फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा के नेतृत्व में टीईटी अनिवार्यता के विरोध में गुरुवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय परिसर में शिक्षकों ने विशाल धरना-प्रदर्शन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अवनीश चौहान ने की, जबकि संचालन जिला मंत्री राजकिशोर शुक्ल एवं राकेश यादव ने संयुक्त रूप से किया।
धरना स्थल पर वक्ताओं ने टीईटी अनिवार्यता को “काला कानून” बताते हुए सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नाराजगी जाहिर की। आंदोलनरत शिक्षकों ने नारेबाजी करते हुए बीएसए कार्यालय से जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला। जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें शिक्षकों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की गई। नगर मजिस्ट्रेट भी धरना स्थल पंहुचे|
धरना-प्रदर्शन में पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अभिनेता मिश्रा, जिला मंत्री वीरेंद्र त्रिवेदी, महिला शिक्षक संघ की जिला अध्यक्ष अलका कौशल, जिला मंत्री सीता यादव सहित अमित मिश्रा, मुन्ना लाल यादव, डॉ. देवेंद्र यादव, राजेश कुमार यादव, श्याम सिंह, जितेंद्र यादव, नीरज सक्सेना, निर्देश गंगवार, अश्विनी चतुर्वेदी, सुशील माथुर, डॉ. उपेंद्र गंगवार, अमित कुमार, इसरार अहमद, शाहिद गौरी खान, शकील अहमद, मुफीद, आमिर, उजैर, अरविन्द यादव, केपी सिंह, राघवेन्द्र, देवेश, अनुराग, राहुल गंगवार, पवन गुप्ता, श्याम जी शुक्ल, मनोज वर्मा, ओम सिंह, गजेंद्र सिंह, अनुराग पांडेय, विजय कनौजिया, विनोद पाठक, राजीव, विपिन सिंह, सत्यभामा राठौर, अर्चना शुक्ला, अनुपम मिश्रा, फारिया, समरा, अर्चना, अंजू, सुनीता, लीना, आरती, प्रीती, ममता सहित हजारों शिक्षक मौजूद रहे।
वहीं, इस प्रदर्शन को लेकर सवाल भी खड़े होने लगे हैं। बताया गया कि परिषदीय विद्यालयों का समय दोपहर तीन बजे तक निर्धारित है, इसके बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षक दोपहर करीब एक बजे ही बीएसए कार्यालय पहुंच गए और धरना-प्रदर्शन में शामिल हो गए। विद्यालय समय के दौरान शिक्षकों की मुख्यालय पर मौजूदगी को लेकर शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह रही कि यह पूरा घटनाक्रम जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की मौजूदगी में चलता रहा, लेकिन विद्यालय समय में शिक्षकों के एकत्र होने को लेकर किसी प्रकार की पूछताछ या कार्रवाई नहीं की गई। इससे प्रशासनिक सख्ती और शैक्षणिक अनुशासन को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन, विद्यालय समय में धरना पर उठे सवाल



