टीईटी परीक्षा के खिलाफ सड़क पर उतरे शिक्षक! सौपा ज्ञापन

फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य करने के आदेश के बाद शिक्षकों की नौकरी पर संकट गहरा गया है। आदेश के अनुसार, अगले दो वर्ष के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा, अन्यथा नौकरी छोड़नी पड़ सकती है। इस फैसले से असंतुष्ट शिक्षकों ने विरोध तेज कर दिया है। सोमवार को सड़क पर उतरे शिक्षकों नें प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा|
उत्तर प्रदेश जूनियर हाई-स्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष प्रवेश कटियार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में शिक्षक कलेक्ट्रेट पंहुचे| उन्होंने सीएम योगी, पीएम मोदी, केन्द्रीय शिक्षा मंत्री को सम्बोधित ज्ञापन डीएम के प्रतिनिधि के रूप में मौजूद नगर मजिस्ट्रेट संजय बंसल को सौंपा| कहा कि टीईटी की अनिवार्यता वाले आदेश से शिक्षक भयभीत और अवसादग्रस्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आदेश शिक्षक हित में नहीं है। इसे वापस लिया जाए। कहा कि इस आदेश के चलते लाखों शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडरा गया है। शिक्षक पात्रता परीक्षा में प्रतिभाग करने वाले के लिए योग्यता स्नातक, बीएड या बीटीसी प्रशिक्षण है, जबकि वर्ष 2001 से पूर्व नियुक्ति बेसिक शिक्षक के लिए इंटरमीडिएट और बीटीसी थी। जिला महामंत्री नीरज शुक्ला, संयुक्त संचालन समिति से प्रमोद दीक्षित, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष संजय तिवारी, प्रवेश रतन शाक्य, मुन्ना लाल यादव, अटेवा के नरेंद्र जाटव, जीतेंन्द्र राठौर आदि रहे|