फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) हम दो हमारे दो के लिए पुरुष नसबंदी सबसे बेहतर विकल्प है। जिले में गुरुवार को परिवार नियोजन को लेकर एक सकारात्मक पहल देखने को मिली, जब दो पुरुषों ने स्वेच्छा से नसबंदी कराई। इनमें से एक विकास ने डॉ. राम मनोहर लोहिया पुरुष चिकित्सालय में अपनी नसबंदी कराई। विकास का कहना है कि जब परिवार पूरा हो गया है तो आगे अनचाहे गर्भ और उससे जुड़े जोखिम क्यों उठाए जाएं।आज के समय में जैसे-जैसे परिवार बढ़ता है, वैसे-वैसे खर्च भी बढ़ते जाते हैं। बच्चों का सही से पालन-पोषण और अच्छी शिक्षा देना मुश्किल हो जाता है। निजी अस्पताल में सामान्य प्रसव पर भी कम से कम 20 हजार रुपये और ऑपरेशन पर लगभग 50 हजार रुपये तक खर्च आ जाता है, जिसे एक सामान्य नौकरीपेशा या मजदूर के लिए वहन करना आसान नहीं है। इसी सोच के साथ उन्होंने पत्नी से नसबंदी कराने की बात रखी। शुरू में पत्नी तैयार नहीं हुईं, लेकिन जिला महिला चिकित्सालय की परिवार नियोजन काउंसलर सुनीता और पुरुष नसबंदी विशेषज्ञ डॉ. आरसी माथुर से बातचीत के बाद दोनों सहमत हुए।
परिवार कल्याण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. दीपक कटारिया ने बताया कि समाज में आज भी परिवार नियोजन का बोझ महिलाओं पर डाल दिया जाता है, जबकि पुरुष नसबंदी पूरी तरह सुरक्षित है और इससे ताकत या कार्यक्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने बताया कि आज जिले में दो पुरुष नसबंदी हुईं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक कुल 9 पुरुष नसबंदी हो चुकी हैं, जबकि अप्रैल से अब तक करीब 330 महिला नसबंदी कराई जा चुकी हैं।
उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी व एनएसवी विशेषज्ञ डॉ. आर.सी. माथुर ने बताया कि नसबंदी में शुक्राणु वाहिनी नलिकाओं को बांध दिया जाता है, जिससे शुक्राणु शरीर से बाहर नहीं जाते और यह पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है। नसबंदी के बाद एक-दो दिन का आराम जरूरी होता है, इसके बाद अधिकांश पुरुष सामान्य काम पर लौट सकते हैं। जिला परिवार नियोजन प्रबंधक विनोद कुमार ने बताया कि मिशन परिवार विकास कार्यक्रम के तहत पुरुष नसबंदी पर 3,000 रुपये और महिला नसबंदी पर 2,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके अलावा आशा कार्यकर्ताओं को भी निर्धारित प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
आसान व सुरक्षित तरीके से दो पुरुषों नें करायी नसबंदी

