जहरीली शराब पीने से अब तक सहारनपुर में 61 की मौत

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JNI NEWS : 09-02-2019 | By : JNI-Desk | In : CRIME, FARRUKHABAD NEWS, POLICE, सामाजिक

सहारनपुर:गांव-गांव धधक रहीं देशी शराब की भट्टियों ने कल सहारनपुर में अपना रंग दिखाया है। जहरीली शराब कांड में मौतों का सिलसिला लगातार जारी है। सुबह 11 बजे तक मृतक संख्या 52 तक पहुंच गई है। कई की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।
पोस्टमार्टम के बाद शव जैसे ही गांव पहुंच रहे हैं घरों में कोहराम मच रहा है। जहरीली शराब कांड को 24 घंटे से अधिक बीत चुके है। मृतकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। 11 बजे तक यह आंकड़ा 52 तक पहुंच गई और बढ़ने के आसार बने हुए हैं। अस्पतालों में पीड़ित लोगों के भर्ती होने की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। डीएम आलोक पांडेय व एसएसपी दिनेश कुमार पी अस्पताल में ही जमे है।
उधर, मृतकों के अंतिम संस्कार शुरू कर दिए गए हैं। गांव सलेमपुर में पांच लोगों का अंतिम संस्कार कर दिया गया, जबकि खेड़ा मुगल में तैयारी चल रही है। यहां श्मशान घाट की जगह पर अवैध कब्जे को लेकर लोगों में आपस में कहासुनी भी हुई, लेकिन एसडीएम ने पहुंच कर मामला शांत कराया। दर्जनभर गांवों में मातम पसरा हुआ है। गांव शरबतपुर में पांचों लोगों का शुक्रवार देर रात अंतिम संस्कार कर दिया गया। इतनी बढ़ी घटना होने के बावजूद सरकार का कोई नुमाइंदा मौके पर या अस्पताल नहीं पहुंचा है। लोगों में इस बात को लकर रोष व्याप्त है। जिला प्रशासन ने अब तक 46 लोगों की मौत की पुष्टि तो की है लेकिन दावा किया जा रहा है कि शराब से 36 लोगों की ही मौत हुई है। एक दिन पूर्व भी जिला प्रशासन मौतों को लेकर लीपापोती में जुटा रहा था। मेरठ मेडिकल कालेज में भर्ती कई लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। यहां 18 लोगों की मौत हो चुकी है।
मेरठ मेडिकल कालेज में भर्ती सहारनपुर शराब पीडि़तों में चार की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। यहां पर कुल 25 लोगों को भर्ती कराया गया था जिनमें से 13 की रात में मौत हो चुकी थी। यहां भर्ती 12 में चार की हालत नाजुक बनी हुई है। जहरीली शराब प्रकरण में अब तक कुल 52 लोगों की मौत हो चुकी है। मेरठ मेडिकल के साथ ही सहारनपुर के कई अस्पतालों में शराब पीडि़तों का इलाज चल रहा है।
तेरहवीं के मृत्यु भोज में परोसी गई शराब से कल 12 गांवों के 36 लोगों की मृत्यु हो गई। इसके बाद देर रात तक इनकी संख्या बढ़ती ही गई। तड़के तक 44 लोगों की मौत हो गई थी। अभी भी एक दर्जन की हालत गंभीर बनी है। दिल दहला देने वाली इस घटना से उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश का पूरा सिस्टम हिल गया। आइजी शरद सचान और मंडलायुक्त सीपी त्रिपाठी पहले जिला अस्पताल, इसके बाद प्रभावित गांवों में पहुंचे। मृतकों में ज्यादातर लोग दलित समाज से हैं। पुलिस ने अपनी ओर से गागलहेड़ी और नागल थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
सहारनपुर में कल सुबह थाना नागल के गांव उमाही में कई घरों में कोहराम मच गया। यहां ग्रामीण रोते-बिलखते परिजनों के पास पहुंचे तो पता चला कि जहरीली शराब पीने से सात लोगों की मौत हो गई। इसके बाद गांव पहुंचे डीएम-एसएसपी मौका मुआयना कर ही रहे थे कि कुछ ही देर में मालूम पड़ा कि इसी क्षेत्र के गांव सलेमपुर में भी जहरीली शराब से पांच तो ताजपुरा में तीन ग्रामीणों की मौत हो गई। शवों की गिनती की जा रही थी कि थाना गागलहेड़ी क्षेत्र के गांव शरबतपुर से तीन, गांव माली से दो तथा गांव कोलकी कलां में चार ग्रामीणों के मौत की खबर और आ गई। शाम होते-होते थाना देवबंद के गांव डंकोवाला में दो, बिलासपुर, शिवपुर, आसनवाली व मायाहेड़ी से भी एक-एक ग्रामीण के मरने की सूचना पुख्ता हो गई। कुछ ही देर में खेड़ा मुगल के चार लोगों की मौत की खबर ने अधिकारियों के पैरों तले की जमीन खिसका दी।
भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर ने कहा, डीएम-कप्तान पर लगे रासुका
दोपहर करीब 12 बजे भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर जिला अस्पताल पहुंचे और वहां भर्ती शराब पीडि़तों का हाल जाना। सीएम के मृतकआश्रितों को दो लाख मुआवजे को नाकाफी बताते हुए कहा कि कम से कम 25 लाख मुआवजा मिलना चाहिए। चंद्रशेखर ने कहा कि शराब कांड के लिए डीएम और एसएसपी पर रासुका के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। चंद्रशेखर ने जिला प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। देशी शराब के जहरीली होने के कारण यहां के एक दर्जन गांव में बीते 24 घंटे में 52 लोगों की मौत हो गई है। अभी भी 24 लोगों का मेरठ के साथ सहारनपुर में इलाज चल रहा है। इनमें भी एक दर्जन से अधिक की हालत गंभीर बनी है।
मंदिर-मस्जिद से कराया एलान
जिला प्रशासन ने मंदिर-मस्जिद से अवैध शराब न पीने का एलान कराया। कहा, किसी के पास शराब है तो पुलिस के सुपुर्द कर दें या नष्ट कर दें।
इन पर गिरी गाज
जिला आबकारी अधिकारी अजय कुमार, थाना प्रभारी नागल हरीश राजपूत, दस पुलिसकर्मी और आबकारी के दो सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया।
तेरहवीं में परोसी गई थी शराब
एसएसपी दिनेश कुमार पी ने बताया कि हरिद्वार के थाना झबरेड़ा के गांव बालूपुर में ज्ञान सिंह के बड़े भाई की तेरहवीं में शराब परोसी गई थी। इसी के पीने से मौत हो रही है। तहरीर आने के बाद रिपोर्ट दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पिंटू द्वारा शराब लाना बताया जा रहा है। उसकी भी शराब पीने से मौत हो गई।
देवबंद में 2009 में जहरीली शराब से हुई थीं 49 मौत
शराब पीने से हुई मौतों से प्रशासन में हड़कंप मचा है। देवबंद क्षेत्र में वर्ष 2009 में भी ऐसा ही भयानक हादसा हुआ था। इसमें 49 लोगों ने जहरीली शराब पीने से दम तोड़ दिया था। मौतों का यह सिलसिला जड़ौदा जट्ट गांव से शुरू हुआ था। जड़ौदा जट्ट में हुई मौतों के बाद यह सिलसिला देखते ही देखते क्षेत्र के गांवों घलौली, डेहरा, खजूरी, लबकरी, अंबेहटा शेखां, तल्हेड़ी बुजुर्ग, गंदासपुर जट्ट, भायला आदि कई गांवों तक पहुंचा और दर्जनों लोग अकाल मौत के मुंह में समा गए। इतना ही नहीं नगर के मोहल्ला मटकोटा और मोहल्ला कोटला में भी जहरीली शराब से मौतें हुई थी।
इस भयावह घटना में जड़ौदा जट्ट में नौ, खजूरी में 11 मौतें, तल्हेड़ी बुजुर्ग में दो, गंगदासपुर जट्ट में तीन, लबकरी में नौ और भायला में तीन मौतों समेत कुल 49 लोग अकाल मौत के गाल में समा गए थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे। इस मामले में आबकारी और पुलिस विभाग के 10 अधिकारियों को निलंबित किया गया था और शराब कांड में आरोपितों अवैध शराब गिरोह के सरगना इस्लाम समेत मनोज, चुग्गा, रतिराम, अम्बरीश त्यागी, ओमबीर, नेत्रपाल व मदन को न्यायालय सजा सुना चुका है। कई को दोषमुक्त भी किया गया।
उत्तर प्रदेश में बड़ा नेटवर्क
इस घटना के सामने के आने के बाद ऐसा लग रहा है कि जहरीली शराब बनाने वालों का नेटवर्क पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ है। यह सब कुछ पुलिस की नाक के नीचे हो रहा है। जहरीली शराब जिस जगह पर बनाई जाती है कि उसकी गंध दूर-दूर तक जाती है। जब राज्य में अखिलेश यादव की सरकार थी तो उन्नाव और लखनऊ में जहरीली शराब पीने से 33 लोगों की मौत हो गई थी। उसके बाद सरकार और प्रशासन की ओर से बड़े-बड़े दावे किए गए थे और आदेश दिया गया था कि जिस इलाके में जहरीली शराब पाई गई वहां के पुलिस थाने के अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
अब उत्तर प्रदेश में सरकार बदल गई है लेकिन ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं। इससे जाहिर होता है कि जहरीली शराब का यह पूरा नेटवर्क बिना प्रशासन की मिलीभगत के नहीं चल सकता है। बीते साल के मई के महीने में उत्तर प्रदेश के कानपुर और कानपुर देहात में जहरीली शराब पीने से दस लोगों की मौत हो हुई थी। इस घटना के बाद से शराब दुकान मालिक के खिलाफ केस दर्ज कर दुकान को सील कर दिया गया था। इसी तरह बीते वर्ष जनवरी में बाराबंकी में जहरीली शराब पीने से नौ लोगों की मौत हो गई थी।

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