पति की मृत्‍यु पर अनुकंपा नियुक्ति के बाद विधवा के पुनर्विवाह पर रोक नहीं

3july2010courtइलाहाबाद : हाईकोर्ट ने कहा कि पुनर्विवाह व्यक्तिगत पसंद है जिसे मृतक आश्रित सेवा नियमावली के तहत रोका नहीं जा सकता। अनुकंपा नियुक्ति के बाद भी पुनर्विवाह किया जा सकता है बशर्ते मृतक के अन्य आश्रितों का भरण पोषण की जिम्मेदारी भी उठाई जाए। अनुकंपा नियुक्ति नियमावली के अंतर्गत नियुक्त व्यक्ति यदि अन्य आश्रितों के भरण पोषण के दायित्व का निर्वहन नहीं करता तो उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सकती है। कोर्ट ने याची को अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी करने की छूट दी है किंतु कहा है कि आश्रितों के भरण पोषण के दायित्व को उसे निभाना होगा। याची ने कोर्ट में आश्वस्त किया कि वह अपने वेतन का एक तिहाई अपनी सास को प्रतिमाह देती रहेगी।

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यह आदेश न्यायमूर्ति बीके शुक्ला ने श्रीमती अंकिता श्रीवास्तव की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। मालूम हो कि याची के ससुर की सेवाकाल में मौत हो गई जिस पर उसके पति को नौकरी मिली किंतु दुर्भाग्यवश पति की भी सेवाकाल में मृत्यु हो गई तो याची को अनुकंपा नियुक्ति दी गई। याची के पति की लिपिक पद पर उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी, सदर बलिया में नियुक्ति की गई थी। याची पर उसकी सास के पालन की जिम्मेदारी है। विभाग में नियुक्ति देते समय उसने हलफनामा दिया था कि वह शादी नहीं करेगी लेकिन अब वह शादी करना चाहती है और सास का भरण पोषण करने को तैयार है। विभाग द्वारा अड़ंगा डालने पर यह याचिका दाखिल की गई थी। कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति अधिकारी मृतक की विधवा से नियुक्ति के बाद दूसरी शादी न करने का आश्वासन नहीं मांग सकते। ऐसा करने से संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ शादी करने के अधिकार का उल्लंघन होगा।

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