क्या महिला पत्रकारों को नहीं पढ़ना चाहिए बलात्कार की खबर?

TV ANCHORबलात्कार कानून को लेकर देश भर में बहस चल रही है। इसके स्वरूप और सजा के प्रावधान पर भी चर्चा हो रही है। महिलाओं के समक्ष यौन उत्तेजना से जुड़े शब्दों के इस्तेमाल को भी बलात्कार की श्रेणी में रखने की बात कही जा रही है। तो अब सवाल यह है कि खबरों के धंधों से जुड़ी महिलाओं का क्या होगा? क्या उन्हें बलात्कार की खबर पढ़ने या कवर करने से रोका जायेगा? या फिर बलात्कार से जुड़ी खबरों को पढ़ने के लिए उन्हें विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि दर्शक खूबसूरत एंकर की मीठी आवाज का आनंद लेते हुए बलात्कार के दोषी या आरोपित के संबंध में चटखारे लेकर बात करे और चैनल का टीआरपी भी बढ़े।
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क्या एक महिला द्वारा बलात्कार शब्द का बार-बार इस्तेमाल करना बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता है? जब बलात्कार की घटनाओं की चासनी को महिला एंकरों द्वारा पेश करवाना क्या उनके साथ बलात्कार जैसी घटना नहीं है। बलात्कार से जुड़े कानून को बनाते समय सरकार को इस बात का ध्यान रखना चाहिए, विज्ञापनों में महिला देह का प्रदर्शन क्या बलात्कार नहीं है? प्रेस काउंसिल आफ इंडिया को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए कि मीडिया के धंधे में टीआरपी के लिए महिला एंकरों का इस्तेमाल बलात्कार की श्रेणी में आता है कि नहीं? क्या मीडिया से जुड़ी महिलाएं पेशे गत बलात्कार जैसी घटनाओं के विरोध में आगे आएंगे या टीआरपी के बाजार स्वयं को सामान के रूप में प्रस्तुत करती रहेंगी।

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