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जिला जेल में सियाराम का हुआ वनवासजिला जेल में सियाराम का हुआ वनवास फर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला)बीते लगभग पांच दिनों से जिला जेल में चल रही राम लीला जनपद में चर्चा का विषय बनी हुई है| आपराधिक मानसिकता के लोगों में अध्यात्म की गंगा बहाने का काम किया जा रहा है| जिसके चलते यह जिला जेल में पहली अनोखी पहल है| जो बंदियों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार...

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450 वर्षों के बाद इलाहाबाद को मिला अपना पुराना नाम450 वर्षों के बाद इलाहाबाद को मिला अपना पुराना नाम नई दिल्‍ली:संगम नगरी इलाहाबाद को 450 वर्षों के बाद आखिरकार अपना पुराना नाम वाप‍स मिल गया। कभी मुगल शासक सम्राट अकबर ने इसका नाम बदलकर प्रयागराज से इलाहाबाद (अल्‍लाहबाद) किया था। पुराणों में प्रयागराज का कई जगहों पर जिक्र मिलता है। रामचरित मानस में इलाहाबाद को प्रयागराज...

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सीएमओं ने खड़े होकर जलवा दी लाखों की दवाएंसीएमओं ने खड़े होकर जलवा दी लाखों की दवाएं फर्रुखाबाद:सीएमओ कार्यालय के निकट परिवार नियोजन से सम्बन्धित करोड़ो रूपये की दवा व प्रचार सामिग्री सीएमओं अरुण उपाध्याय की मौजूदगी में आग के हवाले कर दी गयी| इस काम को अंजाम सीएमओ कार्यालय के पूर्व शोध अधिकारी अनिल कटियार निवासी नेकपुर चौरासी ने दिया| अनिल कटियार ने बताया...

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पति के दोस्तों ने नकदी जेबरात चोरी कर महिला की इज्जत लूटीपति के दोस्तों ने नकदी जेबरात चोरी कर महिला की इज्जत लूटी फर्ररूखाबाद:बीती रात एक सनीखेज मामला सामने आया है| घर आये पति के दोस्तों ने महिला के साथ गैंग रेप कर उसके घर से नकदी व जेबरात चोरी कर लिये| घटना के सम्बन्ध में पुलिस को तहरीर दी गयी| पुलिस ने जाँच पड़ताल शुरू कर महिला को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया| थाना मऊदरवाजा क्षेत्र...

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खड़े होकर पानी पीते हैं? तो जान लीजिए गंभीर नुकसानखड़े होकर पानी पीते हैं? तो जान लीजिए गंभीर नुकसान डेस्क: यह तो हम सभी जानते हैं कि पूरे दिन में 8 से 10 गिलास पानी पीना हमारे अच्छे स्वास्थ्य के लिए कितना जरूरी होता है। लेकिन आपको यह नहीं पता होगा कि जिस पोजीशन में आप पानी पीते हैं उसका भी आपकी सेहत पर असर पड़ता है। आपके बड़े-बुजुर्ग हमेशा से कहते आए होंगे कि बैठ कर शांति से पानी...

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करवाचौथ पर शुक्र अस्त होने के कारण इस बार नहीं होगा व्रत का उद्यापनकरवाचौथ पर शुक्र अस्त होने के कारण इस बार नहीं होगा व्रत का... नई दिल्ली:वर्ष करवाचौथ 27 अक्टूबर को है। कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को करवाचौथ का व्रत किया जाता है। सुहागिन महिलाओं के लिए इस व्रत का विशेष महत्व है। करवाचौथ के दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। कई संप्रदायों में कुवांरी कन्याएं भी अच्छे पति की...

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पुलिस की पिटाई से बीजेपी समर्थक की मौत पर बबाल,लगाया जामपुलिस की पिटाई से बीजेपी समर्थक की मौत पर बबाल,लगाया जाम फर्रुखाबाद: साथी के साथ गये युवक से पुलिस ने युवक से मारपीट कर दी| जिससे उसकी मौत हो गयी| आक्रोशित भीड़ ने परिजनों के साथ जाम लगाकर जमकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की| मौके पर पंहुचे एएसपी ने कार्यवाही का भरोसा दिया| जिसके बाद जाम खोला जा सका| शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला दरीवा...

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स्कूल बैन की गैस से मासूम छात्रों की हालत बिगड़ीस्कूल बैन की गैस से मासूम छात्रों की हालत बिगड़ी फर्रुखाबाद:(मेरापुर/नबावगंज) विधालय बच्चो को लेकर जा रही बैन की गैस निकलने से उसमे बैठे कई मासूम छात्र-छात्राओं की हालत बिगड़ गयी| ग्रामीणों का आक्रोश देख बैन का चालक मौके से खिसक गया| जिसके बाद मौके पर पंहुचे एसपी ने जाँच पड़ताल कर कार्यवाही के निर्देश दिये|जिसके बाद विधालय...

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श्रीराम की बारात में श्रद्धालु हुये भावविभोरश्रीराम की बारात में श्रद्धालु हुये भावविभोर फर्रुखाबाद:श्री राम विवाह की शोभायात्रा में सभी बरातियो ने जमकर लुफ्त उठाया| वही राम-सिया के विवाह मंचन से बारात तक के कार्यक्रम में सभी मनोहारी झाँकियो को देख कर श्रद्धालु भावविभोर हो गये| राम बारात में जैसे ही श्री राम के गले में सीता जी ने वरमाला डाली तो रामचरित मानस...

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देश के चीनी उत्पादन में यूपी का कद बढ़ा:सुरेश राणा

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Posted on : 19-10-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, Politics, Politics-BJP, राष्ट्रीय

फर्रुखाबाद:योगी सरकार के गन्ना विकास राज्य मंत्री (स्वत्रन्त्र प्रभार) सुरेश राणा ने सपा पर निशाना साधा और कहा की सपा की अखिलेश सरकार ने कई वर्षो तक किसानो का भुगतान ही नही किया| लेकिन योगी सरकार आने के बाद प्रदेश का अन्नदाना पूरी तरह से संतुष्ट है| अधिकतर किसानो का भुगतान हो गया है|
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के द्वारा विजय दशमी पर आयोजित शास्त्र पूजन व विजय दशमीपर्व पर जहानगंज पंहुचे राज्य मंत्री सुरेश राणा ने अपनी भूमिका अदा की| इस दौरान राघवेन्द्र सिंह राजू ने कहा की एससी/एसटी का विरोध किया जायेगा| किसी को भी ग़लत तरीके से जेल जाने नही दिया जायेगा| राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह राठौर ने मंत्री से मांग करते हुए कहा है कि जनपद का नाम फर्रुखाबाद से बदलकर पांचाल नगर किया जाये|
हरदोई के सबायजपुर विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रानू ने कहा कि हमे अपने भीतर के अहंकार को मारने की जरूरत है| तभी श्रीराम को सच्ची श्रद्धा होगी| हमे अपने भीतर का रावण मारने की जरूरत है| हमे अपने समाज में फैली असमाजिकता को दूर करने की जरूरत है| महिलाओं का सम्मान करना हम सभी को आना चाहिए| भोजपुर विधायक नागेन्द्र सिंह राठौर ने क्षत्रिय भवन का निर्माण कराये जाने की घोषणा की|
,मंत्री सुरेश राणा ने कार्यक्रम में आने से पूर्व बढ़पुर के एक होटल में मीडिया से बात की| जंहा उन्होंने कहा कि पिछली सपा सरकार ने गन्ना किसानों के विषय में कुछ भी नही सोचा| वर्षो तक किसानों का भुगतान नही हुआ| लेंकिन योगी सरकार ने पहली बार गन्ना किसानो के लिये 35 लाख करोंड का वजट पास किया| जिससे प्रदेश के गन्ना किसानों को समय पर भुगतान मिल गया| कायमगंज की चीनी मिल का 99 प्रतिशत भुगतान कर दिया गया| एक प्रतिशत जो बचे है उनका जल्द हो जायेगा|
यूपी की योगी सरकार प्रदेश के किसानो के लिये कई योजना चला रही है| यूपी आवास योजना,इज्जतघर निर्माण व बिजली कनेक्शन के मामले में प्रथम स्थान पर है| उन्होंने बताया की योगी सरकार प्रयास कर रही है की आगामी 2022 तक किसानों की आय दो गुनी हो जाये| कार्यक्रम में मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रतीक चिन्ह व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया| इसके साथ ही समाज के लोगो के साथ ही जिला जेल के अधीक्षक विजय विक्रम सिंह को भी मंत्री ने प्रतीक चिन्ह देकर सम्मांनित किया| बीजेपी जिलाध्यक्ष सत्यपाल सिंह, राकेश राठौर,जिलाध्यक्ष जितेन्द्र सिंह, अवनीश कुमार तोमर, सीता भदौरिया आदि रहे|

यूपी व उत्तराखंड के पूर्व सीएम एनडी तिवारी का जन्मदिन के दिन ही निधन

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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी का निधन हो गया| नारायण दत्त तिवारी का निधन दिल्ली के मैक्स अस्पताल में हुआ| वह 93 साल के थे| एनडी तिवारी बीते एक साल से बीमार चल रहे थे| वह तीन बार उत्तरप्रदेश और एक बार उत्तराखंड के सीएम रहे| वह आंध्र प्रदेश के राज्यपाल भी रह चुके हैं| इसके अलावा वह केंद्र में वित्त और विदेश मंत्री भी रह चुके हैं. आज ही एनडी तिवारी का जन्मदिन भी था. एनडी तिवारी का जन्म 18 अक्टूबर 1925 को हुआ था और संयोगवश उनका निधन भी 18 अक्टूबर को ही हुआ. वह इकलौते ऐसे शख्स थे, जो दो राज्यों के मुख्यमंत्री पद पर रह चुके हैं. डॉक्टरों ने बताया कि एनडी तिवारी का निधन दोपहर दो बजकर 50 मिनट पर हुआ. उन्हें 26 अक्टूबर को अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती कराया गया था. वह बुखार और निमोनिया से पीड़ित थे.
कौन हैं एनडी तिवारी
एनडी तिवारी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीतिशास्त्र में एमए किया. उन्होंने एमए की परीक्षा में विश्वविद्याल में टॉप किया था. बाद में उन्होंने इसी विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री भी हासिल की. 1947 में आजादी के साल ही एनडी तिवारी इस विश्वविद्यालय में छात्र यूनियन के अध्यक्ष चुने गए. यह उनके सियासी जीवन की पहली सीढ़ी थी. आजादी के बाद 1950 में उत्तर प्रदेश के गठन और 1951-52 में प्रदेश के पहले विधानसभा चुनाव में तिवारी ने नैनीताल (उत्तर) सीट से सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर हिस्सा लिया.
1965 में कांग्रेस के टिकट पर जीते
कांग्रेस की हवा के बावजूद वे चुनाव जीत गए और पहली विधानसभा के सदस्य के तौर पर सदन में पहुंच गए. यह बेहद दिलचस्प है कि बाद के दिनों में कांग्रेस की सियासत करने वाले तिवारी की शुरुआत सोशलिस्ट पार्टी से हुई. 431 सदस्यीय विधानसभा में तब सोशलिस्ट पार्टी के 20 लोग चुनकर आए थे. कांग्रेस के साथ तिवारी का रिश्ता 1963 से शुरू हुआ. 1965 में वह कांग्रेस के टिकट पर काशीपुर विधानसभा क्षेत्र से चुने गए और पहली बार मंत्रिपरिषद में उन्हें जगह मिली. कांग्रेस के साथ उनकी पारी कई साल चली.
1976 को पहली बार सीएम बने
1968 में जवाहरलाल नेहरू युवा केंद्र की स्थापना के पीछे उनका बड़ा योगदान था. 1969 से 1971 तक वे कांग्रेस की युवा संगठन के अध्यक्ष रहे. एक जनवरी 1976 को वह पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. यह कार्यकाल बेहद संक्षिप्त था. 1977 के जयप्रकाश आंदोलन की वजह से 30 अप्रैल को उनकी सरकार को इस्तीफा देना पड़ा. तिवारी तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. वह अकेले राजनेता हैं जो दो राज्यों के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. उत्तर प्रदेश के विभाजन के बाद वे उत्तरांचल के भी मुख्यमंत्री बने. केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उन्हें याद किया जाता है.
प्रधानमंत्री पद की भी थी दावेदारी
1990 में एक वक्त ऐसा भी था जब राजीव गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री के तौर पर उनकी दावेदारी की चर्चा भी हुई. आखिरकार कांग्रेस के भीतर पीवी नरसिंह राव के नाम पर मुहर लग गई. बाद में तिवारी आंध्रप्रदेश के राज्यपाल बनाए गए, लेकिन यहां उनका कार्यकाल बेहद विवादास्पद रहा.
आपत्तिजनक वीडियो से हुई थी छीछालेदर
वर्ष 2009 में जब एनडी तिवारी आंध्र प्रदेश के राज्यपाल थे, उस दौरान उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में थे. इस पर काफी किरकिरी होने पर कांग्रेस ने एनडी तिवारी को हाशिए पर डाल दिया. तिवारी इकलौते ऐसे नेता रहे, जिन्हें दो राज्यों का मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला. यूपी से जहां तीन बार तो उत्तराखंड के पहले मुख्यमंत्री रहे.
जब बना ली थी अलग पार्टी
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष बनने के बाद से राजनीति में उतरे नारायण दत्त तिवारी ने लंबा राजनीतिक सफर तय किया. उद्योग, वाणिज्य, पेट्रोलियम और वित्त मंत्री रहने के साथ योजना आयोग के उपाध्यक्ष भी रहे. केंद्र सरकार में लंबी भूमिकाएं निभाईं. वर्ष 1995 में नाराजगी के चलते एनडी तिवारी ने कांग्रेस छोड़कर अलग पार्टी बना ली थी. हालांकि सफल न होने पर दोबारा उन्होंने घर वापसी की.
केस होने पर माना बेटा
वर्ष 2008 में रोहित शेखर ने उन्हें जैविक पिता बताते हुए कोर्ट में मुकदमा कर दिया था. जिस पर कोर्ट ने डीएनए टेस्ट कराने का आदेश दिया तो एनडी तिवारी ने अपना नमूना ही नहीं दिया. बाद में कोर्ट के आगे नतमस्तक होते हुए एनडी तिवारी ने जहां रोहित को अपना कानूनी रूप से बेटा मानते हुए संपत्ति का वारिस बनाया, वहीं उज्जवला से 88 साल की उम्र में शादी की. दरअसल उज्जवला से एनडी तिवारी के पुराने प्रेम संबंध रहे, मगर उन्होंने शादी नहीं की थी.
89 साल की उम्र में उज्ज्वला से की शादी
पितृत्व विवाद में फंसने के बाद रोहित शेखर को अपना बेटा मानने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वरिष्ठ कांग्रेस नेता नारायण दत्त तिवारी ने रोहित की मां उज्ज्वला शर्मा से विधिवत विवाह कर लिया. तिवारी के स्टाफ के एक सदस्य ने नाम उजागर न करने की शर्त पर आज यहां बताया कि 89 वर्षीय तिवारी ने लखनऊ स्थित अपने आवास पर उज्ज्वला से विधिवत विवाह कर लिया. उज्ज्वला रोहित शेखर की मां है, जिन्होंने तिवारी से पितृत्व के दावे को लेकर अदालत की लड़ाई लड़ी थी और उसमें उन्हें जीत हासिल हुई थी. उसके बाद तिवारी ने रोहित को सार्वजनिक रूप से अपना बेटा मान लिया था. पितृत्व विवाद सुलझने के बाद उज्ज्वला शुरुआती गतिरोध के बाद हाल में तिवारी के लखनउ स्थित घर में रहने लगी थीं| तिवारी तीन बार उत्तर प्रदेश के जबकि एक बार उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. वह विदेश मंत्री का पद भी संभाल चुके हैं. वर्ष 2007 से 2009 के बीच आंध्र प्रदेश के राज्यपाल भी रहे, लेकिन सेक्स स्कैंडल में फंसने के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा था.

450 वर्षों के बाद इलाहाबाद को मिला अपना पुराना नाम

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नई दिल्‍ली:संगम नगरी इलाहाबाद को 450 वर्षों के बाद आखिरकार अपना पुराना नाम वाप‍स मिल गया। कभी मुगल शासक सम्राट अकबर ने इसका नाम बदलकर प्रयागराज से इलाहाबाद (अल्‍लाहबाद) किया था। पुराणों में प्रयागराज का कई जगहों पर जिक्र मिलता है। रामचरित मानस में इलाहाबाद को प्रयागराज ही कहा गया है। कहा जाता है कि वन गमन के दौरान भगवान श्री राम प्रयाग में भारद्वाज ऋषि के आश्रम पर आए थे, जिसके बाद इसका नाम प्रयागराज पड़ा। मत्स्य पुराण में भी इसका वर्णन करते हुए लिखा गया है कि प्रयाग प्रजापति का क्षेत्र है जहां गंगा और यमुना बहती है। जिस वक्‍त भारत पर मुगलों का शासन था उस वक्‍त की भी कई किताबों और दस्‍तावेजों में इस शहर का जिक्र किया गया है। अकबर ने करीब 1574 में इस शहर में किले की नींव रखी थी। अकबर ने जब यहां पर एक नया शहर बसाया तब उसने इसका नाम बदलकर इलाहाबाद कर दिया था।
प्रयाग का पौराणिक रूप
हिन्दू मान्यता अनुसार, यहां सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने सृष्टि कार्य पूर्ण होने के बाद प्रथम यज्ञ किया था। इसी प्रथम यज्ञ के प्र और याग अर्थात यज्ञ से मिलकर प्रयाग बना और उस स्थान का नाम प्रयाग पड़ा। इस पावन नगरी के अधिष्ठाता भगवान श्री विष्णु स्वयं हैं और वे यहां माधव रूप में विराजमान हैं। भगवान के यहां बारह स्वरूप विध्यमान हैं। जिन्हें द्वादश माधव कहा जाता है। सबसे बड़े हिन्दू सम्मेलन महाकुंभ की चार स्थलियों में से एक है, शेष तीन हरिद्वार, उज्जैन एवं नासिक हैं। हिन्दू धर्मग्रन्थों में वर्णित प्रयाग स्थल पवित्रतम नदी गंगा और यमुना के संगम पर स्थित है। यहीं सरस्वती नदी गुप्त रूप से संगम में मिलती है, अतः ये त्रिवेणी संगम कहलाता है, जहां प्रत्येक बारह वर्ष में कुंभ मेला लगता है।
गुप्‍त से अंग्रेजों के हाथ आने तक
भारतवासियों के लिये प्रयाग एवं वर्तमान कौशाम्बी जिले के कुछ भाग यहां के महत्वपूर्ण क्षेत्र रहे हैं। यह क्षेत्र पूर्व में मौर एवं गुप्त साम्राज्य के अंश एवं पश्चिम से कुशान साम्राज्य का अंश रहा है। बाद में ये कन्नौज साम्राज्य में आया। 1526 में मुगल साम्राज्य के भारत पर पुनराक्रमण के बाद से इलाहाबाद मुगलों के अधीन आया। अकबर ने यहां संगम के घाट पर एक वृहत दुर्ग निर्माण करवाया था। शहर में मराठों के आक्रमण भी होते रहे थे। इसके बाद अंग्रेजों के अधिकार में आ गया। 1765 में इलाहाबाद के किले में थल-सेना के गैरीसन दुर्ग की स्थापना की थी। 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में इलाहाबाद भी सक्रिय रहा। 1904 से 1949 तक इलाहाबाद संयुक्त प्रांतों की राजधानी था।
आध्‍यात्‍म नगरी है प्रयाग
प्रयागराज या इलाहाबाद प्राचीन काल से ही आध्‍यात्‍म की नगरी के तौर पर देखा जाता रहा है। आज भी लोगों के मन में इसके लिए अपार श्रद्धा का भाव साफतौर पर दिखाई देता है। जहां तक इसका नाम बदलने का सवाल है तो इसको लेकर पूर्व में कई बार आवाज उठती रही हैं। यूपी चुनाव और लोकसभा चुनाव के दौरान भी इसके नाम बदलने को लेकर मांग उठी थी। उस वक्‍त योगी आदित्‍यनाथ ने वादा किया था कि यदि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनेगी तो इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज जरूर किया जाएगा। इस बाबत कैबिनेट का ताजा फैसला इसी वादे की पूर्ति है। हालांकि नाम बदलने के बाद इस पर भी राजनीति शुरू हो गई है।
फैजाबाद का नाम बदलने की मांग
यूपी राजस्व परिषद ने उल्लेख किया है कि प्राचीन ग्रंथों में कुल 14 प्रयाग स्थलों का वर्णन है, जिनमें से यहां के प्रयाग का नाम बदलकर इलाहाबाद किया गया, बाकी कहीं भी नाम नहीं बदला गया है। सभी प्रयागों का राजा प्रयागराज कहताला है। इलाहाबाद के बाद संत अब यह भी मांग करने लगे हैं कि फैजाबाद जिले का नाम भी अयोध्या या पौराणिक नाम साकेत पर रखा जाए। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि ऐसा सुझाव सरकार के सामने आया है। जिस पर जल्द कोई फैसला हो सकता है।
राजनीति का गढ़
देश की आजादी से पहले और बाद के कुछ वर्षों तक राजनीतिक गढ़ बना रहा है। इसका भारत की कई बड़ी हस्तियों जिसमें देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का नाम शामिल है, से सीधा संबंध रहा है। उनका बचपन यहीं पर बीता और उन्‍होंने राजनीति का ककहरा भी यहीं पर पढ़ा था। यहां ि‍स्थित आनंद भवन देश में राजनीतिक उतार-चढ़ाव का मूक गवाह आज भी है।
स्वतत्रता आन्दोलन में अहम भूमिका
भारत के स्वतत्रता आन्दोलन में भी इलाहाबाद की एक अहम भूमिका रही। राष्ट्रीय नवजागरण का उदय इलाहाबाद की भूमि पर हुआ तो गांधी युग में यह नगर प्रेरणा केन्द्र बना। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संगठन और उन्नयन में भी इस नगर का योगदान रहा है। सन 1857 के विद्रोह का नेतृत्व यहाँ पर लियाकत अली खान ने किया था। कांग्रेस पार्टी के तीन अधिवेशन यहां पर 1888, 1892 और 1910 में जार्ज यूल, व्योमेश चन्द्र बनर्जी और सर विलियम बेडरबर्न की अध्यक्षता में हुए। महारानी विक्टोरिया का 1 नवम्बर 1858 का प्रसिद्ध घोषणा पत्र यहीं स्थित ‘मिंंटो पार्क’ में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड केनिंग द्वारा पढ़ा गया था।
चंद्रशेखर आजाद यहीं हुए थे शहीद
उदारवादी व समाजवादी नेताओं के साथ-साथ इलाहाबाद क्रांतिकारियों की भी शरणस्थली रहा है। चंद्रशेखर आजाद ने यहीं पर अल्फ्रेड पार्क में 27 फ़रवरी 1931 को अंग्रेजों से लोहा लेते हुए ब्रिटिश पुलिस अध्यक्ष नॉट बाबर और पुलिस अधिकारी विशेश्वर सिंह को घायल कर कई पुलिसजनों को मार गिराया औरं अंततः ख़ुद को गोली मारकर आजीवन आजाद रहने की कसम पूरी की। 1919 के रौलेट एक्ट को सरकार द्वारा वापस न लेने पर जून, 1920 में इलाहाबाद में एक सर्वदलीय सम्मेलन हुआ, जिसमें स्कूल, कॉलेजों और अदालतों के बहिष्कार के कार्यक्रम की घोषणा हुई, इस प्रकार प्रथम असहयोग आंदोलन और ख़िलाफ़त आंदोलन की नींव भी इलाहाबाद में ही रखी गयी थी।

जज की पत्नी व बेटे को महिपाल ने इसलिए मारी थी गोली

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नई दिल्ली:गुरुग्राम में जज की पत्नी व बेटे को सुरक्षाकर्मी द्वारा गोली मारे जाने के मामला में बुधवार को SIT ने सनसनीखेज खुलासा किया है। एसआइटी की जांच में पूरी घटना का मकसद ही बदल गया है। एसआइटी के अनुसार इस गोलीकांड का धर्म परिवर्तन से कोई मतलब नहीं है। न ही महिपाल जज के परिवार से पहले से खफा था।
डीसीपी क्राइम सुमित ने बुधवार को प्रेसवार्ता कर बताया कि ये घटना त्वरित गुस्से में हुई है। महिपाल ने पहले से हत्या की प्लानिंग नहीं की थी। वह पिछले डेढ़ साल से जज के परिवार की सुरक्षा संभाल रहा है। एसआइटी टीम को पूछताछ में महिला ने बताया कि घटना वाले दिन वह जज की पत्नी व बेटे को मार्केट में छोड़कर कहीं चला गया था।
उधर खरीदारी करने के बाद जज का परिवार काफी देर तक महिपाल को तलाशता रहा, लेकिन वह नहीं मिला। महिपाल काफी देर बाद वापस आया था। इस पर उसे सरेआम काफी डांटा गया था। इसी दौरान गुस्से में आकर उसने जज की पत्नी रितु व बेटे ध्रुव को गोली मारी थी। बताया जा रहा है कि महिपाल के देरी से पहुंचने पर जज के बेटे ध्रुव ने महिपाल से काफी बदसलूकी की थी। ध्रुव द्वारा महिपाल को सार्वजनिक तौर पर थप्पड़ मारने की भी बात कही जा रही है। इसीलिए उसने अचानक इस घटना को अंजाम दिया।
डीसीपी ने बताया कि पूछताछ में महिपाल ने जज के परिवार द्वारा परेशान किए जाने की बात से भी इंकार किया है। महिपाल ने बताया है कि जज का परिवार बहुत अच्छा था। उसे खुद समझ नहीं आ रहा है कि उस दिन कैसे वह बेकाबू हो गया। महिपाल ने पहले से कोई मर्डर का प्लान नही बनाया था।
महिपाल ने नहीं किया है धर्म परिवर्तन
पुलिस का दावा है कि पूरे घटनाक्रम में धर्म परिवर्तन का कोई मामला अभी तक की जांच में सामने नहीं आया है। अभी तक की जांच में महिपाल द्वारा भी धर्म परिवर्तन करने की पुष्टि नहीं हुई है। महिपाल ने भी पूछताछ में धर्म परिवर्तन की बात से इंकार किया है। मालूम हो कि अब तक जज के परिवार पर हमले की मुख्य वजह महिपाल द्वारा उन पर इसाई धर्म अपनाने का दबाव माना जा रहा था। बताया जा रहा था कि महिपाल ने खुद भी इसाई धर्म अपना लिया था। अब वह जज के परिवार पर धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था। धर्म परिवर्तन न करने से नाराज होकर उसने इस घटना को अंजाम दिया था। पुलिस के अनुसार अभी तक की जांच में ये कहानी एकदम गलत है।
महिपाल ने शुरूआत में कुबूल लिया था जुर्म
पुलिस के अनुसार महिपाल को घटना के बाद मौके से फरार हो गया था। सूचना मिलते ही पूरे इलाके में नाकाबंदी कर दी गई थी। घटना के डेढ़ घंटे बाद ही महिपाल को गिरफ्तार कर लिया गया था। गिरफ्तार होने के बाद शुरुआत में ही उसने अपना जुर्म कुबूल लिया था।
जज ने बताया कि महिपाल को कभी दुखी नहीं किया
प्रेस कॉफ्रेंस में मौजूद डीसीपी सुलोचना गजराज व डीसीपी सुमित कुहाड़ ने बताया कि घटना के दौरान पूछताछ में जज ने भी बताया कि उन्होंने या उनके परिवार ने महिपाल को कभी दुखी नहीं किया। उसे कभी परेशान नहीं किया जाता था। वह घर के सदस्य का तरह ही था। पूरे परिवार को उस पर बहुत भरोसा था। उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि महिपाल इतना गुस्से वाला है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मामले में कोर्ट से गुजारिश की जाएगी कि महिपाल को सख्त से सख्त सजा दी जाए।
ध्रुव की स्थिति बेहद गंभीर
प्रेस कॉफ्रेंस में पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जज के घायल बेटे ध्रुव की स्थिति बेहद गंभीर है। उसका मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा है। डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर पर रखा है। डॉक्टरों की टीम उसे बचाने के लिए पूरा प्रयास कर रही है। उसकी सेहत में कोई सुधार न होने से डॉक्टर चिंतित हैं।

साइकिल से पंहुच रहा आपका विधायक-आपके द्वार!

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Posted on : 14-10-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, Politics, Politics-BJP, राष्ट्रीय

फर्रुखाबाद: सदर विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी को साइकिल से बेहद लगाव हो गया है| वह सुबह तडके रोज साइकिल चलाकर आम जनमानस से मिल उनके हाल-चाल लेकर उन्हें जादू की छप्पी भी दे रहे है| आम जन मानस विधायक को अपने दरवाजे पर अचानक पाकर खुश से झूम उठता है|
दरअसल विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी बीते कई महीनों से सुबह या तो पैदल या साइकिल लेकर सड़क पर निकल पड़ते है| साथ में उनके एक दो समर्थक के साथ ही सुरक्षा कर्मी ही रहते है| वह बाजार का भ्रमण कर कभी सब्जी वाले से हाथ मिलाते तो कही सफाई कर्मी को गले लगाते हुये मिलते है| विधायक का आम जनता के बीच जाने का यह प्रयास काफी सराहनीय साबित हो रहा है| जिससे आम जनता उनसे सीधे सड़क पर खड़े होकर सम्बाद कर रही है|
अक्सर जनप्रतिनिधियों को बड़ी गाड़ियों में जाते देखा जाता है| लेंकिन सुबह के समय सदर विधायक मेजर पूरी तेजी के साथ आपके द्वार आने के लिये निकलते है| उनके इस कार्य की काफी चर्चा आम जनमानस के बीच है| विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी ने जेएनआई को बताया कि साइकिल से स्वास्थ्य व समाज दोनों को लाभ पंहुच रहा है| साइकिल चलाने से शारीर तो स्वास्थ्य रहता है साथ ही आम जनता से मिलने का सुनहरा मौका भी मिल जाता है|

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