फर्रूखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) पुलिस विभाग के लंबित देयकों के भुगतान के बदले रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार वरिष्ठ लेखाकार हरेंद्र सिंह चौहान को विजिलेंस टीम ने 15,000 रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बताया जाता है कि हरेंद्र सिंह अपने ही विभाग के कर्मचारियों के लंबित देयकों के भुगतान में अनियमितता और अवैध वसूली के लिए कुख्यात थे।
कार्यालय में लंबे समय से चर्चा रही है कि वरिष्ठ लेखाकार खुलकर रिश्वत लेते थे और बिना पैसे के किसी भी देयक की फाइल आगे नहीं बढ़ती थी। कर्मचारियों का आरोप है कि वे भुगतान को अनावश्यक रूप से लटकाकर घूस लेने का दबाव बनाते थे। उसकी विभागीय पकड़ इतनी मजबूत थी कि कोई भी कर्मचारी उनके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं जुटाता था। हरेंद्र सिंह चौहान व वरिष्ठ लिपिक नीरज जायसवाल दोनों का स्थानांतरण इसी वर्ष जून में पीएसी मुख्यालय लखनऊ के लिए कर दिया गया था। स्थानांतरण आदेश के बाद मुख्यालय की ओर से बार-बार अनुस्मारक भेजे गए, लेकिन दोनों ने मुख्यालय में ज्वॉइन नहीं किया। विभागीय अधिकारियों पर पकड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि छह महीने बीत जाने के बाद भी दोनों कर्मचारी अपनी-अपनी सीटों पर जमे रहे व पुलिस अधीक्षक कार्यालय से उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया। बताते चले विजिलेंस को शिकायत मिली थी कि हरेंद्र सिंह 145000 रुपए के लंबित भुगतान के एवज में 15,000 रुपये की अवैध मांग कर रहे हैं। 14 नवंबर को विजिलेंस टीम ने योजना बनाकर हरेंद्र सिंह को घूस लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। इसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया और कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।इस कार्रवाई के बाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय में हड़कंप मच गया है। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले कई महीनों से देयक भुगतान में जान बूझकर की जा रही देरी और अवैध वसूली से विभाग की छवि खराब हो रही थी। अब विजिलेंस की कार्रवाई से उम्मीद है कि विभाग में पारदर्शिता और अनुशासन बहाल होगा तथा लंबे समय से लंबित स्थानांतरण आदेशों का भी पालन कराया जाएगा। मामले में अपर पुलिस अधीक्षक से वार्ता का प्रयास किया गया लेकिन उनका फोन नही लगा|
रिश्वतखोरी में पकड़ा गया पुलिस लेखाकार हरेन्द्र छह माह से स्थानांतरण के बाद भी कुर्सी पर था जमा



