मोदी के शपथ ग्रहण को लेकर ममता ने दिया बयान, कहा- निमंत्रण मिला है…

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दिल्ली:पीएम नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में पश्चिम बंगाल की सीएम व टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी भी शामिल होंगी। ममता ने कहा कि मैंने अन्य मुख्यमंत्रियों से भी बातचीत की है, क्योंकि यह एक अनुष्ठानिक कार्यक्रम है, इसलिए मैंने तय किया है कि मैं इसमें शामिल होने जाऊंगी। हां, मैं जाऊंगी।
लोकसभा चुनाव 2019 में मिले प्रचंड जनादेश के बाद नरेंद्र मोदी 30 मई को प्रधानमंत्री के रूप में अपनी दूसरी पारी का आगाज करेंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद गुरुवार को नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाएंगे। इस दौरान उनके नये मंत्रिमंडल का भी शपथ ग्रहण होगा। राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां तेज हो गई हैं।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भाजपा और एनडीए संसदीय दल का नेता चुने जाने की चिठ्ठी मिलते ही शनिवार को नरेंद्र मोदी को दूसरी पारी के लिए प्रधानमंत्री नामित कर दिया था। राष्ट्रपति भवन ने रविवार को आधिकारिक बयान जारी कर 30 मई को शाम सात बजे नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों का शपथ समारोह तय होने की जानकारी दी। लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत से सत्ता में लौटे नरेंद्र मोदी की दूसरी पारी भाजपा की सियासत के लिहाज से ऐतिहासिक होगी। पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटने वाले मोदी तीसरे प्रधानमंत्री हैं। वैसे अटल बिहारी वाजेपयी भी लगातार दो बार प्रधानमंत्री बने थे, मगर उनका पहला कार्यकाल 13 महीने का ही रहा था।
लोकसभा चुनाव के नतीजे गुरुवार 23 मई को आए थे और भाजपा को अकेले अपने दम पर 303 सीटों का भारी बहुमत हासिल हुआ था। जबकि एनडीए के साथ उसके सीटों का आंकड़ा 353 तक जा पहुंचा है। नरेंद्र मोदी अपनी दूसरी पारी का आगाज भी गुरुवार को ही करने जा रहे हैं। भाजपा संसदीय दल की शनिवार को हुई बैठक में नरेंद्र मोदी को नेता चुने जाने की औपचारिकता पूरी की गई। एनडीए ने भी इसी दौरान मोदी को अपना नेता चुना।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की अगुआई में एनडीए नेताओं ने इसके बाद शनिवार को ही राष्ट्रपति को मोदी को नेता चुने जाने की चिठ्ठी सौंपी। इसके बाद नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया और राष्ट्रपति ने उन्हें प्रधानमंत्री नामित करने की चिठ्ठी सौंपते हुए शपथ की तारीख और समय बताने के लिए कहा था।

मुलायम का अखाड़ा, अब तक सबको पछाड़ा

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Posted on : 24-05-2019 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, Politics, Politics- Sapaa, लोकसभा चुनाव 2019

डेस्क: देश का सबसे बड़ा सियासी दंगल। जिले-जिले अखाड़े सजे थे और दांव- पेच भी पूरे शबाब पर रहे। देशभर में चली मोदी सुनामी ने बड़े-बड़े सियासी दुर्ग ढहा दिए। गांधी परिवार के वर्चस्व वाली अमेठी सीट तक नहीं बची, लेकिन ये मोदी सुनामी मैनपुरी में सपाई किले को नहीं हिला सकी। पूर्व में चुनावों में हर प्रतिद्वंद्वी को पछाडऩे वाले सियासी अखाड़े के सबसे बड़े पहलवान मुलायम सिंह ने इस बार भी भाजपा को पछाड़ दिया। वर्ष 2014 में भी मोदी लहर के दौरान भी मुलायम सिंह पराजित नहीं हुए थे। सियासत की कुश्ती में चार बार पहले जीत हासिल कर चुके मुलायम ने पांचवी बार भी जीत हासिल की। इसके साथ ही मैनपुरी में सपा की यह लगातार नौवीं लोकसभा जीत बन गई।
ईशन और काली नदी की मौजूदगी वाली मैनपुरी पौराणिक काल से अहम रही है। मयन और च्यवन जैसे ऋषियों की चरण रज यहीं विद्यमान है। इसे मयन ऋषि की तपोभूमि भी कहा जाता है। आजादी के बाद सियासत का सफर शुरू हुआ तो मतदाताओं का मिजाज सियादानों की वफादारी में तब्दील हो गया। नेताओं पर एक नहीं कई-कई बार मतदाता भरोसा जताते रहे। क्षेत्रीय दलों के उदय के बाद राजनीति जातीय समीकरणों में उलझी तो यह लोकसभा क्षेत्र सपा के सियासी किले के तौर पर मशहूर हो गया। इसकी अहम वजह रही यहां यादव मतदाताओं की बहुलता। जातीय समीकरणों के लिहाज से देखें तो अब तक यहां यादव वोटर अहम भूमिका निभाते रहे हैं। लोकसभा क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग के मतदाता करीब 45 फीसद बताए जाते हैं, इनमें भी यादव मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 25 फीसद तक है। इनके बाद शाक्य मतदाताओं का नंबर आता है। सवर्णों की बात करें तो इनका कुल आंकड़ा 25 फीसद तक पहुंच पाता है, लगभग इतने ही दलित मतदाता हैं। अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या सबसे कम करीब पांच फीसद है।
जातियों के इसी दांवपेच ने यहां सपा को मजबूत बनाया। सवर्णों का एक वर्ग भी पूर्व में सपा के साथ दिखता रहा है। हालांकि बीते कुछ चुनावों में तस्वीर थोड़ी बदली थी। भाजपा के राष्ट्रवाद, गरीबोन्मुखी योजनाओं का प्रचार आदि तरीकों से सपाई खेमा भी थोड़ा बेचैन जरूर था। हालांकि बसपा से गठबंधन उसकी हिम्मत बढ़ाए हुए था। भाजपा की बात करें तो उनके प्रत्याशी ने बहुत बढ़त बनाई। जीत का अंतर बीते चुनावों के मुकाबले काफी कम रहा, लेकिन भाजपा की ये बढ़त मुलायम को पीछे नहीं छोड़ पाई। यहां मतदाताओं में मुलायम ङ्क्षसह का आखिरी चुनाव होने के कारण भी एक अलग तरह का समर्थन नजर आया। देश में जब भाजपा को रिकार्ड जीत मिली, तब भी मुलायम सिंह मैनपुरी के सियासी अखाड़े के सबसे बड़े पहलवान साबित हुए।
मुलायम के नाम हुआ सबसे ज्यादा जीत का रिकार्ड
इस सीट पर जीत का रिकार्ड मुलायम सिंह यादव के ही नाम है। मुलायम सिंह यादव यहां चार बार सांसद बन चुके हैं। उनके बाद सबसे ज्यादा जीत बलराम सिंह यादव के नाम हैं। बलराम सिंह यादव एक बार कांग्रेस की टिकट पर और दो बार सपा की टिकट पर चुनाव जीते थे।
ऐसे बढ़ी सपा की ताकत
पहला चुनाव जीतने के बाद सपा ने यहां की जनता में अपने प्रति जबर्दस्त विश्वास जगाया। इसका अंदाजा चुनाव दर चुनाव सपा के मत प्रतिशत को लेकर लगाया जा सकता है। 1996 के चुनाव में सपा को 42.77 फीसद वोट मिले थे। इसके बाद के चुनाव में यह आंकड़ा 41.69 फीसद रह गया। इसके बाद 99 के चुनाव में 63.96 फीसद, 2004 के चुनाव में 62.64 फीसद, 2004 उपचुनाव में 56.44, 2014 के उप चुनाव में 59.63 फीसद वोट मिले। परंतु 2014 के उप चुनाव में फिर उछाल आया और सपा को 64.89 फीसद वोट हासिल हुए। इस बार वोट फीसद में बहुत ज्यादा उछाल नहीं माना जा रहा, लेकिन जीत मिलने को सपा की ताकत बरकरार रहने के रूप में देखा जा रहा है।
काम आया गठबंधन का गणित
वर्ष 1996 से वर्ष 2014 के लोकसभा उप चुनाव तक कोई दूसरा दल यहां सपा को चुनौती नहीं दे पाया। वर्ष 1996 के बाद जब-जब मुलायम या उनके परिवार का प्रत्याशी मैदान में उतरा, जीत का अंतर दो लाख से साढ़े तीन लाख वोटों तक का रहा। वहीं बसपा भी इस सीट पर सवा दो लाख तक वोट हासिल कर चुकी है। जब मोदी लहर थी, तब भी 2014 के चुनाव में मुलायम ङ्क्षसह 3.64 लाख वोट के बड़े अंतर से जीते थे। उस चुनाव में बसपा को भी 1.20 लाख वोट मिले थे। इसके बाद हुए उपचुनाव में सपा ने भाजपा को 3.21 लाख वोटों के अंतर से पराजित किया था। इस बार भाजपा ने पूरा दम दिखाया, माना जा रहा है कि सपा की जीत में थोड़ी ही सही, लेकिन बसपा के वोटरों ने भी भूमिका निभाई।
चुनौती से पार नहीं पा सकी भाजपा
भाजपा पहली बार वर्ष 1991 में मैदान में उतरी थी, तब सामने सपा नहीं थी। तब भाजपा प्रत्याशी दूसरे स्थान तक पहुंचा था। इसके बाद हुए आठ चुनावों में पार्टी पांच में दूसरे और तीसरे तीसरे स्थान पर ही रही। इन नौ चुनावों में पार्टी अधिकतम 40.06 फीसद वोट ही हासिल कर सकी है। वर्ष 1991 में भाजपा को 26.57 फीसद वोट मिले थे। इसके बाद वर्ष 1998 में 40.06 फीसद वोट मिले। वर्ष 2004 के उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी 2.6 फीसद वोटों तक ही सिमट गया था। बीते उपचुनाव की बात करें तो भाजपा प्रत्याशी को 33 फीसद वोट मिले थे। ऐसे में भाजपा के लिए इस भी बार चुनौती कड़ी मानी जा रही थी।

लाल दरवाजे पर तैनात होंगे पंजाब पुलिस के जबान

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फर्रुखाबाद: लोकसभा चुनाव में किसी गडबडी की आशंका को देखते हुए जिले की किले बंदी की गयी है| जिसको देखते हुए जिले में कई जगह पुलिस बल तैनात किया गया है| वही लाल दरवाजे पर पंजाब पुलिस तैनात की जायेगी|
मतगणना के दौरान आने वाले रुझान व जीत के जश्न के दौरान कोई बबाल ना हो इसके लिए पुलिस व जिला प्रशासन ने चाक-चौबंद व्यवस्था की गयी है| पुलिस अधीक्षक डॉ0 अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि राजेपुर, कायमगंज, मोहम्मदाबाद आदि जगहों पर क्यूआरटी की तैनाती की गयी है|
वही जिला मुख्यालय पर राजनीति का केंद्र बिंदु माने जाने वाले लाल दरवाजे पर पंजाब पुलिस के जबान तैनात किये जायेंगे| इसके साथ ही भी पीएसी के जबान तैनात किये गये है|

गृह मंत्रालय सतर्क: मतगणना के दौरान हिंसा की आशंका, राज्‍यों को अलर्ट

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नई दिल्‍ली: मतगणना के दौरान हिंसा की संभावना को देखते हुए गृहमंत्रालय सतर्क हो गया है। गृहमंत्रालय ने इसी के मद्देनजर सभी राज्‍यों के मुख्य सचिवों और डीएसजीपी को अलर्ट रहने के लिए कहा है। गृहमंत्रालय ने राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में कानून और शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा है।
बता दें कि सात चरणों में चले लोकसभा चुनाव के नतीजे कल यानी गुरुवार को आएंगे। मतों की गिनती 23 मई को है, इसलिए गृहमंत्रालय को ऐसा अंदेशा है कि इस दौरान हिंसा भड़क सकती है। इस बार लोकसभा चुनाव में इवीएम पर रार मची हुई है। कई विपक्षी दल अनेकों बार चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं।
गृहमंत्रालय को क्‍यों देना पड़ा बयान
मतगणना से पहले कई पार्टियों ने इवीएम और वीवीपैट में गड़बड़ी की आशंका लेकर और साथ ही हर विधानसभा में कम से कम 50 फीसद से ज्‍यादा पर्चियों को मिलान करनेे की मांग की। इस मांग के ठुकराए जाने के बाद से ही कई नेता तीखे बयान दे रहे हैं। इसी के मद्देनजर गृहमंत्रालय को स्‍ट्रॉग रूम की सुरक्षा और अन्‍य किसी प्रकार की हिंसा से निपटने के लिए सतर्कता अलर्ट जारी करना पड़ा। गृहमंत्रालय ने साफ किया है कि मतगणना वाले स्‍थल पर सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार का समझौता नहीं करना पड़े।
रालोसपा के सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा के तीखे बोल
पूर्व केंद्रीय मंत्री और महागठबंधन के घटक रालोसपा के सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा ने मंगलवार को एक्जिट पोल के नतीजे से नाराजगी जताते हुए कहा कि भाजपा रिजल्ट लूटने की कोशिश कर रही। उसके इस रवैये से सड़कों पर खून बहेगा। कुशवाहा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि रिजल्ट लूट की कोई कोशिश हुई तो हथियार भी उठाने से परहेज नहीं करेंगे। जनता का आक्रोश संभल नहीं पाएगा।
निर्दलीय प्रत्‍याशी ने लहराया हथियार
भभुआ के पूर्व विधायक और लोकसभा चुनाव में बक्सर लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार रामचंद्र यादव ने कैमूर ईवीएम मामले में हथियार लहराते हुए प्रेस कान्फ्रेंस किया। उन्‍होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए हथियार उठाना पड़े तो उठाऊंगा। रिजल्ट फेवर में नहीं आने पर अब लड़ना पड़ेगा, अब चुप बैठने से काम नहीं चलेगा। उनके इस बयान का वीडियो वायरल हो रहा है।
रामविलास पासवान ने कहा- ‘जैसे को तैसा’
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ईवीएम को बचाने के लिए हथियार उठाने वाले बयान पर लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान ने पलटवार करते हुए कहा कि ‘जैसे को तैसा’ जवाब मिलेगा। पासवान ने यह बयान मंगलवार को दिल्‍ली में एनडीए के सहयोगियों दलों के डिनर कार्यक्रम में दिया है।
जदयू का पलटवार, कहा- ‘फरिया लीजिए, हमने भी चूड़ियां नहीं पहनी’ 
जदयू नेता संजय सिंह ने उपेंद्र कुशवाहा के हथियार वाले बयान पर कहा कि आपका खून लाल है तो हमारा खून भी लाल है। चाहें तो फरिया लीजिए, हमने भी चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं।
अमित शाह का इवीएम पर हंगामा करने वाली पार्टियों से सवाल 
EVM में गड़बड़ी के विषय पर प्रोएक्टिव कदम उठाते हुए चुनाव आयोग ने सार्वजनिक रूप से चुनौती देकर इसके प्रदर्शन का आमंत्रण दिया था, परन्तु उस चुनौती को किसी भी विपक्षी दल ने स्वीकार नहीं किया। इसके बाद चुनाव आयोग ने EVM को VVPAT से जोड़ कर चुनावी प्रक्रिया को और पारदर्शी किया। VVPAT प्रक्रिया के आने के बाद मतदाता मत देने के बाद देख सकता है कि उसका मत किस पार्टी को रजिस्टर हुआ। प्रक्रिया के इतने पारदर्शी होने के बाद इस पर प्रश्न उठाना कितना उचित है।

मतगणना पांडाल तक ईबीएम ले जाने का जिम्मा सीआईएसएफ के हबाले

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फर्रुखाबाद: लोकसभा चुनाव के लिए स्ट्रांग रूम से मतगणना पांडाल तक ईबीएम ले जाने का जिम्मा सीआईएसएफ के हबाले किया गया है| उसमे स्थानीय पुलिस का कोई दखल नही होगा|
डीएम मोनिका रानी व एसपी डॉ0 अनिल मिश्रा ने जानकारी दी कि मतगणना के लिए ईबीएम स्ट्रांग रूम से लाने की सुरक्षा में यूपी पुलिस का कोई भी किरदार नही है| ईबीएम स्ट्रांग रूम से मतगणना पांडाल तक ले जाने की जिम्मेदारी सीआईएसएफ को दी गयी है| सुरक्षा व्यवस्था के लिए कुल 14 इंस्पेक्टर, 71 उपनिरीक्षक, 51 हेड कांस्टेबल, 236 कांस्टेबल, 36 महिला कांस्टेबल की तैनाती की गयी है|
लेकिन पुलिस कर्मियों का ईबीएम से कोई लेना-देना नही होगा|

पुलिस को भी मतगणना में मोबाइल ले जाने पर बैन

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फर्रुखाबाद: जिलाधिकारी मोनिका रानी व एसपी डॉ० अनिल कुमार मिश्रा ने कड़े निर्देश दिये की मतगणना के दिन सभी पुलिस कर्मी भी मोबाइल व्रत रखें| जिससे कोई आरोप पुलिस कर्मियों पर ना लगे|
आलू मंडी में पुलिस कर्मियों को निर्देश दिये गये की मतगणना में केबल 15 अधिकारीयों और कर्मियों को मोबाइल ले जाने की अनुमति होगी| जिसकी सूची प्रवेश द्वार पर उपलब्ध करा दी जायेगी| इसके अतिरिक्त किसी को भी मोबाइल लेकर प्रवेश नही लेनें दिया जायेगा| पुलिस कर्मी भी भीतर मोबाइल लेकर प्रवेश नही करेंगे| यदि मोबाइल लेकर पुलिस कर्मी मिलते है तो कार्यवाही होगी|

गेट तक प्रत्याशी का वाहन जाने की इजाजत

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फर्रुखाबाद: लोकसभा चुनाव की मतगणना के लिए आने वाले प्रत्याशियों को अपने वाहन मतगणना पंडाल के गेट नम्बर एक पर ले जा सकेगें|
मतगणना पांडाल के गेट तक आने से पूर्व जिसने भी बैरियर लगे है सभी पर प्रत्याशी को भी अपना पास चेक कराना होगा| प्रत्याशी का वाहन मतगणना पांडाल के गेट नम्बर एक (गल्ला मंडी सातनपुर) तक लाने की इजाजत दी गयी है| प्रत्याशी को गेट के बाहर छोड़कर वाहन वापस कर दिया जायेगा|
कुल 9 प्रत्याशी ही अपने वाहन गेट तक ला सकेंगे| जबकि उनके एजेंट का वाहन दूसरे नम्बर के बैरियर पर एजेंटो के वाहन रोंक दिये जायेंगे| उन्हें वहां से पैदल ही मतगणना तक जाना होगा|

सेन्ट्रल जेल और आईटीआई चौराहे पर ही चेक होंगे पास

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फर्रुखाबाद: मतगणना के पूर्ण रूप से शांति व्यवस्था बनी रहे इसके लिए पुलिस व जिला प्रशासन ने अपनी पूरी तैयारी कर ली है| मतगणना स्थल को जाने वाले मार्ग पर बड़ी संख्या में पुलिस बल लगाया गया है| जो बिना पास के किसी को भी पास नही करेगा|
जिलाधिकारी मोनिका रानी ने आलू मंडी में पुलिस कर्मियों को उनकी डियूटी के विषय में जानकारी दी| अपर पुलिस अधीक्षक त्रिभुवन सिंह ने पुलिस कर्मियों को बताया कि 14 टेबल लगेंगी| इसके साथ ही 15 आरो टेबल की व्यवस्था की गयी है| प्रत्येक टेबल पर एक एजेंट रखा जायेगा| पंजाब पुलिस के जबान भी मौके पर तैनात होंगे|
उन्होंने बताया कि सेन्ट्रल जेल चौराहे व आईटीआई चौराहे पर पुलिस का पहला बैरियर लगेगा|इस बैरियर के आगे वही लोग आयेंगे जो मतगणना से सम्बन्धित है| जिसके पास है वही आगे जाने के लिए अधिकृत होगा| बिना पास के कोई अधिकारी हो या पुलिस कर्मी या मीडिया कर्मी उसे आगे आने नही दिया जायेगा|
सभी पुलिस कर्मियों को अपने डियूटी बिंदु पर सुबह 5:30 बजे ही पंहुचने के निर्दश दिये गये| जिलाधिकारी मोनिका रानी ने बताया की मतदान से सम्बन्धित कार्मिको के सफेद पास बने है| वही प्रत्येक विधान सभा के एजेंटो को अलग-अलग रंग के पास जारी किये गये है|

देश में संचार क्रांति के जनक रहे राजीव गांधी

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फर्रुखाबाद:(मोहम्मदाबाद) पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की पुण्य तिथि श्रद्धाभाव से मनाई गई। पुण्य तिथि पर राजीव गांधी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।
कस्बे के चौराहे के निकट एक विधालय में आयोजित कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष मृत्युजंय शर्मा  ने कहा कि राजीव गांधी युवाओं के मार्गदर्शक थे। उनकी दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि देश संचार क्रांति में विश्व में सर्वोच्च शिखर पर है। देश में संचार क्रांति के जनक रहे राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर नमन करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने देश के लिए बलिदान दिया और उन्होंने देश के विकास और प्रगति के लिए अनवरत कार्य किया। कांग्रेस ने सदैव आम आदमी के हितों के लिए काम किया है।
इस दौरान संगठन मंत्री ओमप्रकाश बाथम , सत्यम अग्निहोत्री, योगेश यादव व जीतू बाथम आदि लोग मौजूद रहे

बसपा सुप्रीमो नें अनुशासनहीनता के आरोप में रामवीर उपाध्याय को पार्टी से किया निलंबित

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लखनऊ: लोकसभा चुनाव 2019 में पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाए जाने के कारण बसपा के पूर्व मंत्री व कद्दावर नेता रामवीर उपाध्याय को पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मेवालाल गौतम ने यह कार्रवाई की है। रामवीर उपाध्याय पर लोकसभा चुनाव में आगरा, फतेहपुर सीकरी, अलीगढ़ समेत कई सीटों पर पार्टी का विरोध करने का आरोप।
रामवीर उपाध्याय को लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और अनुशासनहीनता की वजह से निलंबित किया गया है। रामवीर को बसपा ने विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी के मुख्य सचेतक पद से भी हटा दिया है। उनसे कहा गया है कि वे अब पार्टी के किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे और न ही उन्हें इसके लिए आमंत्रित किया जाएगा।
लोकसभा चुनाव के दौरान पूर्व ऊर्जामंत्री व बसपा विधायक रामवीर उपाध्याय की एक तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें वह आगरा के भाजपा प्रत्याशी व मंत्री एसपी सिंह बघेल के गले मिल कर उन्हें जीत की अग्रिम बधाई दे रहे थे। हालांकि, तब रामवीर उपाध्याय इस पर सफाई देते हुए कहा था कि एसपी सिंह बघेल उन्हें रास्ते में मिल गए थे और उन्होंने उनकी कुशलक्षेम पूछकर बधाई दे दी। अब यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि वह भाजपा में शामिल हो सकते हैं। रामवीर उपाध्याय के भाई मुकुल उपाध्याय पिछले साल बीजेपी में शामिल हुए थे। उस दौरान उन्होंने भाई रामवीर पर बसपा से निकालने का आरोप लगाया था।