यूपीए-2 के चार साल पूरे होने के जश्न में यूं तो बड़े चेहरों ने दूरियां बनाए रखी, लेकिन बसपा सुप्रीमो मायावती की अनुपस्थिति में उनके दो प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने सरकार के रणनीतिकारों के चेहरे खिला दिए। हालांकि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव जश्न से नदारद रहे।
सरकार के रणनीतिकारों को बसपा प्रतिनिधियों सतीश चंद्र मिश्र और बृजेश पाठक के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। दोनों डिनर शुरू होने के बाद सात रेस कोर्स पहुंचे। इन दोनों की मौजूदगी से फिलहाल समय पूर्व चुनाव की अटकलों पर विराम लग गया है।
लालू प्रसाद यादव और रामविलास पासवान के लिए भी चार साल का जश्न खास रहा क्योंकि उन्हें पहली बार मंच पर बैठने की जगह मिल गई।
हालांकि डिनर टेबल अमर सिंह की उपस्थिति ने सीट मैनेजमेंट को थोड़ा उलझा दिया, उनकी सहयोगी जयाप्रदा सीट ढूंढती नजर आई।
हाल ही में रेल मंत्री के पद से इस्तीफा देने वाले पवन कुमार बंसल समारोह में गंभीर मुस्कराहट के साथ मौजूद दिखे, तो अश्विनी कुमार कहीं नजर नहीं आए। सपा अपनी पूरी टीम के साथ ही नदारद दिखी।
समारोह के दौरान सीट मैनेजमेंट का जिम्मा संभालने वाले केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला बेहद परेशान दिखे। दरअसल पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक सोनिया गांधी और राहुल गांधी की टेबल के साथ रालोद के अजित सिंह, लालू प्रसाद, रामविलास पासवान और रक्षा मंत्री एके एंटनी को बैठना था।
मगर एक कुर्सी पर अमर सिंह ने कब्जा जमा लिया, तो दूसरे पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने। इस दौरान सोनिया ने अमर सिंह का हालचाल भी पूछा, मगर राजीव शुक्ला को एंटनी और अजित के लिए प्रधानमंत्री के टेबल के पास इंतजाम कराना पड़ा।
जैसे ही समारोह में सतीश चंद्र मिश्र और बृजेश के आने की सूचना मिली, शुक्ला उनकी ओर लपके और इनके लिए सोनिया के बगल में अलग से कुर्सी डलवाई गई।
कहना न होगा कि इन दोनों नेताओं के लिए कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं को अपनी कुर्सी खाली करनी पड़ गई। इस दौरान बंसल पूरी गर्मजोशी के साथ मौजूद थे और इनके लिए सहानुभूति की बारिश सी हो रही थी। सभी की नजरें अश्विनी कुमार को ढूंढ रही थी जो कहीं दिखाई नहीं दे रहे थे।
समारोह में हाल ही में उपाध्यक्ष बनाए गए राहुल गांधी को पहली बार मंच पर बैठने का अवसर मिला। इसके जरिये कांग्रेस नेतृत्व ने राहुल के बढ़ाए गए कद की ओर साफ इशारा कर दिया।


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