सरस्वती भवन खोलने को लेकर विवाद, कोतवाली से धरने तक

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FARRUKHABAD : श्री रामलीला मण्डल की तरफ से स्वरूप पूजन कक्ष को खुलवाने को लेकर सरस्वती भवन के पुजारी व कमेटी के लोगों के बीच मोर्चा खुल गया है। मामले के सम्बंध में कमेटी के लोगों ने कोतवाली में विवाद के साथ-साथ नेहरू रोड पर धरना दे दिया। कई घंटों की मसक्कत के बाद आखिर मामले में सिटी मजिस्ट्रेट के हस्तक्षेप के बाद निबटाया जा सका।

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श्रीरामलीला मण्डल कमेटी की तरफ से रविवार को शाम चार बजे भूमि पूजन होना था। कार्यक्रम में पहुंचे कमेटी के लोगों ने पुजारी नंदकुमार मिश्रा से स्वरूप पूजन कक्ष को खोलने की बात कही। जिस पर पुजारी ने कक्ष खोलने से इंकार कर दिया। कमेटी सदस्यों का आरोप है कि पुजारी ने कक्ष को अंदर से बंद कर दिया है और भवन के पीछे कई कमरे भी बनवा लिये हैं।

पुजारी के कक्ष खोलने के इंकार के बाद मामला कोतवाली पहुंच गया और कोतवाली में इंस्पेक्टर के सामने दोनो पक्षों में जमकर कहासुनी हो गयी। इंस्पेक्टर मामले को निबटा नहीं पाये तो कमेटी के लोग नेहरू रोड पर दरी बिछाकर धरने पर बैठ गये।

मामले की जानकारी नगर मजिस्ट्रेट को हुई तो नगर मजिस्ट्रेट प्रभुनाथ शहर कोतवाली पहुंचे और धरने पर बैठे पदाधिकारियों लाल जी टन्डन, पवन शर्मा, कृष्ण कन्हैया आदि को कोतवाली में बुलवाया। सीएम के सामने भी दोनो पक्ष एक दूसरे की बात मानने को तैयार नहीं थे। पुजारी की तरफ से कहा जा रहा था कि कमेटी उन्हें लिख कर दे कि रामलीला मंचन के बाद वह स्वरूप पूजन कक्ष को खाली कर देंगे। जिस पर कमेटी के कोषाध्यक्ष लाल जी टन्डन राजी नहीं हुए। उन्होंने कहा कि रामलीला बीते 100 साल से होती आ रही है और इस बार पुजारी द्वारा इस तरह का कृत्य किया गया।

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sarswatee bhawan vivad 3उन्होंने सरस्वती भवन खुलवाने की मांग की और कहा कि चाबी नगर मजिस्ट्रेट खुद अपने हाथ में ले लें। जिस पर नगर मजिस्ट्रेट ने मना कर दिया। काफी नोकझोंक के बाद दोनो पक्षों में समझौता हो गया और पूर्व की भांति ही कक्ष को खोलने पर दोनो पक्ष सहमत हो गये।

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