बंसत पंचमी: जाने पूजन का शुभ मुहूर्त, बाजार गुलजार

फर्रुखाबाद:(जेएनआई डेस्क) विद्या, ज्ञान और बसंत ऋतु के आगमन का पर्व बसंत पंचमी इस वर्ष पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। आचार्य के अनुसार बसंत पंचमी के दिन पूजा, हवन और शुभ कार्यों के लिए विशेष शुभ मुहूर्त रहेगा। कल सुबह 7.20 बजे से लेकर दोपहर 1.45 बजे तक का समय अत्यंत शुभ माना गया है। इस दौरान मां सरस्वती की पूजा, विद्यारंभ, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं।
बसंत पंचमी को लेकर शहर से लेकर गांव तक माहौल रंगीन हो गया है। बाजारों में पीले रंग की वस्तुओं की खास मांग देखने को मिल रही है। पीले वस्त्र, पूजा सामग्री, फूल-मालाएं, अबीर-गुलाल और सजावटी सामानों से दुकानें सजी हुई हैं। खासकर बाजार में जबरदस्त भीड़ उमड़ रही है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी बसंत पंचमी के मौके पर पतंग उड़ाने की तैयारी में जुटे हैं। पूजा सामग्री की दुकानों पर मां सरस्वती की प्रतिमाएं, वीणा, किताबें और कलश की बिक्री तेज है। दुकानदारों का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी बसंत पंचमी पर अच्छी बिक्री की उम्मीद है। पीले फूल, केसरिया चुनरी और पीले रंग के प्रसाद की मांग अधिक है, क्योंकि इस दिन पीले रंग को विशेष शुभ माना जाता है। शिक्षण संस्थानों में भी बसंत पंचमी को लेकर विशेष तैयारी की गई है। स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा की जाएगी। छोटे बच्चों के लिए विद्यारंभ संस्कार भी इसी दिन कराया जाएगा। कई जगहों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन और सरस्वती वंदना का आयोजन किया जा रहा है। आचार्य डॉ. सर्वेश कुमार शुक्ल के अनुसार बसंत पंचमी का पर्व नई शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन शिक्षा, कला, संगीत और ज्ञान से जुड़े कार्यों की शुरुआत शुभ फल देती है। यही कारण है कि लोग इस दिन किताब, कलम और वाद्य यंत्र की पूजा करते हैं। बसंत पंचमी के साथ ही मौसम में भी बदलाव साफ नजर आने लगता है। ठंड धीरे-धीरे विदा लेने लगती है और चारों ओर बसंत की छटा बिखर जाती है। सरसों के पीले फूल, आम के बौर और रंग-बिरंगी पतंगें इस पर्व की सुंदरता को और बढ़ा देती हैं। कुल मिलाकर, बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा, उल्लास और नई उम्मीदों के साथ मनाने को लेकर लोग उत्साहित नजर आ रहे हैं।
बसंत पंचमी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा जी के मुख से इसी दिन देवी सरस्वती प्रकट हुई थीं। उनके प्रकट होते ही संसार से अज्ञानता का अंधकार दूर हुआ था। इस दिन को ‘अबूझ मुहूर्त’ भी कहा जाता है, जिसका मतलब है कि इस दिन किसी भी शुभ काम जैसे – विवाह, मुंडन या गृह प्रवेश के लिए पंचांग देखने की जरूरत नहीं होती है।
सरस्वती पूजा विधि
अंत में मां सरस्वती की आरती कर प्रसाद बांटें।
मां सरस्वती को पीला रंग बेहद प्रिय है।
इस दिन पीले वस्त्र धारण करें और पूजा में पीली चीजें शामिल करें।
पूजा की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
साथ ही भगवान गणेश की प्रतिमा भी स्थापित करें।
वेदी के दाईं ओर जल से भरा कलश स्थापित करें।
बच्चे अपनी किताबें, पेन और अन्य कार्यक्षेत्र की चीजें मां के चरणों में रखें और उनका भी पूजन करें।
मां सरस्वती को पीले चावल, बूंदी के लड्डू व केसरिया हलवे का भोग लगाएं।
पूजा के दौरान “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।