बीजेपी की माथापच्ची, कौन होगा महाराष्ट्र का सीएम?

bjp_maharashtaनई दिल्ली:महाराष्ट्र के चुनावी नतीजों के बाद अब सरकार बनाने को लेकर माथापच्ची चल रही है। महाराष्ट्र में बीजेपी का अगला सीएम कौन होगा इसपर बैठकों का सिलसिला जारी है। बीजेपी और शिवसेना गठबंधन पर अब भी असमंजस बरकरार है।

आज दिन में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के घर बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह से मिलने पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई। गडकरी ने खुद को सीएम की रेस से बाहर बताया है। हालांकि अमित शाह से गडकरी की मुलाकात से इन अटकलों को बल मिला कि गडकरी भी मुख्यमंत्री की दौड़ में फड़नवीस के साथ बने हुए हैं।

उधर, चुनाव बाद रणनीति पर चर्चा करने के लिए मुंबई में शिवसेना विधायकों की आज अहम बैठक हुई। विधायकों ने उद्धव पर फैसला छोड़ दिया है। ताजा हालात पर एनसीपी की भी बैठक हुई। एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार का कहना है कि वो बीजेपी सरकार को समर्थन देने को तैयार हैं, लेकिन एनसीपी सरकार में शामिल नहीं होगी। इसी बीच बीजेपी निर्दलीयों से भी बात कर रही है।

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे एनसीपी के नेताओं को बचाने के लिए शरद पवार ने अपना दांव चल दिया है, लेकिन सवाल से हैं की एनसीपी पर नेचुरली करप्ट पार्टी होने का आरोप लगाने वाली बीजेपी ने अबतक आधिकारिक रुप से एनसीपी के प्रस्ताव को ख़ारिज क्यों नहीं किया। क्या सच में दोनों दलों के बीच कोई डील हुई है या फिर शिवसेना पर दबाव बढ़ाने बीजेपी की ये नई चाल है।

महाराष्ट्र में बीजेपी गठबंधन 123 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। सरकार बनाने के लिए उन्हें 22 विधायकों का समर्थन चाहिए। वहीं शिवसेना के पास कुल 63 विधायक हैं।

राज्य में 123 सीटें मिलने के बाद बीजेपी ने सरकार बनाने की कवायद तेज कर दी है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर कौन बनेगा महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री? फिलहाल महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष देवेंद्र फड़नवीस, विनोद तावड़े, एकनाथ खड़से और पंकजा मुंडे का नाम आगे आगे चल रहे हैं। वहीं इस अप्रत्याशित जीत के बाद बीजेपी समर्थकों का जश्न लगातार जारी है। अब से कुछ देर पहले बीजेपी के मुंबई दफ्तर में पारंपरिक अंदाज विजयोत्सव मनाया गया जिसमें पार्टी के कई नेता शामिल हुए।

उधर, बीजेपी नेता ओपी माथुर ने महाराष्ट्र में जारी मंथन पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है। हालांकि ओपी माथुर ने इशारों इशारों में ये संकेत जरुर दिया कि बीजेपी समर्थन के लिए शिवसेना की ओर पहले हाथ बढ़ाने के मूड में नहीं है।
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