ताकि अनावश्यक असमंजस समाप्त हो और आदेशों का एकरूपता के साथ पालन हो सके। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ प्रताप सिंह ने जेएनआई बताया कि उन्होंने जनपद स्तर से आदेश पहले जारी कर दिया था, शिक्षा निदेशक का आदेश बाद में आया है इसलिए विद्यालय में उन शिक्षकों का अवकाश के दिन स्कूल जाना अनिवार्य है जिनका या तो कोई शासकीय या विभागीय कार्य अपूर्ण है |
शिक्षा निदेशक और बीएसए के आदेशों में भिन्नता, शिक्षकों में असमंजस
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