फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो)जनपद के बेसिक शिक्षा विभाग में एक बार फिर शिक्षकों के जबरन समायोजन को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। सरप्लस सूची में नाम न होने, विद्यालय के कम्पोजिट होने और छात्र-शिक्षक अनुपात पूरी तरह अनुकूल होने के बावजूद कनिष्ठ शिक्षकों का समायोजन किए जाने के आरोप लगे हैं। पीड़ित शिक्षकों का कहना है कि यह कार्रवाई न केवल बेसिक शिक्षा नियमावली के विपरीत है, बल्कि माननीय न्यायालय के स्पष्ट आदेशों की भी अवहेलना है।
कमालगंज विकासखंड के जहानगंज स्थित कम्पोजिट विद्यालय (कक्षा 1 से 8) में कार्यरत सहायक अध्यापक कुलदीप यादव ने बताया कि उनके विद्यालय को पोर्टल पर सही तरीके से दर्ज किए जाने के कारण कभी भी सरप्लस घोषित नहीं किया गया। विद्यालय में पहले ही वरिष्ठता के आधार पर एक अध्यापिका का समायोजन किया जा चुका है। वर्तमान स्थिति में न तो कोई पद रिक्त है और न ही कोई शिक्षक सरप्लस है। इसके बावजूद बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश के तहत
उनका जबरन समायोजन कर दिया गया, जो पूरी तरह नियमविरुद्ध है।
इसी तरह राजेपुर विकासखंड के कम्पोजिट विद्यालय नगला हूसा में भी छात्र-शिक्षक अनुपात की अनदेखी का मामला सामने आया है। यहां कार्यरत शिक्षक रामसनेही ने आरोप लगाया कि विद्यालय में प्राथमिक
और उच्च प्राथमिक दोनों स्तरों पर छात्र संख्या काफी अधिक है, जबकि शिक्षकों की संख्या पहले से ही कम है। इसके बावजूद समायोजन आदेश जारी कर दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरटीई एक्ट के अनुसार यहां एक भी शिक्षक सरप्लस नहीं है, फिर भी बिना किसी ठोस आधार के समायोजन कर दिया गया।
शिक्षकों का कहना है कि हाल ही में माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि शिक्षक की सहमति के बिना किसी भी परिस्थिति में समायोजन नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद विभाग द्वारा बिना
सहमति पत्र लिए ही कनिष्ठ शिक्षकों का समायोजन कर दिया गया। इससे शिक्षकों में भारी रोष व्याप्त है। पीड़ित शिक्षकों ने पूरे मामले की शिकायत जिलाधिकारी फर्रुखाबाद से की है और समायोजन आदेशों को निरस्त कराने की मांग की है। शिक्षकों का कहना है कि यदि नियमों के विरुद्ध की गई इस कार्रवाई को वापस नहीं लिया गया तो वे न्यायालय की शरण लेने को मजबूर होंगे। 

बेसिक शिक्षा विभाग में जबरन समायोजन पर बवाल, नियमों और न्यायालय के आदेशों की अनदेखी का आरोप



