FARRUKHABAD : प्रशासन की लापरवाही से हर वर्ष न जाने कितना अनाज बर्बाद हो जाता है। आदमी को तो छोडि़ये जानवरों तक को खाने लायक यह गेहूं नहीं बचता। लेकिन कागजी घोड़े बराबर सकारात्मक जानकारी शासन को मुहैया समय समय पर कराते रहते हैं। जिससे कोई ठोस कदम शासन की तरफ से नहीं उठता। प्रति वर्ष अनाज के रख रखाव के नकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। बीते कुछ दिनों से हो रही बारिश में वही हुआ जो विगत वर्षों हुआ था। बारिश की फुहारों से कई बोरे अनाज भीग गया। आनन फानन में पालीथिन इत्यादि डालकर अनाज को ढका जा सका।
प्रशासन द्वारा सरकारी गेहूं की खरीद करके उनका भण्डारण सातनपुर नवीन मण्डी में टीन शेड़ों के नीचे किया गया। जिसमें हजारों की संख्या में बोरे भरे थे। सुरक्षा में कुछ होमगार्ड भी लगाये गये थे। वह भी समय पर नहीं पहुंचे। परिणामस्वरूप या तो बोरों को आवारा पशुओं ने फाड़ दिया या कुछ को बंदरों ने नोच नोच कर चारो तरफ फर्श पर फैला दिया। बरसात आने से पूर्व प्रशासन ने अनाज भण्डारण को सुरक्षित रखने के लिए कोई उचित व्यवस्था तक नहीं की। जिससे बरसात शुरू होते ही गेहूं का भीगना लाजमी था।
रविवार व सोमवार को हुई लगातार बारिश में मण्डी के टीनशेड में रखा सैकड़ों बोरे गेेहूं भीग गया। बमुस्किल मौके पर मौजूद होमगार्ड व अन्य कर्मचारियों ने इधर उधर से पालीथिन की व्यवस्था करके गेहूं को ढका। लेकिन फिर भी जगह जगह टूटे टीन शेड व हवा के साथ हो रही बारिश में कई जगह बोरों को भिगो दिया। जिससे गेहूं सड़ना तय माना जा रहा है।
फर्रुखाबाद: नीति और सिद्धांत केवल जनता के लिए है| नेता और प्रशासन दोनों के लिए नीति, नियम और सिद्धांतो का उल्लंघन क्षम्य है| वर्तमान व्यवस्था के हालात तो यही कहते है| राशन कार्ड के नवीनीकरण के लिए चल रहे सर्वे में घालमेल को लेकर दर्जनों शिकायते जिलाधिकारी से लेकर मंत्री के आगे पहुच चुकी है मगर मजाल है कि गोलमाल में कुछ परिवर्तन हो जाए| अबकी बार सभासदों ने जिला पूर्ति अधिकारी से राशन कार्ड सर्वे में लगे कर्मचारियो की ड्यूटी का चार्ट माँगा है| इसके लिए भी कैबिनेट मंत्री सतीश दीक्षित का अनुमोदन कराया है| कमाल है व्यवस्था? जिस सूची को सार्वजानिक कर फर्रुखाबाद की सरकारी वेबसाइट पर जनता की सुविधा के लिए डाल देना चाहिए था उसके लिए सभासद और सपा सरकार के कैबिनेट स्तर के मंत्री एक अदने से जनता के लिए नियुक्त सरकारी मुलाजिम से गुहार कर रहे है| हल्ला बोल पार्टी ने अब गाँधीवादी रुख अख्तियार कर लिया है| वर्ना ऐसा न था कि…|
दरअसल में व्यवस्था अधिकारिओ और नेताओ की “सुविधानुसार” चलती है जनता की सुविधानुसार नहीं| कैबिनेट स्तर का दर्जा प्राप्त मंत्री सतीश दीक्षित सभासदों के पत्र पर अनुमोदन करते हुए लिखते है कि “ज्ञापन में वर्णित तथ्यों का संज्ञान लेते हुए एतद सम्बन्धी शासनादेशो का नियमानुसार यथोचित अनुपालन सुनिश्चित कराये”| ये संबोधन वो जिलाधिकारी के लिए लिखते है| जिसके कई दिन बाद भी कोई काम नहीं हुआ| शुक्र है कि उन्होंने अपने अनुमोदन में “सुविधानुसार” नहीं लिखा| कोटेदारो द्वारा सभासदों पर दलाली का आरोप लगाने के बाद सभासदों में भी गर्मी आती दिख रही है| इस बार 16 सभासदों के हस्ताक्षर वाला पत्र जिलाधिकारी को लिखा गया है कि राशन कार्ड सर्वे के काम से कोटेदारो का हस्तक्षेप समाप्त कर घर घर सर्वे कराये| अब बात कोटेदारो और सभासदों के मूछ की है? राशन कार्ड के सर्वे में कोटेदारो का हस्तक्षेप ख़त्म हो या न हो दोनों में से एक तो हारना ही है| सभासद अपनी बात पर कायम रह अपनी मांग पूरी करवाने में सक्षम हुए तो जनता में उनकी साख बढ़ेगी और अगले चुनाव में फायदा होगा| और अगर कामयाब नहीं रहे तो अगले चुनाव में विरोधी उसे भुनाएंगे और कहेंगे- मैं अगर सभासद होता तो घर घर जाकर ही फार्म बटते|
तो जनाब खबर ये है कि भ्रष्टाचार की गंगा में गोते लगाते जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय के बाबू अफसर और कोटेदार ये बर्दास्त करने को तैयार नहीं कि उनके कार्य में कोई दखल दे| उस पर बेशर्मी की हद या उपरी पहुच का शिकंजा इस कदर हावी है कि लिख लिख कर जिलाधिकारी से लेकर मंत्री तक हार रहे है कि सर्वे घर घर जाकर नियमानुसार कर दो मगर सुधार नहीं हुआ तो नहीं हुआ|
पानी है कि बैंगन पर रुकता ही नहीं| आज के युग में भ्रष्टाचार और घूसखोरी का मुलम्मा इस कदर चढ़ चुका है कि सौ सौ जूते मार लो, सौ पचास गलियां दे लो मगर इंडिया लूट लेने दो|
मंत्री नरेन्द्र सिंह यादव भी सौ पचास बार अपने पुत्र सचिन यादव के लिए चुनाव प्रचार की जनसभाओ में खूब तालियाँ इस बात पर पिटवाते है कि लेखपाल और जिला पूर्ति कोटेदार दोनों भ्रष्ट है मगर एक भी सकारात्मक कदम भ्रष्टाचार रोकने के लिए नहीं उठाया| जनता को दोनों मंत्री बेबकूफ बना रहे है या समझ रहे है इस बात का फैसला जनता करे| लाल बत्ती जिस में जनता की कमाई का पेट्रोल पड़ता है उससे निजी कार्य तो खूब निपटा रहे है ऐसा जनता कहती है| मगर जनता के काम के लिए केवल पत्र पर अनुमोदन के अलावा कोई कड़क कार्यवाही करने की जहमत नहीं उठाते| जिसे अफसर अपनी सुविधानुसार आगे के अफसर को अग्रसारित कर देते है| पत्र पढ़कर नियम देखकर आदेश करने की जहमत कौन उठाये|
अफसर दोनों मंत्री को सलाम बजा देते है| मीठी बात करते है| और उनके निजी काम समय पर हो जाते है| बस इतना ही चाहिए| ये जनता के प्रतिनिधि कम सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर काम कर रहे है| कमान जनता को सम्भालनी होगी| और जनता के पहले प्रतिनिधि सभासद होते है| शुरुआत हो चुकी है, देखना है कि इन सभासदों की भुजाओं में कितना दम है| या ये भी सुधर कराने की जगह केवल मीडिया में फोटो छपने और खबर में अपना नाम पढ़ने तक में संतुष्ट हो जायेंगे| इस बार ज्ञापन देने वालो में रामजी बाजपेयी, मो असलम, रजिया, महेंद्र कुमार, अलोक कुमार, धर्मेन्द्र कनोजिया, विश्वनाथ, उदयभान, फरीदा ताहिर, आदेश गुप्ता, मनोज कुशवाहा, रविश द्विवेदी, अकबरी, सुनीता यादव और रमला राठौर है|
फर्रुखाबाद: कहते है कि एकता में बल है| और जब यही एकता कोटेदारो की हो तो इसे कहते है बाहुबल| तो नए राशन कार्ड बनाने के लिए चल रहे अभियान की गडबडी को लेकर सभासदों से लेकर कई सामाजिक संगठनो की लिखित शिकायतों के बाद नगर के कोटेदार भी पलटवार के लिए तैयार कर दिए गए| पचास से अधिक कोटेदारो ने हस्ताक्षरित ज्ञापन के माध्यम से खुद को इमानदार और सभासदों पर दलाली करने का आरोप जड़ा है| सभासदों ने खुद पर मनघडंत आरोपों की जानकारी के बाद कोटेदारो पर मानहानि का मुकदमा दायर करने का फैसला लिया है| वैसे आरोप तो जिला आपूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर लगे थे मगर बचाव में कोटेदारो के खड़े होने के बाद इस चर्चा को बल मिला है कि मिलीभगत कोटेदारो और जिला आपूर्ति विभाग में कहीं न कहीं तो है ही|

जिलाधिकारी पवन कुमार को सम्बोधित ज्ञापन में कोटेदार लिखते है कि फर्रुखाबाद नगर के 37 में से 10 सभासद उन्हें परेशान करने के इरादे से शिकायती पत्र प्रशासन को देते रहते है| नए राशन कार्ड जारी करने के लिए चल रहे सर्वे कार्य में प्रशासन शिक्षको और नगरपालिका कर्मियों की ड्यूटी लगायी हुई है| कोटेदारो के मुताबिक कुछ सभासद शिक्षको पर दबाब बनाकर अनाधिकृत राशन कार्ड बनबाना चाहते है| अध्यापको द्वारा जब इस कार्य को करने से मन कर दिया गया तो शिकायत करने लगे| कोटेदार अपने ज्ञापन में यह भी लिखते है कि तथाकथित (तथाकथित का तात्पर्य शिकायत कर्ता असली सभासद नहीं है) सभासद लोग महोदय जी (जिलाधिकारी को) को झूठा प्रार्थना पत्र देते रहते है| जिससे अध्यापक व् राशन कार्ड विक्रेता मानसिक रूप से परेशान है| इन सभासद द्वारा बी पी एल कार्ड बनबाने के लिए दबाब बनाया जाता है| इन सभासद द्वारा जनता से 200 से 1000 रुपये जनता से लिए गए है|
कोटेदार लिखते है कि राशन कार्ड का सर्वे डोर टू डोर अध्यापक कर रहे है| राशन विक्रेताओ द्वारा किसी प्रकार से राशन कार्ड भरवाने का काम नहीं किया जा रहा है| नगरपालिका के कर्मचारियो पर भी दबाब अनाधिकृत राशन कार्ड बनाने के लिए सभासद डाल रहे है| कोटेदारो का डीएम से कहना है कि सभासदों के प्रार्थना पत्रों को स्वीकार न किया जाए| महान कृपा होगी|
दूसरी तरफ राशन कार्ड के सर्वे की शिकायत करने वाले एक सभासद रामजी बाजपेयी ने जे एन आई को बताया कि इस बात का फैसला तो जनता करेगी कि कौन इमानदार है| दूसरा सभासदों ने यह कभी नहीं कहा कि उन्हें फार्म दिए जाए| उनकी तो मांग सिर्फ इंतनी है कि शासनादेशो के मुताबिक डोर तो डोर फार्म वितरित कर सभी के नियमानुसार कार्ड बनाये जाए| रही बात आरोपों की तो या तो कोटेदार सिद्ध करे कि सभासदों ने जनता से पैसे वसूले है वर्ना वे अदालत में कोटेदारो के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे| चोरी और सीनाजोरी नहीं चलने दी जाएगी| ज्ञात हो कि मंगलवार को भी सतीश दीक्षित को एक ज्ञापन सभासदों ने सौपा था जिसमे रामजी बाजपेयी, रमला राठौर, अनिल यादव, आदेश गुप्ता, असलम, महेन्द्र कुमार, आलोक कुमार, राकेश सिंह गंगवार आदि शामिल थे|
जिलाधिकारी को दिए ज्ञापन में शिकायत कर्ता सभी कोटेदार है एक भी अध्यापक या नगरपालिका का कर्मी नहीं है| जबकि पत्र मे अध्यापको और नगरपालिका कर्मिओ को परेशान करने का आरोप लगाया गया है| दूसरी बात अभी जो भी शिकायते हुई है वे सभी राशन कार्ड सर्वे ठीक से न होने और घर घर सर्वे न कर राशन कार्ड विक्रेताओ द्वारा करने की हुयी है| जिसमे जिम्मेदार जिला पूर्ति विभाग है और अध्यापक व् नगरपालिका कर्मी है| कमाल की बात है कि शिकायत तो जिला पूर्ति विभाग और अध्यापको के विरुद्ध हुई है और परेशान कोटेदार हो गए? नीचे जिलाधिकारी को सौपा गया ज्ञापन हूबहू प्रकाशित किया जा रहा जिसमे प्रयुक्त “प्रचलित राशन कार्ड बदलने” की भाषा बताती है कि ये एकता जिला पूर्ति कार्यालय के ही किसी कर्मी की मेहनत का नतीजा है| हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े लिखे को फारसी क्या| खुद पढ़िये और नतीजा नीचे कमेंट में लिखिए| “कौन स्याह है और कौन चोर है”
फर्रुखाबाद: उत्तर प्रदेश में राशन कार्डो के नवीनीकरण का काम चल रहा है| इसी के साथ सर्वे के आधार पर नए राशन कार्ड भी जारी किये जाने का आदेश सरकार ने किया है| मगर जनपद में सब उल्टा पुल्टा हो रहा है| राशन कार्ड के फार्म पुरानी संख्या के आधार पर कर्मियों को दिए गए है जो कम पड़ रहे है| कर्मी घर घर कुण्डी खटका कर चूल्हे गिनने की जगह एक जगह ही बैठ राशन कार्डो के फार्म भरने का काम कर रहे है या फिर ये फार्म कोटेदारो या अन्य सहयोगियो को दे दिए गए है| जिससे आम जनता अभी भी इधर उधर भटक रही है और आशंका है कि समय से सही पात्रो को एक बार फिर राशन कार्ड नहीं मिल पायेंगे|
नियम के अनुसार अगर घर में अलग अलग कई रसोई है तो उन रसोई से पोषित लोग अलग अलग परिवार के सदस्य हों| यह केंद्रीय योजना है और इसमें केंद्र के ही नियम लागू होते है| इसके अलावा हर किरायेदार को राशन कार्ड लेने का हक है| किन्तु व्यवहारिक रूप से गाँव में विशेष दिक्कत आ रही है| कहीं फार्म कम होने का नाटक तो कहीं आदेश स्पष्ट न होने का नाटक| कई जगह केवल पुराने राशन कार्डो के सापेक्ष ही नए राशन कार्ड के फार्म भरे जाने की खबरे मिली है| ऐसे में नए परिवार के मुखिया को राशन कार्ड लेने के लिए मुश्किल हो रही है| और इसी मुश्किल को खड़ा करके उनसे सुविधा शुल्क भी वसूलने की खबर है| जिला प्रशासन को चाहिए कि इन जगहों परऔचक निरिक्षण कर जनता से रूबरू हो|
अकेले मई माह में ही जिलाधिकारी के पास दो दर्जन से ज्यादा शिकायते राशन कार्डो के नवीनीकरण में अनिमियतता को लेकर विभिन्न संगठनो/सभासदों और व्यक्तिगत दर्ज करायी गयी है मगर सुधार के नाम पर प्रगति अभी अटक शून्य है| लगता है नीचे वाले को ऊपर वाले अफसर के आर्डर न मानने की परम्परा बहुत ही मजबूत हो चली है| जनपद में राशन कार्ड सर्वे का काम शुरू होने में ही विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी| नगर क्षेत्र में शिक्षको की ड्यूटी लगते ही उन्होंने इस ड्यूटी को करने से मन कर दिया था| मगर ये काम शिक्षको से ही कराने की जिद के चलते आलम ये हुए कि एक माह बाद भी आधे शिक्षको ने काम शुरू नहीं किया| उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में राशन कार्ड के सर्वे के काम के लिए आँगन बाड़ी, शिक्षा मित्रो, नगरपालिका के कर्मियों का सहारा लिया गया है| पड़ोस के ही जनपद कन्नौज में राशन कार्डो के सर्वे का काम लगभग अंतिम चरण में पहुच गया है| यहाँ नगर क्षेत्र में ये काम नगरपालिका से कराया गया| नगरपालिका के पास प्रयाप्त कर्मी होते है| हर मोहल्ले पर एक हवलदार होता है| इसी के साथ जनता के प्रतिनिधि के तौर पर एक सभासद भी होता है| मगर लगता है कि फर्रुखाबाद का जिला आपूर्ति विभाग के पास कुछ छुपाने को है जिसके कारण ये काम नगर क्षेत्र में पारदर्शिता से नहीं कराया जा रहा है|
बीपीएल और अन्तोदय कार्डो के लिए जनता को मूर्ख बनाकर हो रहा लेखपालो का उपरी कमाई का खेल-
बी पी एल राशन कार्ड बनाने के लिए अधिकतम आय 25000 रुपये सालाना का पैमाना तो है मगर साथ ही साथ अगर किसी के घर टीवी मोटर साइकिल, फ्रिज, मोबाइल या पक्का मकान तक हुआ तो उसका बना बनाया बी पी एल का राशन कार्ड अपात्र की श्रेणी में आ जायेगा| ये बात सार्वजानिक नहीं की जा रही है और इसी के चलते कई लेखपालो ने थोक के भाव 1000/- प्रति घूस लेकर आय प्रमाण पत्र जारी करने का धंधा चालू कर रखा है| यानि जो चीज सार्वजनिक होनी चाहिए और ढिंढोरा पीट कर बताई जानी चाहिए उसकी दुग्दुगी अभी तक जिला आपूर्ति विभाग ने नहीं पिटवाई है जबकि इस आशय का आदेश 26 अप्रैल को खाद्य एवं आपूर्ति निर्देशालय द्वारा जारी की जा चुकी है| भ्रष्टाचार होने से पहले रोकने की जगह होने के बाद जो होगा देखा जायेगा की पद्दति पर काम हो रहा है| अभी घूसखोरी कर अपात्रो को बीपीएल श्रेणी का राशन कार्ड बन जाने का पूरा मौका मिलेगा और उसके बाद शिकवा शिकायत होने पर जांचा और जांच के नाम पर नया धंधा ……|
बीपीएल/अन्तोदय श्रेणी के राशन कार्डो की पात्रता कोटेदारो की दुकानों और सार्वजानिक स्थानों पर प्रकाशन के आदेश रद्दी की टोकरी में फेक दिए गए है| ये तो बड़ी बात है जब कोटेदारो की दुकानों के बाहर लगे खाद्यान के बोर्डो पर गोदाम का भण्डारण नहीं लिखा जाता तो ये उम्मीद करना ही बेईमानी है| अगर पहले से ही सतकर्ता बरती जाए तो गड़बड़ी पर अंकुश लगाया जा सकता है| मगर असल में ऐसा नहीं हो रहा| कार्यालय से आदेश तो जारी होता है फाइल का पेट भरने के लिए किन्तु व्यवहारिक तौर पर मूक स्वीक्रति मनमानी कर जेब गरम करने के रस्ते खुले रखे जाते है|
प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा सुनील कुमार ने कहा कि जून 2015 तक सभी शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्ति दे दी जाएगी।
टीईटी को सरकार वैध मानकर टीईटी पास को नियुक्ति देने का काम कर रही है। स्कूलों में स्पोर्ट्स की गतिविधियां न होने पर उन्होंने कहा कि सरकार से खेलों के लिए अलग से बजट की व्यवस्था कराई जाएगी।
डाक बंगले पर पत्रकारों से बातचीत में प्रमुख सचिव ने कहा कि हमें शिक्षा के स्तर को सुधारना होगा। सबसे पहले विश्वास कायम करना है। जनता को लगे कि हम उनके बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रहे हैं। सुधार की बहुत गुंजाइश है। जिन स्कूलों में गणित और विज्ञान के टीचर नहीं हैं, पांच महीने में उनकी व्यवस्था हो जाएगी। अनुदेशक रखे जाने की प्रक्रिया जून तक पूरी हो जाएगी। टीईटी को सरकार वैध मान चुकी है।
टीईटी पास की नियुक्ति भी शुरू कर दी गई है। शिक्षकों को वेतन जारी नहीं होने की तकनीकी कमी को दूर कर लिया गया है। नगरीय क्षेत्रों में जहां शिक्षक नहीं हैं, वहां प्रमोशन से आए शिक्षकों को नियुक्त किया जाएगा। किराए के जर्जर भवनों में स्कूल बंद करने पड़े हैं। स्कूलों में खेलों का आयोजन न होने पर उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा में 22 हजार करोड़ खर्च कर रही है।
खेल के 500 करोड़ से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। इस पर गंभीरता से विचार करना होगा।
पढ़ाई के समय दूसरा काम नहीं
चुनाव ड्यूटी, दैवीय आपदा को छोड़कर किसी भी काम में अब शिक्षकों की ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी। यदि शिक्षकों से जिला प्रशासन राशन कार्ड के सर्वे का कार्य कराता है तो यह स्कूल समय के बाद कराना होगा। स्कूल के समय में अध्यापन के अलावा और कोई काम नहीं लिया जाएगा।
लखनऊ : गरीबी रेखा के नीचे किसी तरह जीवन चला रहे नागरिकों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली ने महंगाई का जोरदार झटका दिया है। राशन दुकान से अब तक महज 13.50 रुपये में चीनी पा रहे राजधानी के सवा लाख से अधिक गरीब परिवारों को आपूर्ति विभाग ने खुले बाजार की महंगाई की आग में झोंक दिया है। इन परिवारों को चीनी की आपूर्ति बंद होने की कगार पर आ गई है। खुले बाजार में यही चीनी तीन गुना कीमत पर मिल रही है। अधिकारी बताते हैं कि मामला दो रुपये के फर्क को लेकर फंसा है।
लखनऊ में सिर्फ मौजूदा मई माह तक का चीनी का कोटा उपलब्ध है। चूंकि यहां वितरण एक महीना विलंब से चल रहा है, इसलिए मई महीने के कोटे की चीनी जून तक मिलेगी, लेकिन उसके आगे की स्थिति साफ नहीं है। आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि चीनी पर सरकारी नियंत्रण खत्म होने से यह नौबत आ गई है। चूंकि इस बार सरकार ने लेवी की चीनी नहीं ली तो रियायती चीनी का कोई स्टॉक ही नहीं है। केंद्र ने रियायती चीनी देने की जिम्मेदारी राज्य पर छोड़ दी है। हालांकि अधिकारियों के मुताबिक केंद्र ने प्रतिकिलो 18.50 रुपये की दर से सब्सिडी देने की बात कही है, लेकिन फिर भी सामने आ रहे दो रुपये के फर्क ने चीनी की आपूर्ति पर प्रश्न चिह्न लगा दिया है।
यह है फर्क
केंद्र से 18.50 रुपये और राशन कार्ड धारक से 13.50 रुपये प्रतिकिलो मिलने के बाद राज्य को कुल 32 रुपये प्राप्त हो रहे हैं, जबकि खुले बाजार से चीनी खरीद में सरकार का खर्च करीब 34 रुपये आ रहा है। दो रुपये प्रतिकिलो के इस फर्क की वजह से बात अटक रही है। जिलापूर्ति अधिकारी बीएस दुबे ने बताया कि अभी प्रक्रिया चल रही है, इसलिए कुछ निश्चित नहीं कहा जा सकता, लेकिन लखनऊ में जून के बाद उपभोक्ताओं को देने के लिए फिलहाल चीनी का कोई इंतजाम नहीं है।
फर्रुखाबाद: नये कोटे के चयन में खेल का अंदाजा लगाइये कि जब जिला पूर्ति कार्यालय को नव-चयनित कोटेदार से घूस की उम्मीद नहीं रही तो चयन पत्रावली ही गायब कर दी गयी। इससे पूर्व विगत 15 फरवरी को वीडियो कैमरे के सामने हुई कोटा चयन की खुली बैठक की पत्रावली खंड विकास अधिकरी भी 2 माह तक दाबे बैठे रहे। जब नव-चयनित कोटेदार ने विगत 7 मई को तहसील दिवस में शिकायत कर दी तो बीडीओ ने बैक डेट में पत्रावली डिस्पैच कर डीएसओ कार्यालय में पत्रावली 10 मई को प्राप्त करादी। मजे की बात है कि पूर्ति निरीक्षक निहायत बेशर्मी से एसडीएम को बता रहे हैं कि ‘सर पत्रावली मिल ही नहीं रही है’।
विकास खंड बढ़पुर के ग्राम रशीदपुर की दूकान का नया आवंटन गत 15 फरबरी 2013 को राजस्व निरीक्षक और अन्य अधिकारिओ की देखरेख में हुआ था| कोटेदार की दूकान के चयन में विडियो फिल्म भी बनायीं गयी थी| मगर दूकान के आवंटन का पत्र अभी तक उसे नहीं सौप गया है| जाहिर है अगर दूकान का आवंटन पत्र पिछले तीन माह से नहीं मिला तो ग्रामीणों को राशन उसी कोटेदार को हो रह होगा, जिसके पास अभी तक यह कोटा संबद्ध चल रहा था| ऐसे में ये गंभीर मामला बनता है| बड़ा सवाल ये है कि क्या भ्रष्ट तंत्र के मकडजाल में उलझी सरकारी मशीनरी और उससे पीड़ित जनता के इन्साफ के लिए दोषी सरकारी कर्मचारी को कोई सजा देने की पहल प्रशासन करेगा?
जेएनआई ने इस मामले में पड़ताल की तो पता चला कि डीएएसआ(जिला पूर्ति कार्यालय) ने तो चयन की पत्रावली ही गायब कर रखी है। इस संबंध में एसडीएम सदर राकेश कुमार से वर्ता की गयी तो उन्होने संबंधित पूर्ति निरीक्षक को बुलाकर मामले की पूछतांछ की। बेशर्मी की हद देखिये कि पूर्ति निरीक्षक बोले की ‘पत्रावली तो आफिस में मिल नहीं ही नहीं रही है’। एसडीएम ने फोन लगाकर बीडीओ से पूछा तो बताया गया कि पत्रावली तो विगत 26 अप्रैल को ही डिस्पैच संख्या 238 से डीएसओ कार्यालय को भेजी जा चुकी, जो 10 मई को प्राप्त करायी जा चुकी है। अब सवाल यह है कि 15 फरवरी को चयन बैठक के बाद पत्रावली इतने दिनों तक बीडीओ कार्यालय में क्यों दबी रही। शिकायतकर्ता नव चयनित कोटेदार के अनुसार ग्राम पंचायत सचिव के द्वारा 10 हजार रुपये की मांग की जा रही थी। पैसा न देने के कारण पत्रावली दाबे रहे। फिर सवाल यह उठा कि बीडीओ बढ़पुर के कार्यालय से 26 अप्रैल को चली पत्रावली को मात्र 5 किलोमीटर दूर स्थित डीएसओ कार्याल पहुंचने में 10 तक का समय क्यों लगा। जवाब साफ है कि तहसील दिवस में 7 मई को शिकायत के बाद बैक डेट में फाइल को डिस्पैच कर दिया गया।
फिलहाल एसडीएम प्रकरण की जांच में लग गये हैं, देखना है कि परिणाम क्या निकलता है।

SHAMSABAD (FARRUKHABAD) : जनपद में नये राशनकार्ड बनवाने के लिए ग्रामीणों से आवेदन मांगने का सिलसिला जारी है। लेकिन पुराने राशनकार्डों में किये गये घपलों की तर्ज पर उसे आगे बढ़ाते हुए नये राशनकार्डों में भी अभी से ही घपला घोटाला शुरू हो गया है। सेक्रेटरी व लेखपाल द्वारा भरवाये जाने वाले राशनकार्डों को सफाईकर्मी व कोटेदारों द्वारा मनमाने तरीके से भरवाया जा रहा है। जिससे अनियमितताओं व भ्रष्टाचार से इंकार नहीं किया जा सकता।
विकासखण्ड शमसाबाद क्षेत्र के ग्राम दलेलगंज के ग्रामीणों ने बीडीओ शमसाबाद से शिकायत करते हुए कहा है कि गांव में सफाईकर्मी राजीव कुमार व कोटेदार राशनकार्ड बनवाने के लिए फार्म भरवा रहे हैं। सफाई कर्मचारी व कोटेदार कई पात्र लोगों को यह कहकर फार्म ही नहीं भरवा रहे हैं कि जब तक परिवार के मुखिया की मौत नहीं हो जाती तब तक उनका राशन कार्ड नहीं बनाया जायेगा। जबकि इन ग्रामीणों का आरोप है कि पहले से ही उन लोगों के पास राशनकार्ड है लेकिन नये राशनकार्ड नहीं बनाये जा रहे हैं।
सफाई कर्मी राजीव व कोटेदार ग्रामीणों को फार्म जमा करने की रसीद भी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। कर्मचारियों द्वारा दो आईडी मांगी जा रही हैं जबकि शासनादेश के अनुसार किसी भी व्यक्ति के पास एक आईडी उपलब्ध है तो उसका राशनकार्ड उसके आधार पर जारी किया जा सकता है। एसडीएम द्वारा दलेलगंज में राशनकार्ड के फार्म भरवाने के लिए लेखपाल राजपाल व ग्राम पंचायत अधिकारी इन्द्रपाल को नियुक्त किया है। लेकिन दोनो अधिकारी गांव में झांकने तक नहीं जाते। वहीं बताया गया कि ग्राम पंचायत अधिकारी अस्वस्थ हैं।
इस सम्बंध में पूर्व प्रधान के पुत्र आनंद कुमार, जसरथ सिंह, रामकुमार सिंह, आनंद त्रिपाठी आदि ने शमसाबाद के बीडीओ से शिकायत की तो बीडीओ का कहना है कि न सफाईकर्मी फार्म भर सकता है और न कोटेदार। यदि ये लोग फार्म भर रहे हैं तो इसकी जांच कराकर कार्यवाही की जायेगी।
FARRUKHABAD : जनपद में जिला पूर्ति अधिकारी की मनमानी अब किसी से छिपी नहीं है। एक एक सिलेण्डर गैस के लिए लोग 1400 से 1500 रुपये खर्च कर रहे हैं, गरीबों की जेबों पर डाका जैसा डाला जा रहा है, एक अदद गैस कनेक्शन के लिए लोगों को चक्कर लगाने के अलावा मोटी रकम गैस एजेंसी मालिकों को देनी पड़ रही है लेकिन जिला पूर्ति अधिकारी हठधिर्मिता से बाज नहीं आ रहे हैं। बीते 15 दिनों से गैस कालाबाजारी के विरोध में अनशन कर रहे सुनील गांधी को चार दिन पूर्व ही डीएसओ ने आश्वासन दिया था कि गैस से सम्बंधी सभी रेट एजेंसी पर बाल पेंटिंग करवा दी जायेगी। लेकिन जिलाधिकारी के आदेश के बावजूद आज तक किसी भी गैस एजेंसी पर बाल पेंटिंग नहीं करायी गयी है।
जिसको लेकर बुधवार को अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी के समक्ष पहुंचकर अवगत कराया कि बीते 15 दिनों से सुनील गांधी अनशन पर बैठे हैं। जिनकी मांग है कि गैस की कालाबाजारी, घटतौली व रसीद पर अंकित मूल्य से ज्यादा शुल्क वसूलने पर अंकुश लगाया जाये। पूरे जनपद की गैस एजेंसियों के बोर्ड पर स्थाई रूप से छपा हो कि गैस की घर तक सुपुर्दगी कितने रुपये में होगी। साथ ही यह भी अंकित होना चाहिए कि गोदाम पर सिलेण्डर का मूल्या क्या होगा।
अधिवक्ताओं ने कहा कि सुनीलगांधी की सभी मांगें मानते हुए अनशन समाप्त कराया जाये, नही तो आम आदमी पार्टी भी सुनील गांधी के समर्थन में अनशन के लिए बाध्य होगी। इस दौरान पवन दुबे एडवोकेट, आशुतोष अवस्थी, शिव कुमार बाथम आदि मौजूद रहे।
FARRUKHABAD : गैस की कालाबाजारी और धांधली से परेशान उपभोक्ताओं के लिए एक अच्छी खबर है कि अब गैस एजेंसियों पर जिलाधिकारी व जिला
पूर्ति अधिकारी के नम्बर सार्वजनिक किये जायेंगे। गैस ऐजेंसी के खिलाफ बीते 1 अप्रैल से अनशन पर चल रहे सुनील गांधी से यह बात अधिकारियों ने कही।
15 दिनों से बलराम गैस एजेंसी पर मूल्य से अधिक पैसे लेने से परेशान होकर सुनील गांधी पहले कलेक्ट्रेट में अनशन पर बैठे। हालत बिगड़ी तो उन्हें लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। लगातार जारी अनशन से प्रशासन आखिर नतमस्तक हो ही गया। सोमवार को लोहिया अस्पताल के कमरा नम्बर 12 में भर्ती सुनील गांधी से मुलाकात करने सिटी मजिस्ट्रेट अभिलाष पटेल व जिला पूर्ति अधिकारी गुलाबचन्द्र पहुंचे। गांधी से बातचीत के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट ने उसकी मांगें स्वीकार लीं। इसी के साथ जिला पूर्ति अधिकारी ने सुनील गांधी से तत्काल बलराम गैस एजेंसी के अलावा अन्य एजेंसियों पर भी बड़े बड़े अक्षरों में गैस विक्री का मूल्य, होम डिलीवरी का मूल्य अंकित करने की बात कही। जिस पर सुनील गांधी ने कहा कि इसके साथ-साथ बड़े बड़े अक्षरों में जिलाधिकारी व पूर्ति अधिकारी के नम्बर भी अंकित किये जायें ताकि वह पीड़ित होने पर तत्काल फोन द्वारा दोनो अधिकारियों को सूचित कर समस्या का निदान पा सके।
जिला पूर्ति अधिकारी ने तत्काल बलराम गैस एजेंसी पर नम्बर अंकित कराने के साथ-साथ गैस सिलेण्डर का क्रय मूल्य भी अंकित कराने की बात कही। सुनील ने कहा कि जब उसे गैस एजेंसी पर नम्बर अंकित होने की बात की पुष्टि हो जायेगी तभी वह अनशन समाप्त कर देगा। दोनो अधिकारी वयान लेने के बाद वापस लौट गये।
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