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मक्का की खेती

मक्का

परिचय- रबी मक्का की खेती उत्तर/पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में की जाती है। प्रदेश के अन्य भागो में भी इसकी खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है।
मक्का की किस्मे-
संकर और संकुल मक्का की अनुमोदित प्रजातियो का विवरण निम्न तालिका में दिया गया है।

क्र०सं० किस्म का नाम रंगो और दानो का आकार जीरा निकलने की अवधि (दिन) पकने की अवधि (दिन) उत्पादन क्षमता कु०/हे०
संकर मक्का
गंगा-११ नारंगी अर्द्घचपटा ८५-९० १५०-१६० ७०-८०
डक्कन-१०३ पीला अर्द्घचपटा ८५-९० १५०-१६० ६०-८०
डक्कन-१०५ नारंगी अर्द्घचपटा ८५-९० १५०-१६० ७०-८०
त्रिशूलता नारंगी अर्द्घचपटा ८५-९० १६०-१६० ७०-८०
शक्तिमान-१ सफेद अर्द्घचपटा ८५-९० १५०-१५५ ७०-८०
एक्स – १३८२ (३०५४) पीला अर्द्घचपटा ८५-९० १५५ – १६० ७०-८०
के. एच. ५०८१ पीला अर्द्घचपटा ८५-९० १५५ – १६० ७०-८०
के. एच. ५९९१ पीला अर्द्घचपटा ८५-९० १५५ – १६० ७०-८०
सीडटेक २३२४ पीला अर्द्घचपटा ८५-९० १५५ – १६० ७०-८०
संकुल मक्का
१० धवल सफेद अर्द्घचपटा ७५-८० १४५-१५० ५०-६०
११ शरदमणी पीला नारंगी ८२-८७ १२५-१३० ४५-५०
१२ शक्ति-१ पीला अर्द्घचपटा ७५-८० १३०-१३५ ४०-४५
लावा हेतु
१३ अम्बर पापकार्न नारंगी गोल ७५ – ८० १३५ – १४० ३० – ३५
१४ वी. एल. अम्बर पापकार्न नारंगी गोल ७५ – ८० १३५ – १४० ३० – ३५
१५ पर्ल पापकार्न नारंगी गोल ७५ – ८० १३५ – १४० ३० – ३५
हरी बलि हेतु हरी मक्का (स्वीट कार्न)
१६ माधुरी स्वीट कार्न पीला चपटा ८० – ८५ १२० – १२५ भुट्टा तैयार
१७ प्रिया स्वीट कार्न पीला चपटा ८० – ८५ १२० – १२५ भुट्टा तैयार
बेबीकार्न (शिशु मक्का)
१८ बी.एल. ४२ नारंगी, गोल ७० – ७५ बेबीकार्न की तोड़ाई
१९ प्रकाश नारंगी, गोल ७० – ७५ बेबीकार्न की तोड़ाई
२० एच.एम. 4 नारंगी, गोल ७० – ७५ बेबीकार्न की तोड़ाई
चारे हेतु मक्का
२१ अक्रीकन टाल
२२ जे १००६

नोट :     विशेष उपयोग हेतु मक्का की खेती के समय यह ध्यान रखा जाये कि २०० मीटर के आस पास मक्का कि अन्य प्रजातियाँ न लगाई जाये

फसल लगाने के तरीके-

अन्तः फसल
दालों की कम समय में तैयार होने वाली प्रजातियां मटर, (सब्जी वाली) राजमा, तथा वाकला, टमाटर, गाजर, चुकन्दर, तथा प्याज मक्का के कतारों के बीच बो कर सफलतापूर्वक अन्तः फसल के रूप में ली जा सकती है।

खेत तैयार करने का तरीका-
दोमट मिट्‌टी रबी मक्का के लिये उपयुक्त होती है। सामान्यतः १-२ जुताई मिट्‌टी पलटने वाले हल या डिस्क हैरो से करके मिट्‌टी बना लें यदि नमी की कमी हो तो पलेवा करके खेत की तैयारी कर लें। टै्रक्टर चालित रोटावेटर द्वारा ही जुताई में खेत अच्द्दी तरह हो जाता है।

बुवाई का समय

रबी मक्का की उपयुक्त बुवाई का समय १५ अक्टूबर से १५ नवम्बर तक का है।
बीज दर व बुवाई की विधि

रबी मक्का हेतु २०-२२ किग्रा० बीज प्रति हेक्टेयर का प्रयोग करें जिससे लगभग ८५-९० हजार पौधों प्रति हेक्टेयर प्राप्त हो सकें। बुवाई के पूर्व बीज शोधन अवश्य करे। पंक्ति से पंक्ति की दूरी ६० सेमी० तथा पौधों की दूरी १८-२० सेमी० रखे।

मक्का की फसल में उर्वरको का प्रयोग-

उर्वरक की मात्रा किस्मों के अनुसार निम्नानुसार प्रयोग करना लाभदायक रहता है।

नत्रजन फास्फोरस पोटाश गंधक

संकर मक्का १५० किग्रा./हे. ७५ किग्रा./हे. ६० किग्रा./हे. ४० किग्रा./हे.

संकुल मक्का १२० किग्रा./हे. ६० किग्रा./हे. ४० किग्रा./हे. ३० किग्रा./हे.

फास्फोरस तथा पोटाश की सम्पूर्ण मात्रा नत्रजन की चौथाई मात्रा बुवाई के समय प्रयोग करना चाहियें। शेष नत्रजन का आधा भाग जब पौधे घुटने की ऊंचाई तक हो जायें तथा शेष चौथाई भाग जीरा निकलने के पूर्व टापड्रेसिंग के रूप में प्रयोग करना चाहियें। जिंक की कमी वाले क्षेत्रों में २०-२५ कि.ग्रा० जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर की दर सें अन्तिम जुताई से पहले प्रयोग करे। सावधानी के तौर पर जिंक सल्फेट कों फास्फोरस वाले उर्वरकों के साथ मिलाकर प्रयोग न करें। अच्द्दी उपज तथा भूमि की उर्वरता के बनायें रखने के लिए संकर किस्मों की दशा में ६० कुन्तल तथा संकुल किस्म की बुवाई की दशा में ४० कुन्तल प्रति हे. की दर सड़ी हुई गोबर की खाद का प्रयोग करना चाहियें। ऐसी दस में २० किग्रा. प्रति हे. नाइत्रोज्न का कम प्रयोग किया जाये

मक्का फसल में पानी-

रबी मक्का में ४-५ सिंचाई करनी पड़ती है। प्रथम सिंचाई बुवाई के २५-३० दिन दूसरी ५५-६० दिन तीसरी ७५-८० दिन, चौथी ११०-११५ दिन तथा पांचवी १२०-१२५ दिन बाद करनी चाहियें। अगर आवश्यकता हो तो अतिरिक्त सिंचाई खेत की नमी के अनुसार करना उपयुक्त होगा।

निराई गुडाई और खरपतवार

बुवाई के २०-२५ व ४०-५० दिन बाद निराई-गुंड़ाई करें अथवा एट्राजीन ५० डब्लू०पी० १ – १.५ किग्रा० मात्रा ६०० -८०० लीटर पानी में घोलकर बुवाई के बाद तथा जमाव से पहले द्दिड़काव करें।

मक्के की फसल में बीमारी से बचाव-

पत्तियों का झुलसा रोग

इस रोग में पत्तियों पर बड़े लम्बे अथवा कुद्द अण्डाकार भूरे रंग के धब्बे पड़ जाते है। रोग के उग्र होने पर पत्तियां झुलसकर सूख जाती है।

उपचार

इसकी रोकथाम हेतु जिनेब या जिंक मैगनीज कार्बोमेंट २ किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से द्दिड़काव करना चाहिए ।
गुंलाबी उकठा रोग की पहचान

इस रोग मे दाने पड़ने के बाद पौधे खेत मे कम नमी के कारण सूखे पड़ते है। तने को तिरद्दा काटने पर संवहन नालिकायें गुलाबी रंग की निचली पोरों में दिखाई पड़ती है, तथा सिकुड़ जाती है।

उपचार

इसकी रोकथाम हेतु स्वस्थ्य बीज का प्रयोग तथा आवश्यकतानुसार सिंचाई करनी चाहियें।
काला चूर्ण उकठा रोग की पहचान

कटाई से १०-१५ दिन पहले पौधे खेत मे सूखे दिखाई देते है। तनों को तिरद्दा काटने पर जड़ो के पास संवहन नालिकायें सिकुड़ी हुई तथा कोपल चूर्ण से पोर भरे हुए दिखायी देते है।

विशेष : दाने पकने के समय उचित नमी बनाये रखने हेतु सिचाई की व्यवस्था करनी चाहियें।

मक्के की फसल में कीट नाशको का प्रयोग-

दीमक कीट की पहचान

मुख्यतः श्रमिक दीमक जो लगभग ६० मि०मीटर लम्बे, मटमैले सफेद रंग के मुलायम कीड़े है। पौधों की जड़े को काटकर हानि पहुंचाते है।

उपचार

खेत में आखरी जुताई के समय १.५ प्रतिशत क्लोरपाइरीफास या ४ प्रतिशत इएडोसल्फान की धूल या १.३ प्रतिशत लिन्डेन धूल २५-३० किलोग्राम प्रति हे. की दर से प्रयोग करें।
खड़ी फसल में प्रकोप होने की दशा में लिन्डेन २० ई.सी. ३.७५ लीटर या क्लोरपायरीफास २-३ ली०/हे. की दर से सिंचाई पानी के साथ प्रयोग करें।

बालदार कीट (भुड़ली) की पहचान

इस कीट की गिडारें पत्तियों को बहुत तेजी से खाती है और फसल को काफी हानि पहुंचाती है। इनके शरीर पर रोयें होते है।

उपचार

इसकी रोकथाम हेतु निम्न में से किसी एक रसायन का बुरकाव द्दिड़काव करना चाहियें।

मिथाइल पैराथियान २ प्रतिशत धुलनशील चूर्ण २५ किलोग्राम।
डाइक्लोरवास ६५० मि० लीटर।
क्लोस्पायरीफास २० ई.सी. १.५ लीटर।

माहू कीट की पहचान

इस कीट के शिशु तथा प्रौढ़ पत्तियों की सतह से रस चूसकर हानि पहुंचाते है।

उपचार

इसकी रोकथाम हेतु निम्न मे से किसी एक रसायन का द्दिड़काव करना चाहियें।

मिथाइसल-ओ डिमोटान २५ ई०सी० १.०० लीटर।
थायोमिटान २५ ई०सी० १.०० लीटर।
मोनोक्रोटोफास ३६ ई०सी० ०.५०० लीटर।
क्लोरपायरीफास २० ई०सी० ०.७५० लीटर।

नोट : जहां हरा भुट्‌टा खाने का प्रयोग में लाया जाता है। वहां यह रसायन प्रयोग न किये जायें भुट्‌टों में माहू की रोकथाम के लियें मैलाथियान १.० लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से द्दिड़काव करायें।

पाठक की प्रतिक्रिया (1)

. maize seeding time is over this time is plant protection but good work for states formers……………..

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