आपको पता है रोमन और मुगल सम्राट भी करवाते थे जनगणना

भारत में जनगणना 1872 में प्रारंभ हुई, लेकिन यह परंपरा पौराणिक काल से चली आ रही है। प्रभु यीशु मसीह का जन्म तो जनगणना के दौरान ही हुआ। मूसा, कौटिल्य व मुगल साम्राज्य में भी प्रजा की गिनती कराई जाती थी।

देश में प्रत्येक 10 साल बाद होने वाली जनगणना का दूसरा दौर 9 से 28 फरवरी तक चल रहा है। पंद्रहवीं जनगणना को लेकर लोगों में उत्सुकता है कि आखिर जनगणना क्यूं और कब से..इसे लेकर भास्कर ने कुछ रोचक तथ्यों को समेटा है।

मसीही धर्म के उद्भव की बात करें तो 2011 साल पहले जनगणना के दौरान बैतलहम में प्रभु यीशु का जन्म हुआ। पवित्र बाइबिल के लूका रचित सुसमाचार के दूसरे अध्याय में इसका जिR है। अध्याय में लिखा है-उन दिनों औगस्तुस कैसर की ओर से यह आज्ञा निकली कि सारे जगत के लोगों के नाम लिखे जाएं।

यह पहली नाम लिखाई उस समय हुई जब क्विरिनियुस सूरिया का हाकिम था। सब लोग नाम लिखवाने को अपने-अपने नगर को गए। अत: युसूफ भी इसलिए गया कि वह दाऊद के घराने और वंश का था, गलील के नासरत नगर से यहूदिया में दाऊद के नगर बैतलहम को गया। ताकि अपनी मंगेतर मरियम के साथ जो गर्भवती थी, नाम लिखवाए। भीड़ की वजह से सराय में जगह न मिलने पर प्रभु यीशु के माता-पिता मरियम-युसूफ को गौशाले में ठहरना पड़ा। वहीं प्रभु यीशु का जन्म हुआ। जानकारों के अनुसार जहां भी रोमी साम्राज्य था वहां जनगणना होती थी।

पादरी पीटर सिंग बताते हैं कि प्रभु यीशु मसीह के जन्म के हजारों साल पहले भी जनगणना होती थी। स्वयं परमेश्वर ने नबी मूसा को आज्ञा दी थी कि इस्रालियों के गोत्रों के अनुसार गिनती करे। गिनती के मुताबिक ही उन्हें धार्मिक व सामाजिक ड्यूटी अलाट की जाती थी। नबी मूसा के निधन के बाद यह काम नबी यहोशू ने किया। बाइबिल में गिनती नाम की किताब भी है। इब्राहीम से प्रभु यीशु तक 42 पीढिय़ों का जिक्र है।