नैनिहालों का विकास एवं पोषण सुनिश्चित करेंगी आशायें

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फर्रुखाबाद:  मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने हेतु राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदेश में समुदाय स्तर पर प्रसव पश्चात माँ एवं नवजात शिशु की देखभाल के लिए होम बेस्ड न्यूबार्न केयर (एचबीएनसी) कार्यक्रम चलाया जा रहा है | इसके तहत आशा कार्यकर्ताओं द्वारा जन्म से लेकर 42 दिन तक संस्थागत प्रसव में 6 बार 3, 7,14, 21, 28 एवं 42 वें दिन तथा गृह प्रसव में 7 बार 1, 3, 7,14, 21, 28 एवं 42 वें दिन तक गृह भ्रमण कर नवजात शिशुओं एवं धात्री माताओं के स्वास्थ्य की घरेलू देखभाल कर स्वास्थ्य व सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गयी है | शासन के द्वारा चलाये जा रहे इस अभियान में अब 15 माह तक माँ-बच्चें की देखभाल करने हेतु केंद्र सरकार द्वारा होम बेस्ड केयर फार यंग चाइल्ड (एचबीवाईसी) कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है | इसके तहत शिशुओं की वृद्धि ,विकास एवं पोषण सुनिश्चित करने हेतु 42 दिन के पश्चात अब आशाओं के द्वारा शिशुओं की गृह आधारित देखभाल 15 माह की आयु होने तक अतिरिक्त पांच बार त्रैमासिक गृह भ्रमण की व्यवस्था की गयी है |
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन फर्रुखाबाद के जिला समुदाय प्रक्रिया प्रबन्धक रणविजय सिंह ने कार्यक्रम की जानकरी देते हुए बताया कि एचबीएनसी कार्यक्रम के अंतर्गत आशा द्वारा बच्चे को जन्म से लेकर 42 कि एचबीएनसी  कार्यक्रम के अंतर्गत आशा द्वारा बच्चे को जन्म से लेकर 42 दिन तक गृह भ्रमण कर माँ बच्चे को स्वस्थ रखने हेतु ,माँ को खानपान और अपनी देखभाल के साथ साथ बच्चे को केवल स्तनपान और बच्चे को छूने से पूर्व हाथ धोने की जानकारी देना, वजन लेना ,तापमान मापना , नाल पर कुछ लगाया तो नहीं यह देखना ,बच्चे को कम्बल में लपेटने की सही जानकारी देना और बच्चे की सांस की गति को सुनिश्चित करना कि बच्चा कहीं निमोनिया का शिकार तो नहीं हो रहा है आदि गतिविधियों के माध्यम से बच्चे के स्वास्थ्य की जाँच की जाती थी|

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