फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) भीषण ठंड के बीच कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जनपद के कई कस्तूरबा विद्यालयों में छात्राओं की उपस्थिति न के बराबर है। हालात यह हैं कि अधिकांश विद्यालय खुले तो हैं, लेकिन कक्षाओं में पढ़ने वाली छात्राएं नजर नहीं आ रही हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर स्कूल खोलने का औचित्य क्या है।
बताया जा रहा है कि मुख्यालय स्तर के एक जिम्मेदार अधिकारी ने
शीतकालीन अवकाश को लेकर मौखिक रूप से आश्वासन दिया था। इस पर भरोसा करते हुए कुछ विद्यालयों ने छात्राओं को उनके घर भेज दिया। लेकिन इसके बाद औपचारिक रूप से शीतकालीन अवकाश की घोषणा नहीं की गई। नतीजतन अब स्थिति यह है कि विद्यालय तो खुले हैं, लेकिन छात्राएं घरों में ही रह रही हैं।
दूसरी ओर, बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) के स्पष्ट आदेशों के बावजूद जनपद के कई विद्यालयों में पढ़ाई शुरू कर दी गई है। खासकर निजी विद्यालयों के प्रबंधक शासन और शिक्षा विभाग के आदेशों को दरकिनार करते हुए स्कूल खोल रहे हैं। कुछ प्रबंधकों का कहना है कि ठंड को लेकर जारी आदेश स्पष्ट नहीं हैं, जबकि अभिभावक बच्चों की सेहत को लेकर चिंतित हैं।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में स्थिति और भी गंभीर है। ये विद्यालय दूर-दराज क्षेत्रों की छात्राओं के लिए बनाए गए हैं, जहां आवासीय व्यवस्था के साथ पढ़ाई होती है। ठंड के चलते छात्राओं के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है। इसके बावजूद न तो ठोस अवकाश आदेश समय पर जारी हुए और न ही व्यवस्थाओं को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश दिया गया।
इस संबंध में बीएसए विश्वनाथ प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय आवासीय है । इसलिए शीतकाल8न अवकाश की आवश्यकता नहीं लग रही है। कड़ाके की सर्दी को देखते हुए बच्चों के बचाव के लिए कक्षा 1से 8तकविद्यालयों को बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं। यदि इसके बावजूद कोई विद्यालय खोला जा रहा है तो यह गंभीर लापरवाही है। ऐसे विद्यालयों के खिलाफ जांच कराकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल अभिभावकों और शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ठंड के बीच छात्राओं की गैरहाजिरी और आदेशों की अनदेखी ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निजी स्कूलों के ठेंगे पर बीएसए का आदेश, अवकाश के बाद भी स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल



