फर्रुखाबाद में बंपर पैदावार बनी किसानों की मुसीबत,अब फेंकने की नौबत!

फर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला) फर्रुखाबाद के आलू किसानों को आलू की दुर्दशा पर आंसू बहाने पड़ रहे है, थोक मंडियों में पुराने आलू के दाम गिरकर आसमान से पाताल में समा गये हैं, 250–300 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गए हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई किसान आलू फेंकने को मजबूर हैं। कन्नौज में जहां-जहां हाइब्रिड आलू रखा था, वहां कोल्ड स्टोरों की चिलिंग मशीनें बंद कर दी गई हैं। कारोबारियों और किसानों का कहना है कि आलू के लिहाज से 1997 के बाद 2025 सबसे बुरा साल साबित हो रहा है। इससे पहले 2019–20 में भी आलू सड़कर फेंकना पड़ा था, लेकिन 2025 जैसी स्थिति कभी नहीं देखी। जनपद में 43 हजार 400 हेक्टेयर भूमि पर आलू की खेती होती है, वहीं उत्पादन 16 लाख 1 हजार, 547 मिट्रिक टन होता है| समस्या कैसे बढ़ी
पिछली फसल में जबरदस्त उत्पादन हुआ और आलू कोल्ड स्टोरों में भर दिया गया। इस बार मानसून लंबा चला, नई फसल की बोआई देर से हुई। अक्टूबर–नवंबर में स्टोरों से निकासी शुरू हुई तो उम्मीद थी कि दिवाली और सहालग में मांग बढ़ेगी, लेकिन लगन का सीजन छोटा रहा। उधर नई फसल में भी बंपर पैदावार ने बाजार को और दबा दिया। जमीन पर गिरे दाम
फर्रुखाबाद के कोल्ड स्टोर संचालक विजय यादव नें बताया, लगभग 20 हजार पैकेट आलू उनके कोल्ड में भरा है, लिहाजा आलू के दाम कम होने से किसान आलू निकालने नहीं आ रहा,हर साल दिसंबर तक कोल्ड स्टोर खाली हो जाते थे, मगर इस बार स्टोर भरे पड़े हैं। जिले में 125 से अधिक शीतगृह हैं, जिनमे आलू फंसा है, 200–250 रुपये क्विंटल पर तो कोल्ड स्टोर का भाड़ा भी नहीं निकल रहा। सर्दियों में हरी सब्जियों की आवक बढ़ने से आलू की मांग और घट गई है। आलू जिले से बाहर ना जाने से भीं यह हालात पैदा किये है| बीज से महंगी ढुलाई
सिरोली निवासी कोल्ड मालिक जितेंद्र यादव नें बताया की दिसंबर–जनवरी में दाम सुधरने की उम्मीद कम है।1997 के बाद 2025 सबसे खराब साल है, कोल्ड स्टोर में आलू का भंडारण अभी है, आलू की एक बोरा ढुलाई व मजदूरी 50–60 रुपये प्रति बोरी पड़ रही है। आसपास की मंडियों एटा और आगरा में भी हालात ऐसे ही हैं। पहले नेपाल आलू की सप्लाई थी वह भीं बंद है| अच्छे दाम की आस में किसान फंस गए। कोल्ड स्टोर मालिक मोहन अग्रवाल नें बताया की जिले में अब ज्यादा आलू कोल्ड स्टोर में नहीं है, फर्रुखाबाद में दो करोड़ पैकेट आलू का भंडारण होता है, जिसमे अब कोल्ड स्टोरों में एक दो प्रतिशत आलू ही अटका है। आलू मंडी में 301 से 401 रुपए प्रति पैकेट आलू आढ़ती अरविन्द वर्मा नें बताया की सातनपुर मंडी फर्रुखाबाद में आलू 301 से 401 रुपए प्रति पैकेट बिक्री हुआ, आवक लगभग 50 मोटर रही , कोल्ड स्टोरेज में पुराना आलू फेंकने की नौबत जो 200 से 400 रुपए कुंटल में बिका , उसके भी खरीददार नहीं मिल रहे । जिला आलू विकास अधिकारी राघवेन्द्र सिंह नें जेएनआई कों बताया की अधिकतर कोल्ड खाली हो गये हैं| केबल आलू की खस्ता हालत की अफवाह है| जिले में आलू भाव कम होने के पीछे नेपाल में राजनीति की स्थिरता है | जिस कारण फर्रुखाबाद का आलू नेपाल नहीं जा पाया, इसके आलावा पंजाब, बिहार व पश्चिम बंगाल भीं जाता था, लेकिन वहाँ भीं आलू का उत्पादन होने से फर्रुखाबाद के किसान का आलू नहीं जपाया जो आलू की कम कीमत का एक कारण हैं | इस साल आलू का अधिक उत्पादन होने की उम्मीद है |