फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) लगभग 30 साल पूर्व समधन निवासी पीडब्लूडी ठेकेदार शमीम ठेकेदार की हत्या दिनदहाड़े गोली मारकर की गई थी। मुकदमा अज्ञात कातिलों के खिलाफ कोतवाली फतेहगढ़ में दर्ज किया गया था| पुलिस नें मुकदमें में जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया तो अनुपम दुबे के साथ तीन अन्य के नाम प्रकाश में आये| पुलिस नें मामले में आरोप पत्र सीजेएम कोर्ट में दाखिल किया गया था। माफिया अनुपम दुबे नें पिता की मौत का बदला लेनें को ठेकेदार को मौत के घाट उतार दिया था| पूर्व में इंस्पेटर रामनिवास हत्याकाण्ड में अनुपम को आजीवन कारवास की सजा हो चुकी है| हिस्ट्रीशीटर अनुपम दुबे को कानपुर की एडीजे कोर्ट ने 17 दिसंबर 2023 को दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी|
पड़ोसी जनपद कन्नौज के थाना गुरसहायगंज के कस्बा समधन निवासी नसीम 26 जुलाई 1995 में भाई शमीम ठेकेदार के साथ जरूरी काम से फतेहगढ़ आया था। सुबह सवा नौ बजे नसीम कचहरी चला गया गया और शमीम बजरिया अलीगंज निवासी राजेंद्र तिवारी से मिलने गया। तभी शमीम की मोहल्ला बजरिया
अलीगंज में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जानकारी मिलने पर नसीम मौके पर पहुंचा तो उसके भाई शमीम की लाश पड़ी थी| फतेहगढ़ कोतवाली में नसीम ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना कुछ ही दिन पुलिस नें की उसके बाद शासन के आदेश पर विवेचना सीबीसीआईडी शाखा कानपुर को स्थानांतरित की गयी थी। उसके बाद सीबीसीआईडी के विवेचक ने सीजेएम कोर्ट में डॉ. अनुपम दुबे,चाचा कौशल किशोर, लक्ष्मी नारायन व इटावा के इकदिल के मानिकपुर निवासी शिशु उर्फ बाल किशन के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
पिता की मौत बदला लेनें में की ठेकेदार की हत्या
विदित है कि कन्नौज के समधन में लगभग साढ़े तीन दशक पूर्व एक बबाल के दौरान अनुपम दुबे के पिता महेश दुबे की मौत हो गयी थी| अनुपम को शक था की पिता की हत्या मे ठेकेदार का हाथ है, लिहाजा अभियोजन पक्ष का भी कहना है कि शमीम की हत्या इसी साजिश के तहत की गयी| 



