Featured Posts

सवारियों के आगे रोडवेज की व्यवस्था धड़ाम,जगह नहीं मिलीसवारियों के आगे रोडवेज की व्यवस्था धड़ाम,जगह... सिकंदराबाद : बहन और भाई के त्योहार भैयादूज पर मुसाफिरों के उमड़ेे सैलाब से आगे रोडवेज की व्यवस्था की धड़ाम हो गए। मंगलवार को सुबह से लेकर शाम तक बसों की कमी के चलते मारामारी मचती रही। रोडवेज से...

Read more

बिजली गुल होने के बाद भी रोशनी से गुलजार रहेगा ककोड़, ककोड़ नगर को मिला तोहफाबिजली गुल होने के बाद भी रोशनी से गुलजार... सिकंदराबाद :  ककोड़ नगर में अब बिजली गुल होने के बावजूद अंधेरा नहीं रहेगा। ककोड़ नगर पंचायत इस बार जनता को दीपावाली की सौगात दी है। जिसके तहत अब नगर रात में रोशनी से गुलजार रहेगा।  नगर की स्ट्रीट...

Read more

नामावलियों की बढ़ी तारीख, 15 तक दाखिल होंगे दावे,दस नवंबर को अब एक ओर चलेगा विशेष अभियान नामावलियों की बढ़ी तारीख, 15 तक दाखिल होंगे... सिकंदराबाद :  निर्वाचन आयोग के निर्देश पर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की नामावलियों के विशेष पुर्नरीक्षण अभियान की तिथि आगे बढ़ा दी गई है। अब 15 नवंबर तक दावे व आपत्तियां दाखिल हो सकेगी। इसके...

Read more

सिकंद्राबाद में नगर पालिका बोर्ड की बैठक में हुआ जमकर हंगामा,घंटों चली बहस के बाद हुआ 2 करोड का प्रस्ताव पाससिकंद्राबाद में नगर पालिका बोर्ड की बैठक... सिकंद्राबाद में शनिवार को हुई बोर्ड की बैठक में सभासदों के माध्यम से लगा जनता की शिकायतों का अम्बार। एक मौहल्लें में सभासद द्वारा लगवाई गई स्ट्रीट लाईट को नगर पालिका कर्मचारियों द्वारा उतार...

Read more

सिकंदराबाद में हुआ अंहकारी रावण का अंत, मेले में उमड़ी भीड़सिकंदराबाद में हुआ अंहकारी रावण का अंत,... सिकंदराबाद : सिकंदराबाद में चौदस तिथि में बराही मेले के दौरान रावण दहन का आयोजन हुआ। श्रीराम के तीर से विशालकाय अहंकारी दशानन का पुतला धूं धूं कर जल उठा और पूरा मेला परिसर श्री राम के जयकारों से...

Read more

सिकंदराबाद में धूमधाम से मनाई गई राष्ट्रपिता की जयंती,नगर में आयोजित किए गए विभिन्न कार्यक्रमसिकंदराबाद में धूमधाम से मनाई गई राष्ट्रपिता... सिकंदराबाद :  नगर व क्षेत्र में राष्टपिता महात्मा गांधी की 144वीं जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिसमें वक्ताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन परिचय पर प्रकाश डालते हुए उनके बताए गए मार्गों...

Read more

विवेकानन्द सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता के विजेता हुए सम्मानित,काका गल्र्स कालेज में आयोजित किया गया कार्यक्रमविवेकानन्द सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता... सिकंदराबाद :  स्वामी विवेकानन्द सार्थशती आयोजन समिति के तत्वावधान में विगत दो सितम्बर को आयोजित विवेकानन्द सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता के सफल प्रतिभागिओं को कार्यक्रम आयोजित कर पुरस्कृत किया...

Read more

गर्दन तोड़ रोग ने धान किसानों को रूलाया,कृषि विभाग के खिलाफ किसानों में रोषगर्दन तोड़ रोग ने धान किसानों को रूलाया,कृषि... सिकंदराबाद : बारिश न होने की मार झेल चुके धान किसानों को अब फसल में लगे रोगों ने खूंन के आंसू रूला दिया है। किसानों के अनुसार धान की फसल में एक नहीं दो-तीन रोगों ने हमला कर दिया है जिससे गांव में लाखों...

Read more

अमन चैन की शांति के लिए एसडीएम को सौंपा ज्ञापन,एसडीएम ने दिया हर संभव मदद का भरोसाअमन चैन की शांति के लिए एसडीएम को सौंपा... सिकंदराबाद : मुजफरनगर व आस-पास के क्षेत्रों में हिसा के बाद जनपद में कुछ स्थानो पर सामप्रदायिक तनाव होने के चलते जमीयत उलेमा पदाधिकारियो ने क्षेत्र मे शान्ति व्यवस्था आर अमन बरकरार रखने के लिए...

Read more

27 रोडवेजकर्मी की संविदा समाप्त

Comments Off

Posted on : 27-09-2011 | By : HEMANT KUMAR | In : Judgement

बुलंदशहर : लंबे अरसे से नौकरी पर नहीं आए 14 चालकों और 13 परिचालकों की संविदा समाप्त कर दी गई है। उप क्षेत्रीय प्रबंधक ने कहा कि एमडी के निर्देश पर कम लोड फैक्टर के जिम्मेदार संविदा कर्मियों के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

बुलंदशहर बस अड्डे के एआरएम चक्कर सिंह ने बताया कि काफी लंबे अरसे से संविदा पर रखे गए 14 चालक और परिचालक अनुपस्थित चल रहे थे। कोई सूचना नहीं मिलने पर क्षेत्रीय प्रबंधक, गाजियाबाद के निर्देश पर इन संविदा कर्मियों की संविदा समाप्त करने की कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि रोडवेज बस अड्डे पर वर्तमान में 74 बसों के संचालन के लिए 74 नियमित चालक व 42 नियमित परिचालक हैं। संविदा के चालकों की संख्या 110 व परिचालकों की संख्या 162 रह गई है। एआरएम ने बताया कि पिछले दिनों लखनऊ में एमडी की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि 22 दिनों से अधिक समय तक लगातार अनुपस्थित रहने वाले संविदा कर्मचारियों की संविदा समाप्त कर दी जाए। उन्होंने बताया कि 50 फीसदी से कम लोड फैक्टर वाले चालकों और परिचालकों को भी दंडित करने के निर्देश मिले हैं, जिनका सख्ती से पालन किया जा रहा है।

कानून व्यवस्था को लेकर अधिवक्ताओं का बहिष्कार

Comments Off

Posted on : 14-08-2010 | By : HEMANT KUMAR | In : Judgement, समाचार

बुलंदशहर: पिछले दस दिनों से हड़ताल पर रहे अधिवक्ता सोमवार से काम पर लौट आएंगे। शुक्रवार को प्रदेश व्यापी कार्य बहिष्कार के दौरान अधिवक्ताओं ने बार सभाकक्ष में बैठक की।

डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएसन के बैनर तले जनपद के अधिवक्ता तीन अगस्त से हड़ताल पर थे। दो अगस्त को अधिवक्ता इफ्तखार खां की हत्या के बाद से सभी अधिवक्ता हड़ताल पर थे। हड़ताल में स्याना, खुर्जा, सिकंदराबाद और अनूपशहर के अधिवक्ता भी शामिल हो गए थे। लगातार हड़ताल के बावजूद पुलिस ने जब आरोपियों को पकड़ने में गंभीरता नहीं दिखाई तो एक दिन के लिए इस हड़ताल में प्रदेशभर के अधिवक्ता शामिल रहे। इस बीच पुलिस ने अधिवक्ता हत्याकांड के नामजदों में से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और शासन स्तर से बार की मांग के अनुरूप एसएसपी का स्थानांतरण कर दिया गया। अपनी जीत से उत्साहित अधिवक्ताओं ने हड़ताल को समाप्त कर सोमवार से काम पर वापस लौटने की घोषणा की है। बार सदस्यों एड. संतोष कुमार राघव, कमल सिंह लोधी, केडी शर्मा और सुरेन्द्र चौहान ने बताया कि सोमवार से विधिवत कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

अनूपशहर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चौ.रतेन्द्र सिंह ने बताया कि अनूपशहर में भी 16 अगस्त से काम शुरू करने की घोषणा की है।

अधिवक्ता 13 अगस्त को मनाएंगे विरोध दिवस

Comments Off

Posted on : 10-08-2010 | By : HEMANT KUMAR | In : Judgement, समाचार

बुलंदशहर: बुलंदशहर में अधिवक्ता की हत्या और अन्य जिलों में हो रहे उनके उत्पीड़न के विरोध में पूरे सूबे के अधिवक्ता 13 अगस्त को विरोध दिवस मनाएंगे।

बार काउंसिल उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अरुण कुमार त्रिपाठी ने बुलंदशहर सहित सभी बार एसोसिएशन को पत्र लिखा है। पत्र के अनुसार

बार कौंसिल उत्तर प्रदेश की 8 अगस्त को हुई सरकुलेशन बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव के अनुसार बुलंदशहर में अधिवक्ता इफ्तखार खां की हत्या किए जाने और और अपराधियों के गिरफ्तार न होने, जनपद गाजीपुर में वरिष्ठ अधिवक्ता को झूठे केस में एक एसडीएम के दबाव में फंसाने, जनपद औरैया में अधिवक्ताओं के साथ पुलिस द्वारा मारपीट किए जाने, जनपद सीतापुर में बिजली की मांग करने पर शासन द्वारा अधिवक्ताओं को जलील किए जाने और श्रावस्ती में वरिष्ठ अधिवक्ता ओमकार सिंह पर बदमाशों द्वारा जानलेवा हमला किए जाने के विरोध में 13 अगस्त को विरोध दिवस मनाया जाएगा।

कानून व्यवस्था के खिलाफ सड़क पर उतरा युवा रालोद

Comments Off

Posted on : 05-08-2010 | By : HEMANT KUMAR | In : Judgement, Police, समाचार

बुलंदशहर : प्रदेश में गत एक वर्ष के दौरान हत्या, लूट, डकैती, ऑनर किलिंग आदि संगीन अपराधों के ग्राफ में आई रिकार्ड तेजी के विरोध में बुधवार युवा रालोद सड़क पर उतरा। कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन एवं नारेबाजी की। बिगड़ी कानून व्यवस्था के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार बताते हुए राज्यपाल के नाम ज्ञापन प्रेषित किया।

युवा रालोद कार्यकर्ता बुधवार पूर्वाह्न 11 बजे टीचर्स कालोनी स्थित कैंप कार्यालय पर एकत्रित हुए। प्रदेश में कानून व्यवस्था पर केंद्रित बैठक की। इसके बाद बांह पर काली पट्टी बांधकर नारेबाजी करते हुए लल्लाबाबू रोड पर प्रदर्शन करते हुए प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद जुलूस की शक्ल में कलक्ट्रेट पहुंचकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन प्रशासन को सौंपा।

रालोद युवा छात्र संगठन प्रदेश महासचिव चौधरी कुंवरवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री तक पर रिमोट बम से हमले हो रहे हैं। बसपा ने सूबे में बेहतर कानून व्यवस्था के नाम पर वोट मांगे थे, लेकिन सरकार बनने के बाद कानून व्यवस्था जंगलराज में बदल गई है। जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी सरकारी खजाने को लूट रहे हैं। अपराधी बेखौफ होकर सरेआम कत्ल, अपहरण बलात्कार, लूट, डकैती और रंगदारी वसूली रहे हैं। पुलिस और प्रशासन को सब पता है कि वास्तविक अपराधी कौन हैं लेकिन जनता को भ्रमित करने के लिए अपराधियों से चूहा-बिल्ली का खेल खेला जा रहा है।

रालोद छात्र संगठन के जिलाध्यक्ष सौरभ अत्री ने कहा कि जनपद से युवा रालोद कार्यकर्ता 5 अगस्त को दिल्ली जाकर सांसद जयंत चौधरी से मिलेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग को जाग्रत होना होगा, तभी समाज का कल्याण हो सकता है।

जिला महासचिव रोहित गिरी, रोहित गिरी, अखिलेश राज, गौरव गुप्ता, आमिर खां, विजय प्रताप, विनीत, सतीश, कपिल दाहिया, विवेक, विशाल आदि उपस्थित रहे।

भारत में न्याय पाने का सफर आसान नहीं

Comments Off

Posted on : 24-06-2010 | By : HEMANT KUMAR | In : Judgement, समाचार

ठीक ही कहा गया कि न्याय मिलने में अगर देरी होती है तो वह न्याय नहीं मिलने के समान है। स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान स्वस्थ न्यायपालिका को माना जाता है, लेकिन हमारे देश की न्याय व्यवस्था इतनी लचर है कि दो-तीन पीढ़ियाँ गुजर जाती हैं, फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिल पाता है। कायदे से बदतर हालत की जिम्मेदारी लेकर सरकार को शर्म से चुल्लू भर पानी में डूबकर मर जाना चाहिए, पर ”चलता है” वाली मानसिकता उनपर पर हावी है। सरकार के सारे कल-पुर्जे बस खीसें निपोरने में ही मशगूल हैं।

हमारी लापरवाही और उदासीनता का ही नतीजा है कि आज की तारीख में सर्वोच्च न्यायलय में सैतालीस हजार याचिकाएँ लंबित हैं। उच्च न्यायलय भी इस बीमारी से अछूता नहीं है। वहाँ भी तीस लाख सत्तर हजार केस लंबित है। उस पर तुर्रा यह है कि इनमें से पाँच लाख तीस हजार याचिकाएँ तो दस सालों से लंबित हैं। निचली अदालतों में तो स्थिति और भी बेकाबू है। वहाँ तो लंबित मामलों की संख्या करोड़ों में है।

बजट का मौसम आया और चला भी गया, किंतु सरकार ने इस बार भी इस समस्या पर कोई खास तवज्जो नहीं दिया। जबकि जरुरत इस बात की थी कि न्याय देने की गति में इजाफा लाने के लिए सरकार द्वारा विशेष प्रयास किया जाता।

दरअसल, कानूनी प्रक्रिया और कानून में बदलते परिवेश के अनुसार सुधार लाने की भी जरुरत थी। पुलिस कानून में परिवर्त्तन लाकर भी इस दिशा में बदलाव लाये जा सकते थे। सुधार कार्यक्रम को एक मुहिम की तरह चलाने के लिए सरकार द्वारा आगाज की आवश्यकता थी। यदि कानून के क्षेत्र में आधारभूत ढाँचा को मजबूती प्रदान किया जाता है तो हालात अब भी बदल सकते हैं।
सभी को बिना किसी देरी के बदस्तुर न्याय मिलता रहे इसके लिए आज बीस हजार नये अदालतों की गठन की आवश्यकता है और इन अदालतों में काम करने के लिए साठ हजार न्यायधीषों की भी जरुरत है। यह तभी संभव हो पायेगा जब सरकार इस कार्य को पूरा करने के लिए अस्सी हजार करोड़ रुपये व्यय करने के लिए तैयार हो जाएगी। फिर उसके बाद हर साल एक लाख साठ हजार करोड़ रुपयों की जरुरत भी सरकार को न्यायलयनीय कारवाईयों को पूरा करने के लिए होगी।

हालांकि 13 वें वित्त आयोग ने 5000 करोड़ रुपयों का आवंटन देश के विविध राज्यों में चल रहे अदालतों में सालों से लंबित मामलों के तत्काल निष्पादन लिए किया है जोकि 2010 से 2015 के दरम्यान खर्च होना है। इस राशि का इस्तेमाल सुबह और शाम चलने वाली अदालतों के अलावा स्पेशल अदालतों में चल रहे लंबित केसों के निपटारे के लिए किया जाना है। एक अनुमान के अनुसार इस राषि से 113 मिलियन लंबित केसों का निपटारा 5 सालों के दौरान किया जा सकेगा।

इसके अलावा वैकल्पिक समस्या के समाधान के लिए 600 करोड़ रुपया दिया गया है। 100 करोड़ रुपयों का आवंटन लोक अदालतों के लिए किया गया है। 150 करोड़ रुपया वकीलों और विभिन्न न्यायलयों में काम करने वाले अधिकारियों को मुहैया करवाया गया है। 200 करोड़ रुपया कानूनी सहायता के लिए उपलब्ध करवाया गया है। 250 करोड़ रुपया न्यायधीषों के प्रशिक्षण पर खर्च किया जाएगा। 300 करोड़ रुपये जूडिशयल अकादमी को दिये जायेंगे। 150 करोड़ रुपये पी.पी.ओ को प्रशिक्षित करने में खर्च किये जायेंगे। 300 करोड़ रुपये अदालतों के प्रबंधको को दिया जाएगा, ताकि अदालती कारवाई सुचारु रुप से चलता रहे। 450 करोड़ रुपयों का प्रावधान अदालतों के रख-रखाव के लिए किया गया है।

पहले भी 11 वें वित्त आयोग ने 1734 फास्ट ट्रेक अदालतों में चल रहे लंबित मामलों के निष्पादन लिए वित्त पोशण किया था, पर पूरी राषि इन अदालतों को मुहैया ही नहीं करवाया गया और जो करवाया गया उसका भी उपयोग इन अदालतों द्वारा नहीं किया जा सका। अप्रैल 2007 में प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने मुख्यमंत्री और उच्च न्यायलयों के न्यायधीशों को संबोधित करते हुए कहा था कि 11 वें वित्त आयोग द्वारा उपलब्ध करवायी गई राशि से फास्ट ट्रेक अदालतों ने 2000 से 2005 के दरम्यान आठ लाख लंबित याचिकाओं का निपटारा किया है। जबकि नियमानुसार उपलब्ध संसाधनों से उन्हें प्रतिवर्ष पाँच लाख केसों का निपटारा करना चाहिए था।

लोक अदालत तकरीबन 10 लाख केसों का निष्पादन प्रत्येक साल करता है, पर लंबित मामलों की तुलना में निष्पादन की यह गति निःसंदेह नाकाफी है। 13 वें वित्त आयोग का लक्ष्य तो है देश के अदालतों में चल रहे लंबित मामलों को 2012 तक समाप्त करने का, लेकिन लगता नहीं है वर्त्तमान प्रावधानों और उपलब्ध संसाधनों से लंबित मामलों का निपटारा आने वाले आगामी 15 सालों में भी हो पायेगा।

सच कहा जाए तो वित्त आयोग के प्रयास स्थिति को संभालने के लिए प्रर्याप्त नहीं है। वित्त आयोग मदद तो कर सकता है, किंतु आमूल-चूल परिवर्त्तन लाने के लिए योजना आयोग और सरकार के अलावा खुद निवर्त्तमान अदालतों की तरफ से भी दो कदम आगे आने की आवश्यकता है, तभी सभी को समय से न्याय मिल पायेगा। वैसे इस प्रक्रिया में निम्नवत् उपाय भी मुफीद हो सकते हैं।
1. लंबित केसों की लिस्ट निचली से लेकर सर्वोच्च अदालत तक बनानी होगी और एक निश्चित समय पर उनकी समीक्षा भी करनी होगी, ताकि समयावधि के अंदर उनका निपटारा हो सके।
2. राष्ट्रीय विवाद नीति भी बनाने की जरुरत है। इससे राजस्व और आपराधिक विवादों में फर्क स्पष्ट रुप से दृष्टिगोचर होगा। इसके लिए निष्चित अदालतों को भी रेखांकित किया जाना चाहिए।
3. राष्ट्रीय स्तर पर जूडिशियल सेवा की स्थापना की जाए।
4. वर्त्तमान न्यायधीषों के संख्याबल में 25 से 50 फीसदी तक इजाफा किया जाना चाहिए।
5. संविदा पर न्यायधीषों की नियुक्ति की जाए।
6. अवकाश प्राप्त न्यायधीषों की सेवा ली जाए।
7. न्यायधीशों की नियुक्ति में तेजी लाया जाए।
8. उच्च न्यायलयों के न्यायधीषों की सेवानिवृति की आयु को बढ़ाया जाए।
9. लंबित मामलों का प्रबंधन कुशल प्रबंधकों के हाथों में सौंपा जाए।
10. न्यायधीश की क्षमता तय की जाए। एक न्यायधीश एक दिन में कितने केसों का निष्पादन कर सकता है, यह सुनिष्चित किया जाए।
यह भी तय करने की जरुरत है कि न्यायधीश और जनसंख्या का अनुपात क्या है ? इस कार्य को करने से हमें किस हद तक सुधार लाने की जरुरत होगी, इसका पता चल सकेगा। साथ ही इससे किस तरह के आधारभूत संरचना की जरुरत न्यायपालिका को है, इसका भी हमें अंदाजा मिल जाएगा। बीमारी की पहचान के बाद ही सही ईलाज की तरफ हम अपने कदम को बढ़ा सकते हैं।

न्याय के मंदिर पर जितना भरोसा आम आदमी का बढ़ेगा केसों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़ेगी और फिर उनके समाधान के लिए करोड़ों-अरबों रुपयों और कुशल प्रबंधन की जरुरत होगी।
आर्थिक बदहाली और संसाधनों के संक्रमण के दौर में न्याय के कार्य को विकेन्द्रित करके लंबित मामलों में कुछ हद तक कमी लाई जा सकती है। इस दिशा में लोक अदालत, महिला अदालत, मोबाईल अदालत और फास्ट ट्रेक अदालत फायदेमंद हो सकते हैं।