फर्रुखाबाद: हिंदी पत्रकारिता के 187 साल पूरे होने पर हर साल की तरह इस वर्ष भी पत्रकारिता दिवस का आयोजन हुआ| मुख्य अतिथि से लेकर सभी वक्ताओं ने विकास भवन के सभागार में नए विषयों पर विचारो का आदान प्रदान किया है| प्रख्यात कवि शिवओम अम्बर, वयोवृद्ध पत्रकार यदुनंदन लाल गोस्वामी, पत्रकारिता से करियर शुरू करने वाले आईएएस पवन कुमार, आईपीएस जोगेंद्र सिंह ने वक्ता के रूप में मंच संभाला तो सभा से पत्रकार वेदपाल सिंह, पंकज दीक्षित और अनिल वर्मा शेखर ने पत्रकारिता के युग परिवर्तन के हिसाब से सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं पर विचार रखे| अध्यक्षता पत्रकार यूनियन (उपजा) के जिलाध्यक्ष अरुण कटियार ने की|

कार्यक्रम की शुरुआत में सबसे पहले वक्ता पत्रकार वेदपाल सिंह ने पत्रकारिता के इतिहास और वर्तमान के बीच सम्बन्ध स्थापित करते हुए कई उतार चड़ाव पर व्याख्यान दिया| मिशन से व्यापारिक प्रतिष्ठान के रूप में परिवर्तित होती पत्रकारिता पर चिंता प्रगट की| इसी के साथ उन्होंने नकारात्मक प्रस्तुतीकरण के स्थान पर सकारात्मक विषयों को छापने की वकालत की| उन्होंने देश के छोटी के घरानों के अखबारों में संपादको की जगह बिज़नस रिलेटेड पर्सन्स को स्थापित करने पर रोष प्रगट किया|

इसके बाद टीवी और न्यू मीडिया के पत्रकार पंकज दीक्षित ने 200 सालो में पत्रकारिता के समय समय पर बदलते मिशन का उल्लेख किया| 1947 के समय कलम देश को आजाद करने के लिए चली तो 1975/76 में आपातकाल में देश में दमन चक्र के विरुद्ध पत्रकारिता हुई| और वर्तमान में भ्रष्टाचार और व्यवस्था परिवर्तन के लिए लेखनी चलाने की जरुरत पर बल दिया| विषय हिंदी पत्रकारिता का था लिहाजा अंग्रेजी अखबारों के मुकाबले हिंदी अखबारों की जद्दोजहद पर भी व्याख्यान दिया|
सभा की और से तीसरे और अंतिम वक्ता टीवी मीडिया के पत्रकार अनिल वर्मा शेखर ने पत्रकारिता दिवस को मनाये जाने की सार्थकता पर बल दिया| उन्होंने कहा कि हम जो गोष्ठी में कहते है उस पर अमल करे और साल भर बाद जब फिर इक्कठे हो तब मूल्याकन करे| किस पत्रकार ने वर्ष भर क्या उपलब्धि की उस पर चर्चा हो और आगे और क्या नया कर सकते है इसे भी गोष्ठी में शामिल किया जाए|
दूसरे भाग में मंचो पर आसीन वक्तो की बारी आई| सबसे पहले जिले के वयोवृद्ध पत्रकार यदुनंदन लाल गोस्वामी ने अपने ज़माने की साधन विहीन पत्रकारिता के संस्मरण सुनाये| उन्होंने इशारो इशारो में खबरों के लिए प्रशसनिक अफसरों से निश्चित दूरी और निकटता बनाये रखने का गुण भी युवा पत्रकारों को बताया| वर्तमान में पेड़ न्यूज़ पर अपनी पीड़ा व्यक्त की| एवं विश्व भर में एक साल में शहीद हुए पत्रकारों के लिए दो मिनट का मौन भी रखवाया|

मंच के अगले वक्ता के रूप में आईपीएस जोगेंद्र सिंह जो की फर्रुखाबाद के वर्तमान में एसपी भी है की बारी थी| जोगेंद्र सिंह ने युवा पत्रकारों को निरंतर ज्ञान बढ़ाने पर बल दिया| उनके अनुसार सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार की पत्रकारिता की जरुरत है मगर इसके लिए विषयो पर गूढ़ ज्ञान की जरुरत है| सबसे नयी बात जो बहुत कम प्रशसनिक अफसरों से ऐसे मंचो पर सुनने को मिलती है वो ये थी कि जोगेंद्र सिंह खबरों के साथ विचारो के प्रकाशन के समर्थक भी दिखे| वैसे तो वर्तमान में टीवी और न्यू मीडिया में ये चलन है कि लगभग हर खबर के साथ पत्रकार के विचार और सलाह भी लगी होती है मगर अखबारों में सिर्फ घटना ही छापने का चलन है| उन्होंने कहा कि आज हिंदी पत्रकारिता अपने सम्मानपूर्ण स्थान पर है। उन्होंने कहा कि हर खबर के साथ सचेत करने वाला या घटना से सम्बन्धित अन्य ऐसे पहलु छपे जो घटनाये रोकने में कामयाब हो तो पत्रकारिता का सकारात्मक पहलु अपने आप बन जायेगा| उन्होंने पत्रकारिता दिवस पर सभी को शुभकामनायें भी दी|

इसके बाद मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात कवि शिवओम अम्बर ने पहले तो उनसे बोलने वाले वक्ताओ के व्याख्यान की समीक्षा की उसके बाद पत्रकारिता के विषय पर कवि रूप प्रगट किया| पत्रकारिता की जरुरत और महत्ता के साथ वर्तमान के परिवेश में शासन प्रशासन और आम जनता के बीच की कड़ी पत्रकार के कड़े संघर्ष को रेखांकित किया| उन्होंने कहा कि जिसके खिलाफ लिखो अपने दम पर लिखो| कोई तुम्हारी मदद करने न आएगा| और कुछ हो गया तो शासन प्रशासन हमलावर का नाम भी अपनी सुविधानुसार तुम्ही से मांगेगा| न लिख सको तो ये पेशा ही छोड़ दो| मिशन समाज और जनता के हित में होना चाहिए| चलते चलते उन्होंने वर्तमान परिद्रश्य पर कटाक्ष करते हुए कहा- ||शातिरो का करो सम्मान, न जाने कब सरकार में आ जाये|| उन्होंने पत्रकारों की ओर से कहा- या बदचलन हवाओं का रुख मोड़ देंगे, या खुद को वाणी पुत्र कहना छोड़ देंगे हम| अगर न कर सके ये तो- कागज़ को फाड़ देंगे ..कलम को तोड़ देंगे हम।
[bannergarden id=”8″]
कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि के रूप में मंचासीन आई ए एस पवन कुमार जो वर्तमान में फर्रुखाबाद के डीएम भी है ने सच्ची पत्रकारिता पर बल दिया| उन्होंने गलत और असत्य तथ्यों को प्रकाशित करने से बचने की सलाह दी| पवन कुमार ने कहा कि ख़बरों में तथ्यों के साथ मूल्यों का भी समावेश हो तो अच्छे परिणाम सामने आयेंगे। विकास भवन सभागार में बोलते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि वह सदैव इस पक्ष में रहे हैं कि घटना को सच्चाई के साथ सामने रखा जाना चाहिए। पवन कुमार ने व्याख्यान को आगे बढ़ाते हुए कहा कि खबरे चाहे सकारात्मक हो या नकारात्मक वे कभी खबरों से उद्देलित नहीं होते| उन्होंने अच्छे कार्यक्रम के लिए सभी को बधाई दी| इस बात को सराहा कि आज की गोष्ठी में एक सकारात्मक बहस और अच्छे विचारो का आदान प्रदान हुआ|
[bannergarden id=”11″]
कार्यक्रम का संचालन जिला सूचना अधिकारी का प्रभार देख रहे पूरनचन्द्र मिश्र ने किया। अध्यक्ष अरुण कटियार ने धन्यवाद दिया। आज तक के फीरोज खान, उपजा के संरक्षक वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप गोश्वामी, जेएनआई के संपादक तफीम खान, शिव कुमार मिश्र, अरुण सिंह, योगेन्द्र यादव, आनंद भान सहित लगभग आधा सैकड़ा पत्रकारों ने गोष्ठी में भाग लिया|

