गुरु पूर्णिमा पर श्री दुर्वाषा ऋषि आश्रम में भव्य भंडारे की तैयारी

फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) गुरू पूर्णिमा पर क्षेत्र में जगह-जगह कार्यक्रमों को आयोजित किया जायेगा| श्रद्धालु अपने गुरु की पूजा कर उनका आशीर्वाद लिया। शहर के श्री दुर्वाषा ऋषि आश्रम पांचाल घाट पर भी भव्य भंडारे का आयोजन किया गया है|
दरअसल दुर्वाषा ऋषि आश्रम में प्रतिवर्ष गुरु पूर्णिमा को भव्य भंडारे का आयोजन किया जाता है|जिसमे जनपद के साथ ही साथ प्रदेश और उसके आस-पास के श्रद्धालु भंडारे का प्रसाद ग्रहण करनें और गुरु आशीष लेनें के लिए आते है| गुरुवार 10 जुलाई को विगत वर्षों के बाद इस साल भी भंडारे का आयोजन किया जा रहा है| जिसकी तैयारियां जोरों पर चल रही हैं| श्रद्धालु पूरे मनोयोग से कार्यक्रम को भव्यता देनें के लिए लगे हुए हैं| दुर्वाषा ऋषि आश्रम के महंत ईश्वर दास महाराज (ब्रह्मचारी) ने बताया कि आयोजन की तैयारी पूर्ण कर ली गयी हैं| आश्रम में आने वाले श्रद्धालुओं को कोई समस्या ना हो इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है|
गुरु पूर्णिमा पूजा विधि
दुर्वाषा ऋषि आश्रम के महंत ईश्वर दास महाराज (ब्रह्मचारी) ने बताया की इस वर्ष विशेष शुभ योग बनने से गुरु Kashvi Aesthetics Farrukhabadपूर्णिमा बहुत ही फलदायी होगी। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरुओं की पूजा के लिए विशेष महत्व होता है। गुरु पूर्णिमा पर सुबह स्न्नान  कर स्वच्छ कपड़े पहनने के बाद घर के पूजा स्थल में विराजित सभी देवी-देवताओं को प्रणाम करना चाहिए। इस दिन वेदों के रचयिता वेदव्यास को प्रमाण करें और यदि आपने अपने गुरु बना रखे हैं तो उनकी चरण वंदना करनी चाहिए और अपने गुरु का आशीर्वाद लेना चाहिए। इस दिन गुरु के अलावा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। इस दिन गाय की पूजा व सेवा और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
आचार्य सर्वेश कुमार शुक्ल नें बताया कि सनातन धर्म में गुरु और शिष्य की परंपरा आदिकाल से ही चली आ रही है। तभी तो संत करीबदास लिखते है कि गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाये, बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो मिलाये”। कबीरदासजी का यह दोहा गुरु के प्रति सम्मान को व्यक्त करते हुए है। ‘गुरु बिन ज्ञान न होहि’ का सत्य भारतीय समाज का मूलमंत्र रहा है। माता बालक की प्रथम गुरु होती है,क्योंकि बालक उसी से सर्वप्रथम सीखता है।भगवान् दत्तात्रेय ने अपने चौबीस गुरु बनाए थे। गुरु की महत्ता बनाए रखने के लिए ही भारत में गुरु पूर्णिमा को गुरु पूजन या व्यास पूजन किया जाता है। गुरु मंत्र प्राप्त करने के लिए भी इस दिन को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। आप जिसे भी अपना गुरु बनाते हैं,आज के दिन विशेषरूप से उसके प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है।