एक एआरटीओ क्या-क्या करे.., बीच हाई-वे पर स्कूली बच्चो से भरे खटारा टैम्पों का टूटा पहिया, बड़ा हादसा चला

फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) जनपद में स्कूली बच्चों की आवाजाही के लिए बड़े पैमाने पर अमानक (ग़ैर पंजीकृत व गैर मानक) वाहन संचालित हो रहे हैं! जो बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों के बीच गुरुवार सुबह एक और लापरवाही सामने आई, जब इटावा बरेली हाईवे पर एआरटीओ कार्यालय से कुछ ही दूरी पर पर स्कूली बच्चों से भरा एक अमानत टेंपो हादसे का शिकार होते-होते बच गया। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो टेंपो बच्चों को स्कूल ले जा रहा था। तभी अचानक बीच सड़क पर उसका अगला पहिया टूट गया, जिसके बाद वाहन अनियंत्रित हो गया। बच्चों और राहगीरों में अफरा-तफरी मच गई। टेंपो नियंत्रित होकर सड़क के बीचों खड़ा हो गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। मौके पर मौजूद अन्य वाहन चालकों और स्थानीय लोगों ने टेंपो को धक्का देकर सुरक्षित जगह पहुंचाने में मदद की। टेंपो पर UP 76K 73 का नंबर अंकित था। जब इस नंबर को आरटीओ की वेबसाइट पर चेक किया गया तो पता चला कि यह नंबर अमान्य है। इससे प्रतीत होता है कि टेंपो फर्जी नंबर प्लेट लगाकर चल रहा था। ऐसे वाहन न तो फिटनेस मानकों पर खरे उतरते हैं और न ही इनके पास स्कूल वैन के संचालन की कोई वैध अनुमति होती है।आम तौर पर ऐसे मामलों में स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगता है, लेकिन कई स्थानों पर अभिभावक स्वयं कम किराए और सुविधा के नाम पर बच्चों को ऐसे असुरक्षित वाहनों में भेज देते हैं। इससे बच्चों की जान रोज़ाना जोखिम में रहती है। इस मामले में जब एआरटीओ प्रवर्तन सुभाष राजपूत से बात की गई तो उन्होंने कहा कि एक एआरटीओ क्या क्या करे? उनसे जितना संभव है कार्रवाई की जा रही है, लेकिन लोगों को भी जागरूक होना होगा। अभिभावक और स्कूल प्रबंधन बिना जांच किए ऐसे वाहनों को अनुमति देते हैं, जिससे हादसे बढ़ रहे हैं। टैम्पो में बच्चो का परिवहन अबैध है, कार्यवाही लगातार की जा रही है |