भाईदूजः भाईयों को सलाखों के पीछे देख छलक उठीं आंखें

फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) केन्द्रीय कारागार व जिला कारागार में यूं तो बंदियों व कैदियों का हर दिन चार दीवारी में ही गुजरता है। लेकिन गुरुवार को भाई दूज के पर्व पर यहां रौनक के साथ आंसू भी छलके। बहन को देखकर भाई इतने भावुक हो गए कि मानो पूरी दुनिया मिल गई हो। कोई अपनी बहन से लिपटकर रोया तो कोई उसे निहारता ही रहा। चंद मिनटों के लिए ही सही भाई को देखकर बहनों की आंखों में भी आंसू आ गए। जेल की सलाखों में बंद भाई को देेख बहनों की आंखें छलक आईं। गुरुवार को भाई दूज पर बहनों ने जेल में पंहुच भाइयों का टीका किया। साथ ही सभी ने ईश्वर से भाई ही जल्दी मुक्ति की प्रार्थना की। गुरुवार को जेल अधिकारियों ने बहन-भाई के मिलने का सिलसिला शुरू करा दिया। लंबी लाइन लगाकर बंदियों की बहनों ने काफी देर-देर तक इंतजार किया। उसके बाद उन्हें जेल में प्रवेश दिया गया|
प्रत्येक बंदी को सेन्ट्रल जेल व जिला जेल में जेल प्रशासन ने लगभग आधा घंटा तक मुलाकात का समय दिया। इस दौरान जेल पुलिसकर्मियों ने बंदियों पर नजर बनाए रखी। उनके द्वारा मिलाई के लिए आने वाले परिजनों की जांच की, इसके बाद ही मिलने का मौका प्रदान किया। मिलने का सिलसिला शाम तक चलता रहा। जिला जेल में कुल 365 महिलाओं, 3 पुरुष व 118 बच्चों नें मुलाकात की| इस दौरान पूरी सतर्कता बनाए रखी। मुलाकात को आने वाले प्रत्येक परिजन को जांच के बाद ही मिलने का मौका दिया गया। सेन्ट्रल जेल में 834 महिलाओं नें जेल में निरुद्ध भाईयों से मुलाकात की, महिलाओं के साथ कुल 321 बच्चे भी जेल में पंहुचे|
जिला जेल अधीक्षक अरविन्द श्रीवास्तव नें जेएनआई को बताया कि बहनों की सकुशल मुलाकात करायी गयी| बहनों को किसी प्रकार की तकलीफ ना हो इसका पूरा ध्यान रखा गया| सेन्ट्रल जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक आशीष तिवारी नें जेएनआई को बताया कि जेल में आनें वाली बहनों को सुबिधा जनक रूप से मुलाकात करायी गयी| जेल के कर्मी उनकी व्यवस्था ले लगाये गये थे|