फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) वायुमण्डल में आर्द्रता बढ़ने तथा मौसम में हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण बोई गई फसलों में फफूंदीजनित रोगों एवं कीटों का प्रकोप बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार इस समय आलू और सरसों की फसलें माहू, थ्रिप्स एवं झुलसा जैसे रोगों से सर्वाधिक प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में किसानों को अपनी फसलों की निरंतर निगरानी करने की आवश्यकता है। इस समय आलू में अगेती एवं पिछेती झुलसा रोग का भी अधिक खतरा रहता है। अगेती झुलसा में पत्तियों पर कत्थई भूरे धब्बे बनते हैं, जबकि पिछेती झुलसा में पत्तियों व तनों पर भूरे धब्बों के साथ निचली सतह पर रूई जैसी फंगस दिखाई देती है।रोकथाम हेतु मैंकोजेब 75% डब्ल्यूपी 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी अथवा कार्बेन्डाजिम 12% + मैंकोजेब 63% डब्ल्यूपी 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। रोग के तीव्र प्रकोप पर मेटालेक्सिल + मैंकोजेब अथवा सायमोक्सानिल + मैंकोजेब अथवा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड के प्रयोग की सलाह दी गई है।
रोकथाम हेतु मैंकोजेब 75% डब्ल्यूपी 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी अथवा कार्बेन्डाजिम 12% + मैंकोजेब 63% डब्ल्यूपी 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। रोग के तीव्र प्रकोप पर मेटालेक्सिल + मैंकोजेब अथवा सायमोक्सानिल + मैंकोजेब अथवा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड के प्रयोग की सलाह दी गई है।



