संसद भवन में श्रद्धांजलि, नहीं शामिल हुए शहीदों के परिजन

13 दिसंबर 2001 को आज ही के दिन संसद पर हुए हमले में कुल 9 लोग शहीद हुए थे। इन शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए तमाम दलों के नेता व सांसद संसद परिसर में जमा हुए। लेकिन शहीदों के परिवार से कोई भी इस श्रद्धांजलि समारोह में शामिल नहीं हुए।

शहीदों के परिवार वालों की शिकायत है कि सरकार ने उनसे जो वादे किए थे उसे पूरा नहीं किया गया। उनका कहना है कि संसद हमले के दोषियों को फांसी होनी चाहिए। उनको बख्शा नहीं जाना चाहिए। शहीद हेड कॉन्सटेबल चौधरी विजेंद्र सिंह के परिजनों का कहना है कि दोषियों को फांसी की सजा होनी चाहिए। हमारे बच्चे बेघर हो गए हैं। इस तरह के हमले और नहीं होने चाहिए। शहीद चौधरी विजेंद्र सिंह पूर्व उपराष्ट्रपति कृष्णकांत के ड्राइवर थे।

दूसरी तरफ शहीद कॉन्स्टेबल घनश्याम के परिजनों का कहना है कि दोषियों को फांसी की जजा होनी चाहिए। शहीद घनश्याम के पुत्र का कहना है कि अगर संसद हमले में किसी नेता की मौत हुई होती तो तब इनको पता चलता। कैसे दूसरे की जान जाती है और कैसे शहीद होते हैं। नेता तो अपना सिर्फ उल्लू सीधा करते हैं।