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वाल्मीकि समुदाय टिप्पणी मामले में टाइगर पर कार्रवाई से रोक

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मुंबई:सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म टाइगर ज़िंदा है के प्रमोशन के दौरान वाल्मीकि समुदाय के ख़िलाफ़ की गई टिप्पणी को लेकर चल रहे मामले में सलमान खान पर किसी तरह की आपराधिक कार्रवाई और जांच पर रोक लगा दी है।
आरोप था कि सलमान खान ने फिल्म एक था टाइगर के प्रचार के समय वाल्मीकि समुदाय के प्रति आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया था, जिसके बाद कई राज्यों में लोगों ने उनसे क्षुब्ध होकर एससी एसटी एक्ट के तहत उन पर कई मुकदमे दर्ज किए थे। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने सलमान खान के वकील एन एम कौल के द्वारा की गई बहस को सुनते हुए अन्य राज्यों में भी दर्ज मामलों की जानकारियां मंगाई है और तब तक के लिए मामले की सुनवाई पर स्टे लगा दिया है। गौरतलब है कि आरोप लगाया गया था कि सलमान खान के कुछ शब्दों पर वाल्मीकि समुदाय के लोगों की भावनाएं आहात हो गई थी। फिल्म एक था टाइगर, पिछले साल रिलीज़ हुई थी, जिसमें सलमान खान के साथ कटरीना कैफ ने भूमिका निभाई थी। अली अब्बास ज़फर के निर्देशन में बनी इस फिल्म के जरिये सलमान खान ने अपने फिल्मी जीवन में तीसरी बार घरेलू बॉक्स ऑफ़िस पर 300 करोड़ से अधिक का कारोबार किया।
सलमान खान को हिट एंड रन केस में भी राहत मिली जब शनिवार को वो अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एम् जी देशपांडे की अदालत में इस मामले में जमानत की सारी औपचारिकता पूरी करने के बाद वारंट रद्द कर दिया । इसी साल फरवरी में सलमान ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी डालते हुए कहा था कि वो अपनी पूर्व मैनेजर रेशमा शेट्टी की जगह अपने बॉडीगार्ड गुरमीत सिंह जॉली उर्फ़ शेरा को जमानती बनाना चाहते हैं। अदालत ने , जो की राज्य सरकार की अभिनेता को बरी किये जाने के ख़िलाफ़ दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही है , सलमान से कहा था कि वो जमानत की प्रक्रिया को पूरी करें। अदालत ने इस मामले में सलमान को पांच मार्च और 16 मार्च को दो नोटिस जारी किये थे, जिनमे से एक सलमान ने पिता सलीम खान ने रिसीव की थी। हिट एंड रन केस में बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2015 दिसंबर को सलमान को सभी आपराधिक आरोपों से ये कहते हुए बरी कर दिया था कि पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

कानून में संशोधन की तैयारी:12 साल तक के बच्चों से दुष्कर्म पर मिलेगी मौत की सजा

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नई दिल्ली:नाबालिगों से दुष्कर्म के मामले में केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक रिपोर्ट सौंपी। इसमें कहा गया है कि 0-12 साल की उम्र के बच्चों से दुष्कर्म करने के मामलों में सरकार मौत की सजा का प्रावधान करने जा रही है।
केंद्र ने रिपोर्ट के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि 0-12 साल के बच्चों से दुष्कर्म के मामले में POCSO (पाक्सो) ऐक्ट में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिससे दोषियों को अधिकतम दंड के तौर पर मौत की सजा दी जा सके। एक जनहित याचिका के जवाब में केंद्र ने यह रिपोर्ट सौंपी। मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।बता दें कि छोटे बच्चों के साथ बढ़ते दुष्कर्म के मामलों के बाद देशभर से पाक्सो एक्ट में संशोधन की मांग उठने लगी है। यहां तक की केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने भी पोक्सो एक्ट में संशोधन करने की आवाज उठाई है। कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले के बाद लोग रोष में हैं। वहीं, सूरत में 11 साल की बच्ची और एटा में 9 साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामलों ने इस मांग को और बल दिया है।

मेनका गांधी ने कहा था कि पोक्सो एक्ट में संशोधन करके इसमें फांसी की सजा का प्रावधान शामिल कर देना चाहिए। मेनका गांधी ने कहा था कि उनका मंत्रालय बच्चों के साथ दुष्कर्म के दोषियों के लिए मृत्युदंड की सजा के प्रावधान के लिए पॉक्सो एक्ट में संशोधन की मांग पर विचार कर रहा है। हालांकि तमाम विरोध और बच्चे के साथ बढ़ते दुष्कर्म के मामलों के बाद केेंंद्र सरकार ने अहम कदम उठाते हुए पोक्सो एक्ट में संशोधन करने का फैसला लिया है।

सलमान खान को 5 साल की सजा,जोधपुर सेंट्रल जेल गये

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जोधपुर:काला हिरण शिकार मामले में दोषी फिल्म अभिनेता सलमान खान को पांच साल की सजा सुनाई गई है। साथ ही कोर्ट ने उन पर 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। सलमान को जोधपुर जेल भेज दिया गया है और आज उन्‍हें जेल में ही रहना पड़ेगा। दरअसल, सलमान के वकील ने जोधपुर सेशन कोर्ट में जमानत की याचिका दायर कर दी है, जिस पर शुक्रवार को सुनवाई होगी। वहीं सबूतों के अभाव में अन्य पांच आरोपियों को बरी कर दिया गया है। सजा के समय सलमान खान की दोनों बहनें अर्पिता और अलवीरा भी उनके साथ मौजूद थीं। सजा मिलते ही दोनों बहनें रो पड़ीं। कोर्ट में सजा पर बहस के दौरान सलमान के वकील ने कोर्ट से कहा था कि कम से कम सजा दी जाए। लेकिन सरकारी वकील ने सलमान खान के लिए 6 साल की सजा की मांग की थी।
जोधपुर सेंट्रल जेल होगा मेडिकल टेस्ट
सलमान खान को 5 साल की सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया है। सलमान खान को लेकर पुलिस जोधपुर सेंट्रल जेल पहुंच गई है। वहां पर उनका मेडिकल टेस्ट कराया जाएगा। जोधपुर जेल के डीआईजी विक्रम सिंह ने कहा कि फैसले के मद्देनजर जेल में सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम किए गए हैं और सलमान खान को जेल में वही खाना दिया जाएगा, जो अन्य कैदियों को दिया जाता है।
बिश्नोई समाज खुश
अभिनेता सलमान खान को वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत दोषी करार दिया गया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि सलमान खान को हिरण के शिकार मामले में अदालत तक घसीटने वाले समूह बिश्नोई समाज के नाम से जाना जाता है। यह समाज पर्यावरण के प्रति अपनी श्रद्धा के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। इतिहास की कई कहानियों को देखें तो इस समाज के सदस्यों ने पेड़-पौधों और पशुओं की रक्षा के लिए अपनी जान तक दे दी है। सलमान खान को सजा मिलते ही बिश्नोई समाज ने खुशी जताई। बिश्नोई समाज के प्रदेश अध्यक्ष रामपाल भवाद ने कहा कि हम फैसले का अध्ययन करेंगे। इसके बाद बरी हुए आरोपियों के खिलाफ अपील करेंगे।

सलमान के अलावा ये हैं अारोपी
मालूम हो कि काला हिरण शिकार मामले में फिल्म अभिनेता सलमान खान, सैफ अली खान, अभिनेत्री नीलम, सोनाली, तब्बु व एक अन्य स्थानीय नागरिक आरोपी हैं। सलमान सहित सभी आरोपी जोधपुर में हैं। इस मामले में अंतिम बहस 28 मार्च को हुई थी। इसके बाद सीजेएम ग्रामीण देवकुमार खत्री ने इन आरोपियों पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
इसलिए जाना पड़ा जेल
सलमान खान को 5 साल की सजा सुनाई गई है। अब उन्हें सेशन कोर्ट से जमानत मिलेगी। सेशन कोर्ट में अपील दायर कर सजा सस्पेंड करानी पड़ेगी। लेकिन जब तक सेशन कोर्ट से सजा सस्पेंड नहीं होगी, तब तक जेल में रहना पड़ेगा।
-सितंबर, 1998: काले हिरण के शिकार की ये घटना हम ‘साथ-साथ हैं’ फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई। आरोप है कि सलमान खान, सैफ अली खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रे और नीलम जोधपुर के पास कांकाणी गांव गए थे और वहां इन लोगों ने दो हिरणों का शिकार किया था। हालांकि लोगों ने इन्हें देख लिया था। इसके बाद ये जिप्सी में बैठकर फरार हो गए थे। उस वक्त एक स्थानीय ट्रैवल एजेंट भी इनके साथ था।

-2 अक्टूबर,1998: इस मामले में राजस्थान के वन विभाग ने शिकायत की। जिसमें सलमान समेत सात लोगों को आरोपी बनाया गया। जिसमें सैफ अली खान, सोनाली बेंद्रे, नीलम, तब्बू, दुष्यंत सिंह औऱ दिनेश गावरे शामिल हैं।

-वहीं चार चश्मदीद के भी नाम दर्ज हुए हैं। इसमें छोगाराम, पूनमचंद, शेराराम और मांगीलाल शामिल हैं।

-9 नवंबर, 2000: सीजेएम कोर्ट ने इस मामले की संज्ञान लिया और सुनवाई शुरू हुई।

-19 फरवरी, 2006 : काले हिरण के शिकार के मामले में सभी आरोपियों पर आरोप तय किए गए। मगर डिफेंस की तरफ से सेशन कोर्ट में पुर्नविचार याचिका लगाई गई। वहीं प्रोसिक्यूशन ने हाई कोर्ट में अपील की। इसी वजह से सात साल तक ट्रायल रूका रहा।

-23 मार्च, 2013 : ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपियों पर दोबारा आरोप तय किए।

-23 मई, 2013 : सीजेएम कोर्ट में इस मामले की दोबारा सुनवाई शुरू हुई। ट्रायल के दौरान 28 गवाह बयानों से पलट गए।

-13 जनवरी, 2017 : कोर्ट में गवाही पूरी हुई।

-27 जनवरी, 2017 : सभी आरोपियों ने कोर्ट में पेश होकर अपने बयान दर्ज कराए।

-13 सितंबर, 2017 : अभियोजन पक्ष ने ट्रायल कोर्ट में अंतिम बहस शुरू की।

-28 अक्टूबर, 2017 : बचाव पक्ष की तरफ से अंतिम बहस शुरू हुई।

-24 मार्च, 2018 : ट्रायल कोर्ट में दोनों पक्षों की बहस पूरी हुई।

-28 मार्च, 2018 : काले हिरण के शिकार के मामले में ट्रायल कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा।

सुप्रीम कोर्ट का SC-ST एक्ट पर स्टे देने से इंकार

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Posted on : 03-04-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, जिला प्रशासन, राष्ट्रीय

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट से जुड़े दिए अपने फैसले में बदलाव से साफ इंकार कर दिया है। शीर्ष कोर्ट ने कहा है कि उसने एससी- एसटीएक्ट के प्रावधानों को छुआ भी नहीं है, सिर्फ तुरंत गिरफ्तार करने की पुलिस की शक्तियों पर लगाम लगायी है। इस मामले में केस दर्ज करने, मुआवजा देने के प्रावधान बिल्कुल बेअसर हैं। समीक्षा याचिका पर दस दिन बाद खुले कोर्ट में आगे सुनवाई होगी। कोर्ट ने दो दिनों से अंदर सभी पार्टियों से इस मसले पर जवाब मांगा है।
कोर्ट ने कहा है कि गिरफ्तार करने की शक्ति सीआरपीसी से आती है एससी-एसटी कानून से नहीं, हमने सिर्फ इस प्रक्रियात्मक कानून की व्याख्या की है, एससी एस्टी एक्ट की नहीं। कोर्ट ने कहा हम हंगामा नहीं चाहते। कोर्ट ने केंद्र सरकार का 20 मार्च के फैसले पर रोक लगाने से साफ मना कर दिया। एक्ट में बदलाव के विरोध पर 2 अप्रैल को हुए भारत बंद पर कोर्ट ने कहा, बाहर क्या हो रहा है हमे इससे मतलब नहीं हम सिर्फ कानून का पक्ष देखेंगे।
सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने कहा है कि वह इस ऐक्ट के खिलाफ नहीं है, लेकिन निर्दोषों को सजा नहीं मिलनी चाहिए। कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों पर तंज कसते हुए कहा है कि जो लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं उन्होंने हमारा जजमेंट पढ़ा भी नहीं है। हमें उन निर्दोष लोगों की चिंता है जो जेलों में बंद हैं। आपको बता दें कि एससी-एसटी ऐक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के संदर्भ में केंद्र सरकार ने सोमवार को पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। सरकार ने इस फैसले के खिलाफ आयोजित भारत बंद में हुई हिंसा का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से स्टे की दरख्वास्त की थी।
जस्टिस एके गोयल और जस्टिस यूयू ललित की बेंच रिव्यू पिटिशन की सुनवाई कर रही है। आपको बता दें कि एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को विरोध में दलित संगठनों ने सोमवार को भारत बंद का आह्वान किया था। भारत बंद के दौरान दलित आंदोलन हिंसक हो गया और अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है।
अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अभी की परिस्थिति काफी मुश्किल है, ये एक तरह के इमरजेंसी हालात हैं। 10 लोग अभी तक मर चुके हैं, हज़ारों-करोड़ों रुपए की संपत्ति का नुकसान हो गया है। इसलिए केंद्र सरकार की ये अपील है कि इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द होनी चाहिए।
कल सरकार ने दी थी याचिका
याचिका दाखिल करने की जानकारी केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दी थी। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकार कोर्ट के इस फैसले से समहत नहीं है। उस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधा।
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार और एनडीए सरकार दलितों के समर्थन में है। कांग्रेस पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस सरकार से सवाल कर रही है और हल्‍ला बोल रही है। कांग्रेस ने डॉ. भीम राव अंबेडकर के मरने के इतने साल बाद भारत रत्‍न दिया। उन्‍होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर की 1956 में मृत्‍यु हो गई थी लेकिन वी पी सिंह की सरकार ने उन्‍हें 1989 में भारत रत्‍न दिया।
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सबसे अधिक दलित विधायक और सांसद भाजपा के हैं। देश के प्रतिष्ठित नेता को राष्‍ट्रपति भी भाजपा की मोदी सरकार ने ही बनाया है।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी ऐक्ट के गलत इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए इसके तहत दर्ज मामलों में तत्काल गिरफ्तारी न किए जाने का आदेश दिया था। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी ऐक्ट के तहत दर्ज होने वाले केसों में अग्रिम जमानत को भी मंजूरी दे दी गई थी। जबकि मूल कानून में अग्रिम जमानत की व्यवस्था नहीं की गई है। वहीं दर्ज मामले में गिरफ्तारी से पहले डिप्टी एसपी या उससे ऊपर के रैंक का अधिकारी आरोपों की जांच करेगा और फिर कार्रवाई होगी।
कोर्ट के इस फैसले के बाद दलित संगठनों और नेताओं ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया था। आपको बता दें कि इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, थावरचंद गहलोत सहित कई सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी।

बीजेपी विधायक व पूर्व कांग्रेस विधायक का घर फूंका, कर्फ्यू लागू, तीन दर्जन हिरासत में

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नई दिल्ली: राजस्थान के करौली जिले के हिंडौन कस्बे में उग्र भीड़ द्वारा विधायक और पूर्व विधायक के घर आगजनी की घटना के बाद कस्बे में कर्फ्यू लगा दिया गया। करौली जिला कलेक्टर अभिमन्यु कुमार ने बताया कि लगभग पांच हजार लोगों की उग्र भीड़ ने वर्तमान भाजपा विधायक राजकुमारी जाटव और कांग्रेस के पूर्व विधायक भरोसी लाल जाटव के घर में आग लगा दी।
उन्होंने बताया कि आज कस्बे में पथराव और आगजनी की घटनाओं के बाद से सुबह से ही स्थिति तनावपूर्ण थी। विधायक और पूर्व विधायक के घर में आगजनी की घटना के बाद बुधवार सुबह तक के लिये कस्बे में कर्फ्यू लगा दिया गया। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) एन आर के रेड्डी ने बताया कि व्यापार मंडल और उच्च जाति के लोगों ने आज हिंडौन सिटी में जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में प्रवेश करने का प्रयास किया।
उन्होंने बताया कि भीड़ को तीतर-बितर करने के लिये पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोडे़ और रबड़ की गोलियां चलाई। करौली पुलिस अधीक्षक अनिल कायल ने बताया कि आगजनी और पथराव की घटना के बाद लगभग 40 लोगों को हिरासत में लिया गया है। ये दोनों नेता दलित समुदाय से आते हैं। मौजूदा विधायक राजकुमारी जाटव भाजपा नेता हैं, जबकि पूर्व विधायक कांग्रेस के नेता हैं। बताया जा रहा है कि इलाके में सोमवार को हुई हिंसा के जवाब में आज सुबह यहां भीड़ जमा होने लगी। धारा 144 लागू होने के बावजूद धीरे-धीरे ये संख्या 40 हजार तक पहुंच गई।
व्यापारियों का बंद
करौली जिले के हिंडौन में सोमवार को दुकान और वाहन जलाए जाने के खिलाफ व्यापारी और दूसरे समाज के लोगों ने आज बंद का आह्वान किया था। इसी दौरान बड़ी संख्या में लोग कलेक्टर को ज्ञापन देने जा रहे थे। हालात तनावपूर्ण देखते हुए इलाके में धारा 144 लागू की गई थी। लेकिन इसका उल्लंघन करते हुए बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।
बताया जा रहा है कि इसी दौरान भीड़ ने करौली से वर्तमान भाजपा विधायक राजकुमारी जाटव के घर को निशाना बनाया और आग लगा दी। इतना ही नहीं भीड़ ने पूर्व विधायक को भी नहीं बख्शा। इलाके के पूर्व कांग्रेस विधायक भरोसीलाल जाटव के घर को भी आग के हवाले कर दिया गया।
करौली में जमकर हुई थी लूटपाट
इससे पहले सोमवार को करौली के हिंडौसिटी में बंद के दौरान भारी उत्पात की खबर थी। बंद समर्थकों ने बाजारों में जमकर लूटपाट और मारपीट की थी। इससे पूरे शहर में दहशत और भय का माहौल व्याप्त हो गया। भीड़ ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर भी पथराव किया। उपद्रवियों ने कई एटीएम मशीन में भी तोड़फोड़ कर दी थी।
मॉल में लगाई आग
भीड़ ने सिर्फ दलित नेताओं को ही निशाना नहीं बनाया। बल्कि संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया। यहां एक मॉल में आग लगा दी गई. जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। कहा जा रहा है कि इस मामले में पुलिस प्रशासन की बड़ी चूक सामने आ रही है।
भारत बंद में एक की मौत
भारत बंद के दौरान राजस्थान में सोमवार को हुई हिंसा में गोली लगने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। झड़प में एक पुलिसकर्मी समेत चालीस लोग घायल हुए थे। मृतक की पहचान पवन जाटव (28) के रूप में हुई थी।
बता दें कि सोमवार (2 अप्रैल) को एससी एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के बदलाव वाले फैसले के खिलाफ दलित संगठनों ने भारत बंद बुलाया था। जिसके तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में दलितों ने धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कई जगह ट्रेन रोकी, सड़कें जाम की। राजस्थान, मध्यप्रदेश, यूपी, बिहार, उत्तर प्रदेश और पंजाब के कई शहरों से हिंसा की भी खबरें आईं।

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