महाशिवरात्रि की जोर-शोर से तैयारियां, 60 वर्ष बाद दुर्लभ संयोग

फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शहर के सभी शिव मंदिरों को सजाने संवारने का काम जोरों पर चल रहा है। शिवभक्त महाशिवरात्रि पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को लेकर उत्साहित हैं। बुधवार तड़के से ही शिव मन्दिरों में पूजा अर्चना शुरू होगी| इसे और आकर्षक बनाने के लिए धार्मिक व सामाजिक संगठन भी जुट गए हैं।

शहर के रेलवे रोड़ स्थित पांडेश्वर नाथ मन्दिर में महाशिवरात्रि की तैयारी जोरों पर है| इसके साथ हो शहर कोतवाली के पीछे कोतवालेश्वर महादेव, नवाबगंज के ग्राम पुठरी शिव मन्दिर, मोहल्ला अड़तियान में स्थित तामेश्वर मन्दिर, अंगूरीबाग महाकाल मन्दिर, मोटे महादेव मन्दिर, पत्थर वाले महादेव, कम्पिल रामेश्वर महादेव, कालेश्वर महादेव व गंगेश्वर महादेव, सेंट्रल जेल पाल नगला स्थित शिव-शक्ति महाकाल मंदिर, आवास विकास श्री सिद्ध भूतेश्वर नाथ मन्दिर में पूजा की तैयारी चल रहीं है| महाशिवरात्रि को लेकर जिले में तैयारियां जोरशोर से शुरू हो गई हैं। पर्व को लेकर जिले भर के देवालयों में रंग रोगन और सफाई का काम तेजी से जारी है। वहीं पर्व पर होने वाले कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर विभिन्न मंदिरों में बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। पुलिस सुरक्षा की भी व्यवस्था की गयी है|
पूजन का शुभ मुहुर्त
आचार्य सर्वेश कुमार शुक्ल नें बताया कि इस साल महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र का संयोग बनेगा| 26 फरवरी को श्रवण नक्षत्र सुबह से लेकर शाम 5 बजकर 8 मिनट तक प्रभावी रहेगा| इसी दिन मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में सूर्य, बुध व शनि की युति कुंभ तीनों कुंभ राशि में विराजमान होंगे| सूर्य व शनि पिता पुत्र हैं और सूर्य शनि की राशि कुंभ में रहेंगे| ऐसे में बुद्धादित्य योग, त्रिग्रही योग का निर्माण हो रहा है| इसके अलावा महाशिवरात्रि के दिन शिव योग और परिध योग का संयोग बन रहा है| यह योग सफलता और समृद्धि का प्रतीक है| इन योगों में की गई पूजा-अर्चना से मनोकामनाएं जल्दी पूर्ण होती हैं|इस योग में किए गये कार्य और व्रत का फल कई गुना अधिक मिलता है|
60 साल बाद दुर्लभ संयोग में महाशिव रात्रि
आचार्य सर्वेश कुमार शुक्ल नें बताया कि इस साल 1965 के बाद यह दूसरा मौका है, जब महाशिवरात्रि 26 फरवरी को धनिष्ठा नक्षत्र, परिघ योग, शकुनी करण और मकर राशि के चंद्रमा की उपस्थिति में आ रही है। इस दिन चार प्रहर की साधना से शिव की कृपा प्राप्त होगी। यह एक विशिष्ट संयोग है, जो लगभग एक शताब्दी में एक बार बनता है। वर्ष 1965 में जब महाशिवरात्रि का पर्व आया था तब सूर्य, बुध और शनि कुंभ राशि में गोचर कर रहे थे। महाशिवरात्रि के दिन की गई शिव की उपासना से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है।