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संसद में बंदूको को नहीं काबिलियत की जरुरत पड़ती है- सलमान खुर्शीद संसद में बंदूको को नहीं काबिलियत की जरुरत पड़ती है- सलमान खुर्शीद... फर्रुखाबाद: कांग्रेस प्रत्याशी सलमान खुर्शीद ने अलीगंज क्षेत्र में अपने चुनावी प्रचार के दौरान विरोधियो पर बिना नामलिये जमकर निशाना साधा| उन्होंने कहा कि संसद चलाने में काबिलियत की जरुरत पड़ती है| बंदूको से संसद नहीं चलती| सलमान ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उन्हें अपने...

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9455120575 पर फर्रुखाबाद में चुनाव संबंधित शिकायत या जानकारी प्रेक्षक को दे 9455120575 पर फर्रुखाबाद में चुनाव संबंधित शिकायत या जानकारी प्रेक्षक... फर्रुखाबाद: सामने प्रेक्षक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र फर्रुखाबाद एपीएम मोहम्मद हनीश ने लोकसभा चुनाव पर नजर रखना शुरू कर दिया है| कोई भी आमजन या नेता प्रेक्षक से सम्पर्क कर अपनी बात कह सकता है| चुनाव आयोग के प्रतिनिधि के तौर पर नियुक्त प्रेक्षक पूरे चुनाव में निगरानी करते...

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खो गया भ्रष्टाचार का मुद्दा- एक बार फिर से नेता जीतेगा और जनता फिर से हारेगी.....खो गया भ्रष्टाचार का मुद्दा- एक बार फिर से नेता जीतेगा और जनता... फर्रुखाबाद: नगर से सटे गाव गुतासी में देश का विदेश मंत्री एक छोटी सी जनसभा को सम्बोधित कर रहा है| जनसभा क्या गाव की चौपाल कहिये| आसपास समर्थको से घिरा है| सामने समर्थक बैठे है| यानि आगे भी समर्थक और पीछे भी समर्थक| सवाल पूछने का हक़ केवल पत्रकारो को| पत्रकार भी अमित शाह और मोदी...

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भाजपा प्रत्याशी मुकेश का हलफनामा- जिला पंचायत अध्यक्षी के दौरान सम्पत्ति में जोरदार इजाफा भाजपा प्रत्याशी मुकेश का हलफनामा- जिला पंचायत अध्यक्षी के... फर्रुखाबाद: भारत में नेतागिरी आय का एक सशक्त माध्यम है इस बात का अध्ययन प्रत्याशियो द्वारा दाखिल किये जा रहे हलफनामो को देख कर किया जा सकता है| संवैधानिक पदो पर बैठने के दौरान नेताओ की सम्पत्ति जादुई चिराग की तरह बढ़ने लगती है| अधिकांशतः ये अचानक बढ़ी हुई सम्पत्ति पदो का दुरूपयोग...

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सलमान खुर्शीद का हलफनामा: अपराधिक रिकॉर्ड और हथियारो के मामले में सबसे फिस्सडी सलमान खुर्शीद का हलफनामा: अपराधिक रिकॉर्ड और हथियारो के मामले... फर्रुखाबाद: कांग्रेस प्रत्याशी सलमान खुर्शीद फर्रुखाबाद से दो बार सांसद रहे है| 15 वी लोकसभा के लिए उन्होंने ताल ठोक दी है| यूपीए की भारत सरकार में सलमान विदेश मंत्री है| विदेशो तक नाम कमाया मगर कई मामलो में वे सामने अखाड़े में खड़े कई प्रत्याशियो से काफी फिस्सडी है| चुनाव आयोग...

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ये यूपी का स्टाइल है- कौन जाति के हो.........?ये यूपी का स्टाइल है- कौन जाति के हो.........? नामांकन कक्ष के बाहर एक मित्र अधिकारी ने बड़े जोश खरोश ने बताया कि नई आई एसपी साहब उनकी बिरादरी की है| "चौधरी" है| मैं अवाक रह गया| चलो ज्ञान बढ़ा| पूछ दिया कैसे? तो पूरी रिश्तेदारी बता डाली| मगर मुझे ये बताने का मतलब क्या था बहुत देर बाद समझ में आया| हालाँकि उस वक़्त ऐसा कोई प्रसंग...

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फलैश बैक- 29 साल पहले का चुनाव- डीएम नसीम जैदी, नेता छोटे सिंह और वो लाठी चार्जफलैश बैक- 29 साल पहले का चुनाव- डीएम नसीम जैदी, नेता छोटे सिंह... फर्रुखाबाद: नई बाते पुरानी यादो को कुरेद लाती है| बात मौके पर बताई जाए तो महत्वपूर्ण और ज्ञान वर्धक भी होती है| नई युवा पीड़ी के लिए चुनावी इतिहास का जानना भी जरुरी है| सतीश दीक्षित ने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के नामांकन के बाद पत्रकारो से कहा कि चुनाव आयुक्त नसीम जैदी...

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सपा प्रत्याशी रामेश्वर का हलफनामा- 13 करोड़ की सम्पत्ति, 13 मुकदमे और 6 लाइसेंसी हथियार सपा प्रत्याशी रामेश्वर का हलफनामा- 13 करोड़ की सम्पत्ति, 13 मुकदमे... फर्रुखाबाद: सपा प्रत्याशी रामेश्वर सिंह यादव ने चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में 13 करोड़ की चल अचल सम्पत्ति और 13 मुकदमो का जिक्र किया है| रिटर्निंग ऑफिसर फर्रुखाबाद के समक्ष पेश किये हलफनामे के अनुसार रामेश्वर के पास वाहनो के नाम पर केवल तीन ट्रैक्टर है| जबकि रामेश्वर दम्पति...

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दो महीने में 72 हजार शिक्षकों की होगी भर्ती

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Posted on : 11-04-2014 | By : JNI DESK | In : FARRUKHABAD NEWS, UPTET

Teacherडेस्क: अखिलेश सरकार ने चुनावी माहौल में प्राथमिक स्कूलों में 72,825 शिक्षकों को टीईटी मेरिट पर भर्ती करने का फैसला कर वोटरों को लुभाने की कोशिश की है। इसके लिए सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुक्रवार को उच्च स्तर पर यह निर्णय लिया गया।

सरकार ने चुनाव आयोग को भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दे दी है। मामले में सचिव बेसिक शिक्षा नीतीश्वर कुमार ने विभागीय आदेश जारी कर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में जमा आवेदनों के बारे में पूरी जानकारी मांगी है।


आवेदकों पर जल्द ही फैसला
सचिव बेसिक शिक्षा के मुताबिक नवंबर 2011 में आवेदन करने वाले टीईटी पास बीएड वाले ही इस भर्ती के लिए पात्र होंगे। डायट प्राचार्यों से 30 नवंबर 2011 को जारी विज्ञापन के आधार पर आवेदन करने वालों के बारे में पूरी जानकारी मांगी गई है। उस साल टीईटी आयोजित कराने वाली संस्था माध्यमिक शिक्षा परिषद से रिजल्ट संबंधी सभी जानकारियां मांगी गई हैं। डायट और माध्यमिक शिक्षा परिषद से जानकारियां मिलने के बाद सभी ब्यौरों को विभागीय वेबसाइट पर ऑनलाइन किया जाएगा।

25 जून तक पूरी होगी भर्ती प्रक्रिया
आवेदकों को संशोधन करने के लिए मौका भी दिया जाएगा। इस संबंध में विस्तृत आदेश डायट से ब्यौरा मिलने के बाद जारी किया जाएगा। जिन्होंने आवेदन वापस लिए थे उनके बारे में जल्द ही फैसला लिया जाएगा कि उनसे पुन: आवेदन लिया जाए या नहीं।

भर्ती 25 जून 2014 तक पूरी कर ली जाएगी। गौरतलब है कि उस समय 63 लाख आवेदन आए थे इनमें से 55 लाख को कम्प्यूटर में फीड किया जा चुका था। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने टीईटी पास बीएड वालों को शिक्षक बनाने के लिए विशेष परिस्थितियों में राज्य सरकार को 31 मार्च 2014 तक का ही समय दिया था।

सरकार चाहती है समय सीमा बढ़ाना
राज्य सरकार एनसीटीई से समय सीमा बढ़ाने जाने का अनुरोध करने के लिए पत्र भेजने जा रही है। बेसिक शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रक्रिया शुरू करने संबंधी जानकारी चुनाव आयोग को दे दी है। सचिव बेसिक शिक्षा नीतीश्वर कुमार ने बताया कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट का मामला है इसलिए चुनाव आयोग को इस पर किसी तरह की आपत्ति नहीं होगी और भर्ती प्रक्रिया में बाधा नहीं आएगी।

परिषद् विद्यालयों की शिक्षक भर्ती में चकरघिन्नी बनी अखिलेश सरकार

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Posted on : 05-04-2014 | By : JNI DESK | In : EDUCATION NEWS, FARRUKHABAD NEWS, UPTET

Teacherलखनऊ: परिषदीय स्कूलों में 72825 शिक्षकों की भर्ती तीन महीने में पूरा करने के सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश पर अमल के बारे में सरकार अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पायी है। इस मामले में सरकार सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दाखिल करेगी या शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगी, यह फैसला मुख्यमंत्री को करना है।

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में शिक्षकों की भर्ती हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की मेरिट के आधार पर करने को कहा है। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ ही सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश पर बेसिक शिक्षा विभाग ने न्याय विभाग से सलाह मशविरा किया था। बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के मुताबिक टीईटी की मेरिट के आधार पर भर्ती करती है तो उसकी विशेष अपील अपने आप निष्फल साबित हो जाएगी। दूसरा पेंच यह है कि सरकार शैक्षिक गुणांक के आधार पर लगभग दस हजार शिक्षकों की भर्ती कर चुकी है। इसके अलावा उर्दू शिक्षकों के लगभग तीन हजार पदों पर भी शैक्षिक गुणांक के आधार पर मोअल्लिम-ए-उर्दू उपाधिधारकों की भर्ती की गई है।


शैक्षिक गुणांक के आधार पर ही जूनियर हाईस्कूलों में गणित और विज्ञान के 29334 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया भी अटकी हुई है। हाई कोर्ट ने शैक्षिक गुणांक के आधार पर शिक्षकों की भर्ती करने से संबंधित अध्यापक सेवा नियमावली की धारा 14(3) को निरस्त कर दिया है। अब यदि सरकार टीईटी की मेरिट के आधार पर शिक्षकों की भर्ती करती है तो उसे नियमावली में संशोधन करना होगा। सरकार के लिए सबसे बड़ा पेंच तो यह है कि यदि वह टीईटी की मेरिट पर शिक्षकों की भर्ती करती है तो शैक्षिक गुणांक के आधार पर की गई भर्तियों का क्या होगा। हालांकि एहतियाती तौर पर सचिव बेसिक शिक्षा परिषद संजय सिन्हा ने निदेशक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद से 2011 में शिक्षक भर्ती के लिए जारी हुए विज्ञापन के क्रम में हुए आवेदनों से संबंधित ब्योरा मांगा है।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में वेतन बढ़े मगर पार्ट टाइम शिक्षको का वेतन घटा

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Posted on : 04-04-2014 | By : JNI DESK | In : EDUCATION NEWS, FARRUKHABAD NEWS, UPTET

SALARYडेस्क: केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने अपने आदेश दिनॉंक 24 मार्च 2014 के द्वारा कस्‍तूरबा गॉधी स्कूल के सभी मदों के बजट में भारी बढ़ोतरी की है। इन विद्यालयों में कार्यरत वार्डेन को 11,000 से 25,000 रुपये, फुल टाइम टीचर 9200 से 20000, लेखाकार 6000 से 10000, मुख्य रसोइया 4600 से 6000, सहायक रसोइया 3200 से 4500, चपरासी 3200 से 5500 तथा चौकीदार को 3200 से 5500 रुपये दिए जाने का निर्णय किया गया है। वहीं पार्ट टाइम शिक्षकों का मानदेय 7200 से घटाकर 5,000 रुपये करने का निर्णय किया गया है, जो पार्ट टाइम शिक्षकों के गले नहीं उतर रहा है। उक्‍त आदेश के प्राप्‍त होने पर ही पार्ट टाइम शिक्षकों में रोष प्रकट किया जा रहा है, सभी शिक्षकों का कहना है कि जहॉ एक ओर बढ़ती महंगाई से आम लोगों की कमर टूट रही है, वहीं मानदेय घटा कर देना अविश्‍वसनीय लग रहा है। शिक्षकों का कहना है कि इससे हमारा मनोबल गिरा है, हमारा मानदेय एक चपरासी से कम कर दिया गया है। जबकि उनके द्वारा विद्यालय में लगभग 06 घण्‍टे देना पड़ता है। आवश्‍यकता पड़ने पर इससे भी ज्‍यादा समय भी विद्यालय की सेवा करनी पड़ती है, मानदेय घटोत्‍तरी से पार्ट टाइम शिक्षकों ने विधिक राय लेना भी शुरू कर लिया है, उनका मानना है कि मानदेय घटाना विधिसंगत नही है, ऐसा तभी सम्‍भव होता है कि जब देश की आर्थिक हालात बिगड़ जाये, ऐसे में उनका कहना है कि इस सम्‍बन्‍ध में यदि उन्हें न्‍यायालय की शरण भी लेना पड़े, जो इससे वह पीछे नहीं हटेगें।


कस्‍तूरबा गॉधी बालिका विद्यालयों के पार्ट टाइम शिक्षकों का मानदेय रू0 7200 से रू0 5000 करने पर सभी हैरान।
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में पढ़ना-खाना और बेहतर।
केंद्र सरकार ने सभी मदों में बढ़ाया पैसा
गौरलतब है कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के लिए खर्च सालों पहले निर्धारित किया गया था। बजट कम होने और महंगाई अधिक होने के चलते छात्राओं को बेहतर सुविधाएं विद्यालय और छात्रावास में नहीं मिल पा रही थी। केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय में होने वाली प्रोजेक्ट एप्रूवल बोर्ड (पीएबी) की बैठकों में जाने वाले अधिकारी बजट के मामले को जोरदार ढंग से उठाते थे। इसके आधार पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बजट में बढ़ोतरी की है। इस संबंध में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अनु सचिव मनजीत कुमार ने राज्यों को नया दिशा-निर्देश भेज दिया है।

मुलायम की शिक्षामित्रों को धमकी, कहा- ‘साइकिल पर ही बटन दबाना वरना नौकरी खतरे में पड़ सकती है’

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Posted on : 04-04-2014 | By : JNI DESK | In : Election 2014, FARRUKHABAD NEWS, UPTET

Mulayam Singhबुलंदशहर: वोट के लिए नेता क्या-क्या नहीं कर रहे हैं लेकिन समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख मुलायम सिंह यादव तो अब बाकायदा धमकी देने पर उतर आए हैं| भरी सभा में मंच से यूपी के शिक्षामित्रों को दो टूक कह दिया कि साइकिल पर ही बटन दबाना वरना नौकरी खतरे में पड़ सकती है|

लगता है उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की साइकिल 2014 लोकसभा चुनावी सफर में पूरी रफ्तार के साथ दौड़ती हुई नहीं दिखाई दे रही है| राह में कई बड़े-बड़े रोड़े हैं जिनमे सबसे बड़ी बाधा नरेंद्र मोदी के रूप में सामने खड़ी है. तमाम चुनावी सर्वे यही दावा कर रहे हैं| ऐसे में अब नेताजी करे तो क्या करें| नतीजतन समाजवादी पार्टी की साइकिल को सरपट दौड़ाने के लिए यानी वोट हासिल करने के लिए मुलायम अब सख्त लहजे में धमकी तक देने से बाज नहीं आ रहे हैं. निशाना बने यूपी के शिक्षामित्र|

मुलायम यूपी के बुलंदशहर में अपनी चुनावी रैली को संबोधित करने पहुंचे थे| इसी दौरान खुले आम मंच से शिक्षामित्रों को धमकाते हुए कहा कि वोट समाजवादी पार्टी को ही करना वरना नौकरी का नियमन वापस भी लिया जा सकता है|

मुलायम यही नहीं रुके. वोटरों को लुभाने के लिये उन्होंने आचार संहिता को भी ताक पर रखते हुए मंच से कई घोषणाएं कर डाली. साथ ही कुछ जातियों का जाति प्रमाणपत्र ना बनाने वाले अधिकारीयों पर कार्रवाई का डंडा चलाने तक को कह दिया|

मुलायम के सख्त और लुभावने तेवर बेशक वोटों के जुगाड़ की एक कवायद हो सकती है लेकिन सवाल है कि आचार सांहिता लागू होने के बाद ये कितना जायज है|

देखिये फर्रुखाबाद में विकास- एक ईंट पर टिका सरकारी स्कूल, वो भी बंद

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Posted on : 28-03-2014 | By : JNI DESK | In : Corruption, Election 2014, FARRUKHABAD NEWS, UPTET

फर्रुखाबाद: फर्रुखाबाद नगर में पांच प्रकार के नेता वोट मांगने आते है| पांचो एक नंबर के लफ्फाज और झूठे है अगर वे कहते है कि वे विकास कराते है, विकास ही उनका अजेंडा है, विकास ही उनका मूलमंत्र है| अगर वे कहते है कि वे जाति और धर्म के आधार पर वोट मांगते हैं तो उन पर विश्वास किया जा सकता है क्योंकि फिर विकास की कोई बात नहीं होगी| लेकिन संयोग देखिये वे सार्वजानिक रूप से यह कह नहीं सकते कि वे धर्म के नाम पर वोट मांगते है| और विकास होता क्या है ये वे न जानते है और न मानते है| जनपद में सांसद से विधान सभा और विधान परिषदों के सदस्यो की निधियों को 40 फ़ीसदी पर खरीदा गया| हालाँकि सलमान खुर्शीद इस मामले में फिस्सडी निकले| बाकी नेता शिक्षा के क्षेत्र में बहुत अग्रणी रहे है| उन्होंने दिल खोल कर अपनी पांच साल में मिलने वाली निधियों का एक बड़ा भाग स्कूलो को दिया है| मगर अफ़सोस है कि पांचो प्रकार के नेताओ ने उन गरीब बच्चो के लिए बने सरकारी स्कूल को सुधारने के लिए कोई काम नहीं किया जिनके माँ बाप को बेबकूफ बनाकर वे हर बार उनका वोट ठगते रहे| थोडा बुरा लग सकता है मगर सच तो यही है|

PS GOPALPURन तो स्कूल में मास्टर गया पढ़ाने और न ही किसी नेता ने इस पर सवाल उठाया| उठाते भी क्यों शायद इन नेताओ की इच्छा है कि गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चे न ही पढ़े तो अच्छा वर्ना अंधभक्ति में नारे लगाने वाले कहाँ से मिलेंगे? अभी अभी एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने सरकार के खजाने में उलटे अपने पास से 67074 रुपये जमा करके नौकरी से इस्तीफ़ा दिया है| कह रहा था अब जलालत सही नहीं जातीं| अब लोग टोकने लगे है| यानि जब तक नहीं टोका….आत्मा ने सरकारी धन लूटने की खूब इजाजत दी| स्कूल तो वे पूरी नौकरी कभी पढ़ाने गए नहीं| महीने में एक आध बार हाजिरी भरने जब जाते बच्चो केलिए टाफियां ले जाते थे| मास्टरी से इस्तीफ़ा देने वाली उनकी फ़ोटो अख़बार में छपी थी| रिपोर्टर ने जब बच्चो को अख़बार में छपी वो तस्वीर दिखाई जिसमे मास्टरजी डीएम दफ्तर के बाहर इस्तीफ़ा देने के लिए साथियो सहित धरने पर बैठे थे, तो उनकी तैनाती वाले स्कूल के बच्चे पहचान नहीं पाये कि इनमे से कोई मास्टर कभी उन्हें पढ़ाने आया हो| तपाक से इस्तीफ़ा देने वाले शिक्षक के गोरखधंधे में शेयरहोल्डर हेडमास्टर ने बच्चो को बताया कि वही है जो नीली कार से आते थे| बच्चे बोले- “वही जो टाफी लाते थे”|

PS GOPALPUR1गुरूजी का अब ह्रदय परिवर्तन हो गया है| उन्हें अब देश सेवा का शौक चढ़ गया है| पहले जलालत की गुंजाईश वाली नौकरी से छुटकारा पाया| अब पहचान बनाएंगे| लोकसभा से चर्चा में आयेंगे फिर विधानसभा में कायदे से किस्मत आजमाएंगे| ये उनका मास्टर प्लान है जो उन्होंने जेएनआई से शेयर किया है| पूरे नौकरी के काल में बसपा, सपा और नगर के निर्दलीय विधायक के इर्द गिर्द रहकर नेतागिरी सीखी है| दर्जनों बड़े नेताओ के साथ फोटो खिचाई| अब यही आदर्श हो गए है| क्या खूब क्वालिटी तय की आदर्शवादिता की? अब किसी के पिछलग्गू बनकर नहीं रहेंगे| बेसिक शिक्षा में नौकरी करने वाला हर सेवक जनता है कि ये नौकरी अफसर की जगह नेता के फेरे लगाने में अच्छी तरह से चलती है| जिन्हे एबीसीडी नहीं आती वे नेता जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश देते है कि फलां मास्टर को फलां जगह तैनात कर दो|

जनसेवको की कैटागिरी जिले सांसद से शुरू होती है और नगर के सभासदो तक गिनी जाती है| इस कड़ी में सांसद के बाद, विधान सभा सदस्य, विधान परिषद् सदस्य, नगरपालिका अध्यक्ष और अंतिम कड़ी सभासद यानि की पार्षद होती है| सब एक नंबर के …..| कोई निधि बेच रहा है तो कोई विकास के धन में कमीशन खा रहा है| कुछ सभासदो ने तो इतनी गिरा दी है कि उनसे अच्छे तो गंगातट के भिखारी है| सरकारी स्कूलो में मिड डे मील के लिए आने वाला राशन तक स्कूल से मांग कर घर ले जाते है| बच्चो की ड्रेस वितरण में कमीशन खाते है| और इससे भी गिरा हुआ ….शौचालय में भी….(मुफ्त शौचालय स्वीकृत कराने में भी दलाली की थी)| हाल ही में इस्तीफ़ा मास्टरी से देकर जनसेवक बनने वाले महाशय भी इस श्रेणी से अलग हो पाएंगे नहीं लगता है| क्योंकि वर्षो बिना बच्चो को पढ़ाये जनता का धन खाते रहे है|
PS BANGASHPURA
गाव से लौटकर बात नगर की| मुस्लिम बाहुल्य इलाको में दो नेताजी इस समुदाय को अपना वोट बैंक समझते है| एक विधानसभा के लिए और दूसरा सांसदी के लिए| दोनों नेता एक एक वोट की कीमत समझते है| उन्हें उस एक ईंट की कीमत भी समझनी पड़ेगी जिस पर लगभग 100 बच्चो का भविष्य टिका है| इस स्कूल के भवन का एक बड़ा भाग एक खम्भे पर खड़ा है और वो खम्भा एक ईंट पर टिका है| जिस दिन वो ईंट निकल गयी और बच्चे नीचे हुए तो फिर तमाम नेता मातमपुर्सी के लिए इक्ट्ठे होते नजर आयेंगे| मगर उससे पहले किसी को इसे दुरुस्त कराने का मन नहीं करेगा| बच्चा तो गरीब का मरेगा, जो वोटर भी नहीं होगा| बड़ा बंगशपुरा मोहल्ले में प्राथमिक स्कूल| वोट बैंक की खातिर जनप्रतिनिधि कोई बैर नहीं लेंगे क्योंकि मामला समुदाय विशेष के वोट बैंक से जुड़े मास्टर साहब का है| मास्टर साहब ने गुरूवार को स्कूल नहीं खोला| मोहल्ले के लोग बताते है कि जब कभी स्कूल खुलता है 30 से 40 बच्चे पढ़ने आते है और मास्टर जी मिड डे मील के रिकॉर्ड में रिकॉर्ड तोड़ बच्चे दर्शाते है| चुनाव आ गया है| गुरु जी चुनाव प्रचार और सरकारी ड्यूटी में व्यस्त हो जायेंगे और बच्चे झंडा बैनर, बिल्ला इक्कठा करने और नारे लगाने में| बच्चे दोनों का मतलब नहीं जानते| जनप्रतिनिधिओ के नाम लिखने की जरुरत नहीं स्थानीय लोग सब जानते है| और जनपद के बाहर के पाठको के समक्ष इन नेताओ की इज्जत बेज्जती करना नहीं चाहता| अलबत्ता एक बात साफ़ है कि वक़्त धीरे धीरे बदल रहा है| यह बात नेताजी को समझ लेनी चाहिए| आने वाले वक़्त में हरामखोरी करने वाले नेता सत्ता में नहीं पहुच पाएंगे| वोटर पहले पिछले रिकॉर्ड को देखेगा| और अब “उल्लू बनवाइंग” नहीं चल पायेगा| इंटरनेट का जमाना है और ये खबर अलग विधानसभा चुनाव और उससे अगले लोकसभा चुनाव में ऐसे ही जिन्दा रहेगी| विकास, नियम और निति नेता बनाते है और सरकारी कर्मचारी सिर्फ उसका पालन कराता है ये बात अब जनता को समझ में आने लगी है| तभी तो लोग कहते है कि सलमान चाहते तो दो चार फैक्ट्री ……|