जाम से मुक्ति की योजना फाइलों में दबी! कागजों पर रूट… सड़क पर अव्यवस्था

फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) शहर को जाम की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए नगर पालिका और यातायात विभाग द्वारा बनाई गई ई-रिक्शा रूट निर्धारण योजना अभी भी कागजों में दबी पड़ी है। निर्धारित 23 रूटों पर 4180 ई-रिक्शा संचालित करने का लक्ष्य था, लेकिन पालिका लगभग 1700 ई-रिक्शाओं को यूनिक रूट नंबर जारी कर सकी।
इधर यातायात विभाग 6300 से अधिक ई-रिक्शाओं को पहले ही यूनिट नंबर जारी कर चुका है। दोनों विभागों की इस उलझन का असर सीधे शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है। जिन मुख्य रूटों पर ई-रिक्शा चलाए जाने थे वह गुरुगांव देवी मंदिर–रेलवे स्टेशन, कांशीराम कॉलोनी हैवतपुर गढ़िया–स्टेशन स्टेशन–कादरीगेट तिराहा, स्टेशन–बस अड्डा, टाउनहाल–कादरीगेट, स्टेशन–सेंट्रल जेल, जसमई चौकी–आईटीआई चौराहा–बस अड्डा,स्टेशन–पांचाल घाट, बस अड्डा–लोहिया अस्पताल, लालगेट–पांचाल घाट, टाउनहाल–चिलसरा, स्टेशन–जसमई, आईटीआई–साटनपुर–सेंट्रल जेल, भोलेपुर क्रॉसिंग–सेंट्रल जेल, भोलेपुर बिजलीघर–मसेनी–पांचाल घाट,लोहिया अस्पताल–मसेनी–पांचाल घाट, कादरीगेट–लोहिया अस्पताल, साहबगंज–अंगूरीबाग–भैरों मंदिर-माधवपुर,नाला मछरट्टा–कांशीराम कॉलोनी, फतेहगढ़ चौराहा–कैंट–पांचाल घाट बने थे| ये सभी रूट शहर के प्रमुख और भीड़भाड़ वाले मार्ग हैं, जहां अनियंत्रित ई-रिक्शा संचालन से रोजाना जाम की स्थिति पैदा होती है।
योजना क्यों फेल हुई?
नगर पालिका के अनुसार—
एक रूट पर अधिकतम 50 ई-रिक्शा अनुमन्य थे। लेकिन 4180 रिक्शा तय होने के बावजूद सिर्फ 1700 को ही रूट नंबर जारी हो सके। उधर यातायात विभाग ने पहले ही 6300+ ई-रिक्शाओं को यूनिट नंबर जारी कर दिए, जिससे स्थिति और उलझ गई।
एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने में व्यस्त विभाग|
अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद विनोद कुमार का कहना है जिन ई-रिक्शाओं के लिए रूट निर्धारित हो चुके हैं, पहले यातायात विभाग उन पर सक्रियता दिखाए।
वहीं यातायात प्रभारी सत्येंद्र कुमार सिंह का तर्क
“नगर पालिका ने आधा-अधूरा रूट चार्ट तैयार किया है। जब वह विधिवत चार्ट तैयार करेगी, तभी संचालन कराया जाएगा।”
जनता परेशान, जाम का संकट बरकरार
समन्वयहीनता के कारण शहर की प्रमुख सड़कों पर ई-रिक्शा मनमाने ढंग से चल रहे हैं। नतीजतन हर दिन बाजार, चौराहों और मुख्य सड़कों पर जाम की स्थिति बन रही है। स्थानीय लोग बताते हैं कि यदि रूट निर्धारण योजना को समय पर लागू किया जाए, तो शहर की यातायात व्यवस्था को काफी हद तक सुधारा जा सकता है। फिलहाल विभागीय टकराव और लापरवाही से शहर के लोग ही परेशानी झेल रहे हैं।