फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) बीते लगभग 24 साल पूर्व 8 वर्षीय बालक की 22 बार सूजा खोपकर बलि चढ़ाकर पड़ोसी पिता-पुत्र नें हत्या कर दी थी| जिसमे दोषी पड़ोसी को पूर्व में ही आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है | मामले में न्यायालय नें दूसरे अभियुक्त को दोषी करार दिया था| सोमवार को सजा पर सुनवाई के बाद न्यायालय नें बचे अभियुक्त को भी आजीवन कारावास व 2 लाख के अर्थदंड से दंडित किया है|
बीते 8 मार्च 2001 को थाना शमसाबाद में रामपाल निवासी खुडिनाखार नें मुकदमा दर्ज कराया था| जिसमे कहा था कि बीते 6 मार्च को उनका 8 वर्षीय पुत्र प्रदीप कुमार उर्फ लालू खेलते-खेलते पड़ोस के सतीश पुत्र मदनलाल के घर चला गया| जब वह घर नही पंहुचा तो उसकी तलाश शुरू की| पड़ोसी रघुवीर व प्रेम चन्द्र ने बताया कि लालू को दिन में 2 बजे सतीश के घर पर खेलते देखा था| जब सतीश नें रामपाल नें बेटे के बारे में जानकारी ली तो सतीश नें बताया कि लालू आया था लेकिन उसी समय चला गया| जब काफी तलाश के बाद ग्रामीणों के साथ सतीश के घर की तलाशी लेनें पंहुचे सतीश व उसका पिता मदनलाल मौके से फरार हो गया| घर में भीतर जाकर देखा तो कमरें के भीतर ताढ पर मृत लालू का पैर लटक रहा था, जब रामपाल नें टार्च की रोशनी में देखा तो ताढ पर लालू की लाश पड़ी थी और उसके ऊपर से पला रखा था| दोनों आरोपी पिता-पुत्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया| पुलिस नें मामले में दोनों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया| न्यायालय में चली सुनवाई के बाद अभियुक्त मदनलाल को पूर्व में ही आजीवन कारवास की सजा सुनाई जा चुकी है| 31 जनवरी को अभियुक्त सतीश को भी विशेष न्यायाधीश डा. अनिल कुमार सिंह नें दोष सिद्ध किया| वहीं सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 3 फरवरी की तिथि दी थी|
पागल बनने का नाटक पर न्यायालय से बचाता रहा सतीश
दरअसल सतीश व उसके पिता मदन लाल नें मिलकर बलि के लिए बालक प्रदीप कुमार उर्फ लालू 22 बार सूजा खोपकर हत्या की थी | मदनलाल को न्यायालय पूर्व में ही आजीवन कारावास की सजा से दंडित कर चुका है| जबकि सतीश खुद को पागल बताकर न्यायालय की कार्यवाही से बचता रहा| बीते 31 जनवरी को उसे भी न्यायालय नें दोष सिद्ध किया था| सोमवार 3 फरवरी को विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट डॉ. अनिल कुमार सिंह ने सजा की सुनवाईके बाद गवाह व साक्ष्य के आधार पर हत्या कर शव छुपाने के मामले में आरोपी सतीश चंद्र को भी आजीवन कारावास की सजा के साथ ही दो लाख रूपये का अर्थदंड लगाया है| जुर्माना दा ना करनें पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा|
बालक को 22 बार सूजा खोपकर पड़ोसी ने चढ़ाई थी बलि, आजीवन कारावास



