फर्रुखाबाद:(अमृतपुर संवाददाता) अमृतपुर तहसील के कई गाँव बाढ़ से प्रभावित रहें हैं| जिनकी समस्याओं को देखकर गला रुंध जाता है| बाढ़ पीड़ितों का दर्द खुद मौके पर जाकर करीब समझा जा सकता है| तहसील के कई मंजरे हैं जहाँ बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहें हैं| जिन गाँव में बिजली लगभग महीने भर से गायब है! सड़के बाढ़ अपने साथ वहा ले गयी, मोबाइल नेटवर्क आते नही, भोजन भगवान भरोसे उन बाढ़ पीड़ितों का दर्द किसी पहाड़ से कम नही है|
तहसील क्षेत्र के ग्राम आसमपुर के मजरा मंझा की मडैया के हालत काफी खराब नजर आये| बाढ़ के दौरान जो दो सरकारी नाव मंजरे के लोगों को दी गयीं थी वह बाढ़ के तेज बहाव में टिक नही पायीं|
लिहाजा एक जिला पंचायत प्रत्याशी की तरफ से मोटर वोट डाली गयी जिससे लोगों का कुछ आवागमन चल रहा है| जानकारी के मुताबिक गाँव की आबादी 700 है 175 मतदाता हैं 97 लोगों को बाढ़ राहत सामग्री मिली है, एक दर्जन गर्भवती महिलाएं हैं| ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के दौरान गाँव में लेखपाल, स्वास्थ्य टीम नही पंहुची|
भूख से तडप रहे आबारा मबेशी
दरअसल बढ़ के दौरान मंझा की मडैया में हर तरफ पानी भरा था, जिससे घास भी खत्म हो गयी| सूखे में पैर रहने भर की जगह नही बची, लिहाजा इस बीच गाँव के आस-पास रहने वाले अन्ना मबेशी एक छोटे से टापू पर अपना बसेरा बनाये हुए दिखे, उसके आस-पास कई किलोमीटर पानी नजर आ रहा था| आबारा पशु भूख से बदहाल होकर बेरी के पत्त्ते खाते नजर आये| ग्रामीणों ने बताया कि गाँव के भीतर कोई भी प्रशासनिक अधिकारी समस्याओं से रूबरू होने नही आया|
खतरे के निशान से नीचे आयीं गंगा
गंगा शुक्रवार सुबह 8 खतरे के निशान से नीचे आ गयीं| खतरे का निशान 137.10 पर दर्ज है, जबकि गंगा सुबह 136.95 मीटर पर दर्ज की गयीं| गंगा में 80447 क्यूसेक पानी नरौरा बांध से छोड़ा गया| वहीं रामगंगा को सुबह 8 बजे 136.40 मीटर पर दर्ज किया गया| रामगंगा में 8307 क्यूसेक पानी छोड़ा गया|
उपजिलाधिकारी संजय कुमार नें बताया कि बाढ में फंसे अन्ना मबेशियों के चारे की व्यवस्था करायी जायेगी, वहीं ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य टीम को भेजा जायेगा| किसी भी ग्रामीण को कोई समस्या नही होगी| लगातार सुबिधाओं को पंहुचाया जा रहा है|
बाढ़ में गजभर जमीन को तरसे लोग, यहाँ कागजी नाव पर दौड़ी सुबिधायें!



