फर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला) रंगों का त्योहार होली इस बार और भी खास होगा, क्योंकि जिले की स्व-सहायता समूह की महिलाएं प्राकृतिक हर्बल रंग-गुलाल तैयार कर रही हैं। महिलायें पर्यावरण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए हर्बल रंग-गुलाल बना रही हैं।
होली पर इस बार जनपद ग्रामीण महिलाओं ने बाजार के हानिकारक रासायनिक गुलाल को मात देने के लिए प्राकृतिक हर्बल गुलाल तैयार किया हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत समूह की पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित विकल्प उपलब्ध करा दिया है। जिससे अब चेहरे पर हर्बल गुलाल महकेगा
मॉडल आकाश प्रेरणा शंकुल स्तरीय समिति ग्राम धर्मनगरिया विकास खंड बढ़पुर में समूह की महिलाओं नें हर्बल गुलाल बनाकर रोजगार की तरफ दस्तक दी है| उत्साहित महिलाओं ने दावा किया की अब वह बड़े पैमाने पर गुलाल तैयार करेगी| मांग के अनुसार ही उत्पादन किया जायेगा|
प्राकृतिक संसाधनों से बनाया हर्बल गुलाल
समूह किक महिलाओं नें सब्जियों और फूलों के प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल कर हर्बल गुलाल बना रही हैं। पलाश के फूलों से केसरिया (नारंगी) गुलाल, पालक भाजी से हरा गुलाल और लाल भाजी से लाल गुलाल, चुकंदर व धनियां से भी तैयार किया जा रहा है। इसमें गुलाब गेंदा के फूलों की पंखुड़ियां, गुलाब जल और इत्र मिलाकर खुशबूदार बनाया जाता है। कोई भी रासायनिक पदार्थ नहीं मिलाया जाता, इसलिए यह त्वचा, आंखों और बालों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
इको-फ्रेंडली व रसायन-मुक्त गुलाल
बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक गुलाल अक्सर त्वचा में जलन, एलर्जी और आंखों को नुकसान पहुंचाते हैं। बिहान की दीदियां चुकंदर, पालक, लाल भाजी व कॉर्न फ्लावर के बेस में प्राकृतिक अर्क मिलाकर चर्म-रोग मुक्त और इको-फ्रेंडली गुलाल तैयार कर रही हैं। यह गुलाल न केवल मानव अनुकूल है, बल्कि पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचाता।
आफिसर्स क्लब में लगेगी प्रदर्शनी
मास्टर ट्रेनर सुरेन्द्र पाण्डेय नें बताया की हर्बल गुलाल की आफिसर्स क्लब फतेहगढ़ में प्रदर्शनी लगेगी| इसके बाद सरकारी मेला लगाकर हर्बल गुलाल की बिक्री का प्रयास होगा| इसके साथ ही ऑन लाइन भी गुलाल को बिक्री किये जानें का प्रयास होगा| जिला मिशन मैनेजर अवनीश कुमार, व्लाक मिशन मैनेजर सुमित त्रिवेदी रहे|



