डेस्क: भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की रैलियों के जवाब में सपा की जवाबी रैलियों का संदेश छुपा नहीं है। शायद यही वजह है कि बसपा मोदी की आठ रैलियों के जवाब में करीब 80 रैलियां कर यूपी के चुनावी समर को भाजपा बनाम बसपा पर केंद्रित कर देना चाहती है।
बसपा सुप्रीमो मायावती इस समय दिल्ली में लोकसभा चुनाव की रणनीति पर मंथन में जुटी हैं। पिछले दिनों उन्होंने यूपी के वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली में मुलाकर सूबे की चुनावी रणनीति पर मंथन किया। बैठक से लौटे पार्टी के एक वरिष्ठ कोआर्डिनेटर बताते हैं कि जमीनी स्तर पर हर कहीं से यह फीडबैक आ रहा है कि सूबे का चुनावी समर बसपा और भाजपा के बीच ही केंद्रित रहेगा।
दूसरा, भाजपा को रोकने में मुस्लिम सपा से अधिक बसपा को मुफीद समझ रहे हैं। सांप्रदायिक दंगा मुक्त बसपा शासनकाल और मुजफ्फरनगर दंगे में मौजूदा सरकार की कार्यशैली ने इसका माहौल बना दिया है। मगर इतना सब कुछ होने के बावजूद भाजपा और बसपा के बीच सीधी लड़ाई का माहौल उभर नहीं पा रहा है जिससे मुस्लिम अभी भी कई जगह दुविधा में नजर आ रहे हैं।
इसके उलट, पूरा माहौल खिलाफ होने के बावजूद सपा मोदी के समानांतर रैलियां कर सपा बनाम भाजपा का माहौल बनाने की जुगत में है। पार्टी के इस नेता के अनुसार बसपा ने यूपी के लोकसभा चुनावों के लिए 80 रैलियों की योजना बनाई है। हर लोकसभा क्षेत्र में कम से कम एक रैली। जो लोकसभा क्षेत्र जिला मुख्यालय पर हैं वहां रैली जिला मुख्यालयों पर जबकि जो इससे हटकर हैं उनके लिए अलग स्थान तय किया जाएगा। इसके लिए जोनल कोआर्डिनेटरों को निर्देशित कर दिया गया है। ये रैलियां पार्टी की रणनीति को अंजाम तक पहुंचा देंगी।
पार्टी अध्यक्ष मायावती के इस सप्ताह लखनऊ आने की संभावना है। यहां आने के बाद प्रत्याशियों की आधिकारिक घोषणा व रैलियों का कार्यक्रम तय हो जाएगा।
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, स्वामी प्रसाद मौर्य व प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर की अलग-अलग रैलियां जारी रहेंगी।


