मनमोहन-मोदी सरकारों में किन IAS अफसरों पर मुकदमा चला व कौन बचा, देखें लिस्ट

0

JNI NEWS : 11-07-2019 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS

जेएनआई डेस्क- केंद्रीय सूचना आयोग के आदेशों के अनुपालन में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने पिछले 10 वर्षों में आईएएस अफसरों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में दी गयी अभियोजन स्वीकृति तथा स्वीकृति की मनाही की सूची लखनऊ स्थित एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर को प्रदान की है|

सूची के अनुसार 01 जनवरी 2010 से 26 मार्च 2019 के बीच डीओपीटी द्वारा 102 अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गयी जो 56 आईएएस अफसरों से संबंधित थी जबकि 20 आईएएस अफसरों से जुड़े 21 प्रकरणों में स्वीकृति दिए जाने से मना किया गया|

इन 102 स्वीकृतियों में 65 स्वीकृतियां मनमोहन सिंह सरकार तथा 37 नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा दी गयीं जबकि 21 मनाही के मामलों में 10 मनमोहन सिंह सरकार तथा 11 नरेन्द्र मोदी सरकार के समय की थीं|

In compliance of the Central Information Commission order, the Department of Personnel and Training (DOPT) has provided to Lucknow based activist Dr Nutan Thakur the list of IAS officers against whom prosecution sanction under Prevention of Corruption Act was granted or refused during the last 10 years.

As per the list, a total of 102 prosecution sanctions related with 56 IAS officers were granted by DOPT from 01 January 2010 to 26 March 2019, while prosecution sanction was denied in 21 cases related with 20 IAS officers.

Of 102 sanctions, 65 were given by Manmohan Singh government while 37 by Narendra Modi government. Of the 21 cases of denial, 10 were by Manmohan Singh government and 11 by Narendra Modi government.

Maximum number of sanction have been granted against R K Srivastava of UT Cadre and Vinod Kumar of Orissa (12 cases each), K S Kropha of Assam (9 cases), K S Samria of Assam (6 cases) and Sanjeev Kumar of Haryana, Dr Pradeep Kumar of Jharkhand and Pradeep Shukla of Uttar Pradesh cadre (4 cases).

Other names include Yerra Srilakshmi and B P Acharya of Andhra Pradesh, Arvind and Tinoo Joshi of Madhya Pradesh, Rajendra Kumar of UT and Ashok Chawla of Gujarat Cadre.

Those denied prosecution sanction include K K Pant of Himachal Pradesh, Parimal Rai of UT, Sadakant Shukla of UP and Yogendra Tripathi of Karnataka cadre.

Initially DOPT had denied this information to Nutan but Information Commissioner Divya Prakash Sinha had directed the information to be provided in larger public interest.

सबसे अधिक स्वीकृतियां यूटी कैडर के आरके श्रीवास्तव तथा उड़ीसा कैडर के विनोद कुमार (12-12 केस), असम के केएस क्रोफा (9 केस) तथा केएस सामरिया (6 केस) तथा हरियाणा के संजीव कुमार, झारखण्ड के डॉ प्रदीप कुमार तथा उत्तर प्रदेश कैडर के प्रदीप शुक्ला (4-4 केस) के विरुद्ध दी गयीं|

अभियोजन स्वीकृति मिलने वाले अन्य नामों में आंध्र प्रदेश कैडर की एरा श्रीलक्ष्मी तथा बी पी आचार्या, मध्य प्रदेश के अरविन्द एवं टीनू जोशी, यूटी के रणेंद्र कुमार तथा गुजरात कैडर के अशोक चावला शामिल हैं|

अभियोजन स्वीकृति मना होने वालों में हिमाचल प्रदेश के केके पन्त, यूटी के परिमल राय, यूपी के सदाकांत शुक्ला तथा कर्नाटक कैडर के योगेन्द्र त्रिपाठी शामिल हैं|

पहले डीओपीटी ने नूतन को सूचना देने से मना कर दिया था किन्तु सूचना आयुक्त दिव्य प्रकाश सिन्हा ने व्यापक जनहित में यह सूचना दिए जाने का आदेश दिया था|

इस लेख/समाचार पर अपनी प्रतिक्रिया लिखें-