मैं नीर भरी दु:ख की बदली, उमड़ी कल थी मिट आज चली..

फर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला) फर्रुखाबाद में 26 मार्च 1907 को महादेवी वर्मा का जन्म हुआ था। महादेवी के परिवार की भारतीय संस्कृति में गहरी आस्था थी, ऐसे में उनका भी झुकाव बचपन से ही साहित्य और कला की तरफ रहा था। आगे चलकर वह हिंदी साहित्य की प्रमुख कवियत्रियों में से एक थीं। जिनको छायावादी युग के चार स्तम्भों में गिना जाता है। महादेवी वर्मा का साहित्यिक योगदान बहुत महत्वपूर्ण है, इसी वजह से उनको ‘हिंदी साहित्य की मीरा’ भी कहा जाता है। वह सिर्फ कवियत्री ही नहीं बल्कि निबंधकार और समाजसेवी भी थीं। महादेवी का जीवन साहित्य के प्रति समर्पण, स्त्री स्वतंत्रता की आवाज और

देखें वीडियो समाजसेवी के रूप में काफी प्रेरणादायक रहा है जिसकी छाप उनकी रचनाओं में भी झलकती है। फर्रुखाबाद नगर के रेलवे रोड़ पर पल्ला स्थित महादेवी वर्मा का प्रतिमा की प्रतिष्ठा 11 सितंबर 1990 में बना है| जिसमे पहले से ही दुकानदार अतिक्रमण किये थे अब बिजली विभाग की करतूत ने प्रतिमा को पीछे धकेल दिया| जिससे जनपद के कवियों में भारी आक्रोश व्याप्त है| उनके प्रतिमा स्थल को देखकर उनकी कविता की लाइन याद आती है, मैं नीर भरी दु:ख की बदली, उमड़ी कल थी मिट आज चली……
महादेवी विद्या पीठ के समन्वयक राष्ट्रीय कवि शिव ओम अम्बर ने बताया की जब महादेवी की प्रतिमा पर पुष्पांजली अर्पित करने जाते हैं तो केबल आंसू निकलना ही रह जाता है, उन्हें लगता है शायद जिले के किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि की नजर पड़े और महादेवी जी की प्रतिमा स्थल का कायाकल्प हो सके| बिजली विभाग नें जो ट्रांसफार्मर लगा दिये जिससे उनके स्मारक का फाटक ठीक से नही खुलता| उन्होंने ट्रांसफार्मर को हटाये जानें की मांग की है|
कवि महेश पाल सिंह सोमवंशी ‘उपकारी’ नें बताया की यह बहुत गलत हुआ है| बिजली विभाग नें जिस तरह से ट्रांसफार्मर लगा रखे हैं उन्हें जल्द हटाया नही गया तो कवि धरना प्रदर्शन पर बाध्य होंगे| महादेवी वर्मा के लिए कवि कुमार विश्वास भी जब जनपद के मेला रामनगरिया में आये थे तो उन्होंने भी महादेवी को लेकर चिंता व्यक्त की थी|
दीप संस्था के संस्थापक कवि निमिष टंडन नें बताया की उनका जिस मकान में जन्म हुआ वह तक तो उनका स्मारक नही बन पाया जो रेलवे रोड़ पर प्रतिमा लगायी गयी थी, उसके सामने भी बिजली विभाग नें ट्रांसफार्मर लगा दिये, जिसे ‘हिंदी साहित्य की मीरा’ महादेवी का अपमान तो है की कवियों और हिंदी के साधकों का भी अपमान हुआ है| बिजली विभाग इसको हटाये नही तो कवि कविता आगे की रणनीति पर विचार करेंगे|
अभिव्यंजना के समन्वयक भूपेन्द्र प्रताप सिंह नें कहा की कवित्री महादेवी वर्मा की प्रतिमा के सामने ट्रांसफार्मर लगा दिये उन्हें हटाया जाये, उन्होंने पूर्व में भी ट्रांसफार्मर हटाये जानें की मांग की थी, इसके साथ ही अब फिर सभी कवियों के साथ मिलकर योजना बनायी जायेगी|

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