घूमते चाक पर कुम्हार गढ़ रहे उजाले की उम्मीद

फर्रुखाबाद:(नगर संवाददाता) दीपावली नजदीक आने के साथ ही कुम्हारों के चाक की रफ्तार तेज हो गई है। धीरे-धीरे लोगों का रुझान एक बार फिर दीये की तरफ बढ़ा है। सरकार के स्वदेशी अभियान से प्रेरित होकर कुम्हार इस बार उत्साहित नजर आ रहें हैं| दीपावली में दीये, बर्तन व खिलौनों से हुए आमदनी से पूरे वर्ष का खर्चा चलाना पड़ता है। अब मात्र कुछ गिने चुने पर्व पर ही लोगों को हम कुम्हारों की याद आती है। आधुनिकता के दौर में नई पीढ़ी को मिट्टी की अहमियत को समझते हुए अपने स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देना चाहिए। मिट्टी का दीया जलाकर दीपावली मनाने का प्रयास करें।
दरअसल आगामी 18 अक्टूबर को रौशनी का पर्व दीपावली है| जिसको देखते हुए हर घर में तैयारी शुरू हो गयी है| प्रकाश पर्व दीपावली के करीब आते ही कुम्हारों की गलियां एक फिर से जीवंत हो उठीं हैं।मिट्टी की खुशबू के साथ कुम्हार चाक पर हर घर को रौशनी लानें के लिए मेहनत कर रहें हैं| लेकिन महंगाई से कुम्हार समाज को काफी झकझोर दिया है|
दरअसल सुनहरी मस्जिद निवासी कुम्हार सचिन प्रजापति नें भी दीपक बनने के काम में जुटे है| सचिन नें जेएनआई न्यूज को बताया कि विगत वर्ष मिट्टी 500 रूपये ट्राली थी, इस साल मिट्टी 800 रूपये ट्राली मिल रही है, लेकिन इसके बाद भी दीयों के दाम विगत वर्ष की तरह 80 के 100 हैं| लिहाजा मेहनत उतनी मिट्टी मंहगी और दीयों के दाम जस के तस है| लिहाजा इस बार मुनाफा कम होनें की उम्मीद है|
दीपावली की रौनक में कुम्हारों का योगदान
दीपावली के इस पर्व पर कुम्हारों की मेहनत और मिट्टी के दीयों की अहमियत बढ़ गई है। लोग मिट्टी के दीयों की जगह लाइटों का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन कई लोग अभी भी इस परंपरा को कायम रखे हुए हैं। जैसे-जैसे दीपावली नजदीक आ रही है, कुम्हारों की तैयारियों में तेजी आ रही है, और इस बार उम्मीद है कि मिट्टी के दीयों की बिक्री पहले से ज्यादा होगी।