फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) बुधवार को गणेश उत्सव के प्रथम दिन परंपरा अनुसार भगवान गणेश को घरों में स्थापित किया गया। शुभ मुहूर्त में स्थापना कर पूजन किया गया। श्रद्धालुओं ने पहले दिन स्थापना से पूर्व शोभा यात्रा निकाली। रंग-गुलाल उड़ाते लोग गणपति बप्पा मोरया..आया रे आया गनपति आया.. की
गूंज सुनाई दी। शोभा यात्रा विभिन्न मार्गों से निकाली गई। इसके बाद विधान पूर्व स्थापित किया।
आचार्य डॉ. सर्वेश कुमार शुक्ल ने बताया कि गणेश महोत्सव 27 अगस्त से छह सितंबर तक चलेगा। मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना के लिए भगवान गणेश का आह्वान किया था। महर्षि व्यास बोलते गए और गणपति भगवान बिना रुके 10 दिनों तक महाभारत लिखते गए। इन दस दिनों में भगवान गणेश एक ही मुद्रा में बैठे रहे। इस बीच उनके ऊपर धूल मिट्टी की परत जम गई जिसे साफ करने के लिए अनंत चतुर्दशी को गणेश जी ने खुद सरस्वती नदी में स्नान कर खुद को साफ किया। रिद्धि सिद्धि के दाता गणपति को मोदक और लड्डू का भोग लगाना चाहिए और ऊं गं गणपतये नमः मंत्र का उच्चारण करते हुए रोज दूब चढ़ाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि भगवान गणेश को बुद्धि का देवता माना गया है, अच्छी बुद्धि और विद्या की प्राप्ति के लिए गणपति की पूजा-अर्चना का विधान है और इन 12 नामों का जाप करना चाहिए। गणेशजी के वैसे तो अनेक नाम हैं लेकिन ये सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न-नाश, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र, गजानन नामों का जाप सुफल प्रदान करता है। शास्त्रों में बताया गया है कि भगवान गणेश के इन 12 नामों का पाठ करने से विद्या चाहने वाले को विद्या, धन चाहने वाले को धन, पुत्र चाहने वाले को पुत्र और मोक्ष की इच्छा रखने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
घर-घर में विराजे विघ्नहर्ता गौरी पुत्र गजानन



