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निकाय चुनाव: भाजपा में एक अनार, सौ बीमारनिकाय चुनाव: भाजपा में एक अनार, सौ बीमार फर्रुखाबाद : चुनावी दंगलों में विपक्षियों को चारों खाने चित करने वाली भारतीय जनता पार्टी की बम-बम है। यह बम-बम यूपी विधानसभा चुनाव में भगवा के सहारे चुनावी वैतरणी पार कर सूबे की सत्ता पर बैठने के बाद कई गुना बढ़ गयी| अब निकाय चुनाव होने है| जिसको लेकर पार्टी के पास एक लम्बी...

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दीये बिक्री हो तभी तो मने अंशिका की दीवालीदीये बिक्री हो तभी तो मने अंशिका की दीवाली फर्रुखाबाद :(दीपक-शुक्ला)अब से ढाई दशक पहले दीपावली के त्योहार पर लोग मिट्टी के दीये से घर को रोशन करते थे लेकिन धीरे-धीरे इनका स्थान अब बिजली की झालरों और रंगबिरंगी मोमबत्तियों ने ले लिया है। जिसके चलते मिट्टी के दीये सगुन बनकर रह गये हैं। लोग पूजा पाठ में ही इनका प्रयोग...

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दिग्गजों के वार्ड में 10 वर्षो से चुनाव हार रही बीजेपीदिग्गजों के वार्ड में 10 वर्षो से चुनाव हार रही बीजेपी फर्रुखाबाद:वर्षो से प्रदेश में बीजेपी की सरकार नही बनी| तो निकाय चुनाव में भी किसी ने कोई दमखम नही दिखाया| लेकिन अब केंद्र से लेकर प्रदेश की कुर्सी का भगवा करण होने के बाद बीजेपी के छोटे-बड़े सुरमा अपना दांव अजमाने में लगे है| जगह-जगह बैठके आयोजित हो रही है| बीजेपी वार्डो का...

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प्रेम प्रसंग के शक में ग्रामीण की गोली मारकर हत्याप्रेम प्रसंग के शक में ग्रामीण की गोली मारकर हत्या फर्रुखाबाद: बीते कई वर्षो से विवाहिता से प्रेम प्रसंग के शक में विवाहिता के परिजनों ने ग्रामीण की गोली मारकर हत्या कर दी गयी| पुलिस ने घटना के बाद शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिये भेजा दिया| मृतक के भाई ने घटना के सम्बन्ध में तहरीर दी| थाना मऊदरवाजा क्षेत्र के ग्राम...

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1,989 परीक्षार्थीयों ने किया टीईटी परीक्षा से किनारा1,989 परीक्षार्थीयों ने किया टीईटी परीक्षा से किनारा फर्रुखाबाद: रविवार को हुई टीईटी परीक्षा के लिये प्रशासन ने पूरी सख्ती दिखाई| जिससे परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से निकट गयी| लेकिन वही दोनों पालियों में 14 केंद्रों पर 11590 परीक्षार्थी परीक्षा मे से 1,989 परीक्षार्थीयों ने किनारा कर लिया| शिक्षक पात्रता परीक्षा(टीईटी) पहली पाली...

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सोशल मिडिया को चुनावी हथियार बनायेगी बीजेपीसोशल मिडिया को चुनावी हथियार बनायेगी बीजेपी फर्रुखाबाद: आगामी निकाय चुनाव में बीजेपी ने सोशल मिडिया को हथियार बनाने का खका तैयार कर लिया है| इसके लिये बैठक कर दिशा निर्देश भी जारी किये गये है| नगर के सिकत्तरबाग में डॉ० महिपाल सिंह के विधालय में आयोजित आईटी विभाग की बैठक में जिलाध्यक्ष सत्यपाल सिंह ने कहा कि नगर निकाय...

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आजीवन सदस्यता वाले ही कर सकेंगे सपा से दावेदारीआजीवन सदस्यता वाले ही कर सकेंगे सपा से दावेदारी फर्रुखाबाद: नगर पालिका अध्यक्ष की टिकट सामान्य होने के बाद से अब दावेदारों की एक लम्बी लिस्ट हर पार्टी के सामने आ गयी है| कुछ प्रत्यक्ष रूप से तो कुछ पर्दे के पीछे से अपनी राजनितिक शतरंज में गोट फिट करने में लग गये है| फ़िलहाल सपा ने आवेदन लेने भी शुरू कर दिये है| समाजवादी...

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मासूम की मौत पर डॉ० भल्ला के खिलाफ मुकदमामासूम की मौत पर डॉ० भल्ला के खिलाफ मुकदमा फर्रुखाबाद: पैसे ना होने से बच्चे का उपचार ना करने से मासूम की मौत पर जिलाधिकारी मोनिका रानी ने सख्त कार्यवाही कर दी| उन्होंने जाँच के आदेश के साथ ही चिकित्सक भल्ला के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करा दिया| कोतवाली मोहम्मदाबाद क्षेत्र के ग्राम खिमसेपुर निवासी नन्हे लाल के 6 माह...

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दो वर्षो में तीसरी बार बम से घटना को अंजाम देने की साजिशदो वर्षो में तीसरी बार बम से घटना को अंजाम देने की साजिश फर्रुखाबाद: जिले की सुरक्षा एजेंसी किस तरह से कार्य कर रही है| एलआईयू व स्वाट टीम किस पर शिकंजा कर रही है| जब दो वर्षो में तीसरी बार घटना को अंजाम देने की नाकाम शाजिश रची गयी| मजे की बात तो यह है कि पुलिस से लेकर एटीएस तक बम बरामद के मामले में जाँच पड़ताल कर चुकी है| लेकिन अभी तक...

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सेंट लारेंस स्कूल के पीछे मिला संदिग्ध बमसेंट लारेंस स्कूल के पीछे मिला संदिग्ध बम फर्रुखाबाद: शहर में दीपावली के त्योहार को देखते हुये पुलिस जितनी अलर्ट है अपराधी उनसे एक कदम आगे नजर आ रहे है| जिसके चलते एक साजिश के तहत विधालय के पीछे बम मिलने से सनसनी फ़ैल गयी| मौके पर पुलिस ने पंहुचकर जाँच पड़ताल की| शहर कोतवाली क्षेत्र के श्याम नगर में सेंट् लारेन्स स्कूल...

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केंद्र और राज्य में अलग अलग सरकारों से उत्तर प्रदेश में इ-गवर्नेंस को लग रहा पलीता

Comments Off on केंद्र और राज्य में अलग अलग सरकारों से उत्तर प्रदेश में इ-गवर्नेंस को लग रहा पलीता

Posted on : 10-07-2016 | By : पंकज दीक्षित | In : EDITORIALS, FARRUKHABAD NEWS, Lokvani Jan Seva Kendra, Politics

Editorफर्रुखाबाद: केंद्र और राज्य सरकार में अपने अपने कामो को प्रचारित करने के चक्कर में उत्तर प्रदेश में इ-गवर्नेंस की ऐसी तैसी हो रही है| इसका खामियाजा उत्तर प्रदेश के 2 लाख से ज्यादा लोकवाणी/जन सेवा केंद्र संचालकों के साथ साथ जनता भी भुगत रही है| राज्य सरकार द्वारा संचालित इ-डिस्ट्रिक्ट सेवाओं को केंद्रीय CSC से जोड़ने की जगह प्राइवेट 5-6 कम्पनियो को ठेके पर दे दिया गया है| ये कम्पनिया ही लूट का माध्यम बनी हुई है| जहाँ देश के कई प्रदेशों में जनता को 100 से ऊपर सरकारी सेवाएं इन केंद्रों से मिल रही है वहीँ उत्तर प्रदेश में इन केंद्रों पर राज्य सरकार की 4-5 सेवाओं से से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है भले ही 27 सेवाओं की लिस्टिंग कर इ गवर्नेंस का ढिंढोरा पीटा जा रहा हो| सरकारी बाबू तंत्र अभी भी गिद्ध नजर से अपने टुकड़े को नहीं छोड़ रहा| और इन सबके बीच एक और दलाल के बैठा देने से सेवाएं सस्ती नहीं महगी ही पड़ रही है| और केंद्र संचालक को भी कुछ मिल नहीं रहा| कुल मिलाकर चुनाव में राज्य की सबसे बड़ी आबादी ग्रामीण जनता मेट्रो और आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे से गुजर कर वोट देने नहीं जाएगी उसे तो पटवारी, ग्राम सचिव, सरकारी दफ्तरों के बाबुओं की घूस और प्रायमरी स्कूल के मास्टर के स्कूल आने ही याद आएगी|

उठ प्रदेश में इ डिस्ट्रिक्ट दवाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए पहले से चल रहे लोकवाणी केंद्रों के बीच कुल 5-6 कंपनियों को घुसेड़ कर दलाली का रेट बढ़ा दिया गया है| अब लोकवाणी केंद्र सीधे इन आई सी के कंट्रोल में न होकर सजह, वयमतेक, सी एम एस कंप्यूटर लिमिटिड जैसे कंपनियों के हवाले कर दिया गया है| टेंडर देते समय उत्तर प्रदेश की सरकार के अधिकारियो ने देश के प्रगतिशील प्रदेशों के मॉडल को न अपनाकर लगता है कमीशन की संस्कृति ही अपनाई है| वर्ना ऐसा न होता की जो सबसे ज्यादा काम कर रहा है उसे सबसे कम पैसे मिलते| उदहारण के लिए कानपूर मंडल में इ डिस्ट्रिक्ट का काम हथियाने वाली कम्पनी अपने जन सेवा केंद्र संचालक को केवल 1.67 रुपये का भुगतान प्रति फ़ार्म कर रही है| अब जिस जन सेवा केंद्र में लाखो रुपये लगाकर केंद्र खोला हो वो 1.67 रुपये प्रति फार्म में जनता का काम कैसे करे? सवाल बड़ा है मगर जबाबदेही किसी की नहीं|

केंद्र सरकार की होल्डिंग वाली कम्पनी इ गवर्नेंस प्राइवेट लिमिटिड और csc-spv ने उत्तर प्रदेश को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इ डिस्ट्रिक्ट सेवाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए प्रस्ताव भेज था मगर यूपी के अफसरों/मंत्रियो ने इस निशुल्क प्रस्ताव को दरकिनार कर प्राइवेट कंपनियों को इ डिस्ट्रिक्ट सेवा देने के लिए टेंडर स्वीकृत कर दिए| नतीजा ये हुआ कि इन कंपनियों ने जन सेवा केंद्र खोलने के लिए संचालकों से मनमाने शुल्क करोडो में वसूल डाले (ऐसा नहीं माना जा सकता कि ये सब सरकारी अफसरों की सहमति से न हुआ हो)| एक एक संचालक से 9000/- प्रति केंद्र लिखापढ़ी में और 10 से 15हजार तक जो जागरूक नहीं थे उनसे अंडर टेबल भी लिए गए| बात यहीं तक नहीं रही| लोकवाणी केंद्रों पर पहले सरकार ने 20 रुपये का शुल्क प्रति आवेदन रख था| उसमे से 10 रुपये सरकार ले लेती थी| अब नए बिचौलिए के आने से उस 20 रुपये में से 18.37 रुपये संचालक से ले लिए जाते है| यानि की कुल मिलाकर 1.67 में जन सेवा केंद्र संचालक को काम करना है| है न कमाल की बात| भारत के अन्य किसी भी प्रदेश में जन सेवा केंद्र संचालक को इतने कम रुपये में काम के लिए नहीं कहा जाता| आंध्रा प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, बिहार यहाँ तक की पडोसी राज्य उत्तरांचल तक में ये सेवाएं जनता को देने के लिए जन सेवा केंद्रों पर 30 रुपये से 50 रुपये के बीच में शुल्क निर्धारित है| इन प्रदेशों में काम ईमानदारी से करने पर भी संचालक ठीक ठाक कमा लेता है| मगर उत्तर प्रदेश में 1 रुपये में काम करने के लिए कह कर सरकार खुद भ्रष्टाचार करने के लिए एक तरीके से प्रोत्साहित करती है| क्योंकि जो काम 30 रुपये में होता हो उसे 1 रुपये में करने के लिए कहना क्या है?

अब केंद्र सरकार की सीएससी और राज्य सरकार की इ डिस्ट्रिक्ट सेवा अलग अलग प्लेटफॉर्म में होने के कारण संचालक को अलग अलग जगह माथा मारना पड़ता है| दोनों ही अपने अपने कामो का ढोल पीटते है| जहाँ केंद्रीय सीएससी को लेने के लिए जोर शोर से बिना शुल्क का प्रचार किया जाता है वहीँ उत्तर प्रदेश की इ डिस्ट्रिक्ट सेवाओं को संचालित करने के लिए खूब भ्रष्टाचार हो रहा है| कहीं कोई बंदिश नहीं है| लूटो और हिस्सा दो| मगर इन सबमे पिसता कौन है? छोटा मोटा कारोबार करने वाला केंद्र संचालक और आम जनता|

कुल मिलाकर निष्कर्ष यही निकलता है कि केंद्र और राज्य में अलग अलग पार्टी की सरकार होने मायने विकास में असंतुलन और प्रचार की रस्साकसी है| इनके बीच खड़ा वोटर यानि की आम आदमी केंद्रीय और राज्य के संघीय ढांचे में काम के बटवारे से होने वाले नुकसान का ही भागीदार है| सरकार प्रचार की प्रतिद्वन्धितता में फसी है और जिन्हे इनके बीच रहना और काम करना है उनसे पुछा भी नहीं जाता की तुम्हे क्या ठीक लगता है| ये लोकतंत्र है| एक बार वोट देने के बाद पांच साल तक मनमानी का लाइसेंस देने से ज्यादा कुछ नहीं है वर्तमान का लोकतंत्र| अन्ना आंदोलन में उठी आवाज राइट तो रिकॉल शायद कहीं खो गयी| उत्तर प्रदेश के 2.5 लाख लोकवाणी संचालकों से एक बार भी पुछा नहीं गया कि क्या ठीक रहेगा| केंद्र की सी एस सी से जुड़ना या फिर अलग से प्राइवेट कम्पनियो को बीच में बिठा कर दलाली बढ़ा देना| जिनके कंधो पर जनता तक जन सेवा केंद्रों की सेवा जनता तक पहुंचाने का काम था उनके कंधे और छील दिए गए| कभी पूछा नहीं गया कि दूर गाँव में बिना बिजली के कैसे केंद्र चलाते हो? सोलर प्लेट खरीदने के लिए एक ग्रामीण लोकवाणी संचालक ने गाँव के साहुकार से खेत का एक टुकड़ा गिरवी रखकर ब्याज में पैसे लिए थे| कमाई नहीं आई तो खेत चला गया| अखिलेश सरकार की योजनाओं को ग्रामीणों तक पहुंचाने वाला वो जन सेवा केंद्र संचालक खेत भी गवां बैठा| अब सरकार बदलने का इन्तजार नहीं करे तो क्या करे ?………

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