लखनऊ: देश की राजधानी नई दिल्ली से उत्तर प्रदेश को जोडऩे वाले यमुना एक्सप्रेस-वे पर लगातार हो रही दुर्घटनाएं चिंता का विषय हैं। जनवरी से जून महीने में ही यमुना एक्सप्रेस-वे पर छोटी-बड़ी 95 दुर्घटनाएं हो चुकीं हैं, जिसमें 94 लोगों की जान गई है।
उत्तर प्रदेश ट्रैफिक पुलिस निदेशालय की आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जून महीने तक यमुना एक्सप्रेस-वे पर 95 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 94 लोगों की जान चली गई। ट्रैफिक पुलिस निदेशालय के यह आंकड़े काफी दिल दहलाने वाले हैं। इनमें 120 लोग घायल भी हुए हैं।165 किमी लंबे इस एक्सप्रेस वे की लागत 128.39 अरब रुपये थी। इसे बनाने का मकसद था दिल्ली और आगरा के बीच की दूरी घटाकर कम समय में लोगों को आनंददायक सफर मुहैया कराना, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, यह एक्सप्रेस वे मौत का हाईवे बनता चला गया। हालात यह हो गए हैं कि लगभग हर दिन ही इस हाईवे पर कोई न कोई अपनी जान गंवा रहा है। अब तक सामने आई सड़क हादसों की घटनाओं पर गौर करें तो सिर्फ 1 जून, 2019 से 8 जुलाई, 2019 के बीच ही इस हाईवे पर कई सड़क हादसे हो चुके हैं। इनमें करीब 50 लोगों की मौत हो चुकी है। आगरा के एत्मादपुर थाना क्षेत्र में आज तड़के यमुना एक्सप्रेस-वे की रेलिंग को तोड़ते हुए जनरथ बस झरना नाले में जा गिरी। इस हादसे में 29 लोगों के शवों को निकाला गया है।
21 घायलों का इलाज चल रहा है। जिलाधिकारी आगरा के मुताबिक, प्रथम दृष्टया हादसे की वजह बस की तेज रफ्तार और ड्राइवर को नींद आना बताया जा रहा है।
मौत का एक्सप्रेस-वे : छह महीने में 95 सड़क हादसे में 94 की मौत
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