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खेतों पर गये युवक की गोली मारकर हत्या

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Posted on : 21-11-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS

फर्रुखाबाद:(मेरापुर) पूर्व प्रधान के पुत्र के साथ खेत पर गए युवक की भूमि विवाद की रंजिश में गोली मारकर हत्या कर दी गई| घटना की सूचना मिलने पर भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया| पुलिस ने आरोपियों की तलाश तेज कर दी है|
थाना क्षेत्र के ग्राम नगला सबल सिमतुईया निवासी 30 वर्षीय जितेंद्र उर्फ रसाल सिंह यादव पुत्र मिलाप सिंह बुधवार की देर शाम तकरीबन 8:00 बजे अपने खेतों की तरफ परिवार के ही पूर्व प्रधान कोतवाल सिंह के पुत्र गौरव को साथ लेकर गया था| उसी दौरान आरोपियों ने रसाल सिंह को घेर लिया ताबड़तोड़ फायरिंग से रसाल सिंह की मौके पर ही दर्दनाक हत्या कर दी गई |मौका देखकर गौरव फरार हो गया पता चला है कि बीते दिन भी दोनों पक्षों में विवाद हुआ था घटना पर प्रभारी निरीक्षक मेरापुर सुदीप मिश्रा नवाबगंज प्रभारी निरीक्षक रविंद्र सिंह यादव आदि फ़ोर्स के साथ मौके पर आ गया|

दुनिया की सबसे खतरनाक जनजाति के कब्जे में भारत का प्रतिबंधित मौत का टापू

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नई दिल्ली:भारत के अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में मौजूद उत्तरी सेंटिनल द्वीप, दुनिया के लिए आज भी एक रहस्य है। इसे दुनिया के सबसे खतरनाक टापू में गिना जाता है। कहा जाता है कि आज तक जिस भी बाहरी व्यक्ति ने इस टापू पर पैर रखने का प्रयास किया, वह जिंदा नहीं लौटा। भारत में एंडवेंचर ट्रिप पर आया एक अमेरिकी नागरिक जॉन एलन दिन पांच दिन पहले कुछ मछुआरों के साथ दक्षिणी अंडमान के उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर गया था। वहां उसकी हत्या कर दी गई। इसके बाद से एक बार फिर ये भारतीय द्वीप दुनिया में चर्चा का विषय बन चुका है।
भारत का नार्थ सेंटीनल आइलैंड इतना खतरनाक है कि इसे मौत का टापू भी कहते हैं। इस टापू पर एक बेहद खतरनाक आदिवासी जनजाति रहती हैं, जिन्हें सेंटिनेलिस कहा जाता है। ये टापू इतना खतरनाक है कि भारत सरकार ने इसे प्रतिबंधित कर रखा है। बंगाल की खाड़ी में चारों तरफ समुद्र से घिरे इस भारतीय टापू का हवाई नजारा बेहद खूबसूरत है। बावजूद यहां जाने के लिए आज तक कोई रास्ता नहीं है। केवल समुद्री मार्ग से ही यहां पहुंच सकते हैं।
पत्थर, तीर और आग के गोलों से करते हैं स्वागत
बताया जाता है कि इस टापू पर एक बेहद खतरनाक जनजाति रहती है, जिसने आधुनिक सभ्यता को पूरी तरह से नकार दिया है। भारत समेत पूरी दुनिया से इनका संपर्क जीरो है। बताया जाता है कि इस समुदाय के लोग, दूसरी दुनिया के लोगों से हमेशा हिंसक तरीके से ही मिले। ये लोग आसमान में नीचे उड़ने वाले हवाई जहाज या हैलिकॉप्टर का स्वागत तीरों, पत्थरों या आग के गोलों से करते हैं।
2006 में मछुआरों की हत्या की थी
ये टापू इतना खतरनाक है कि समुद्र में दूर तक जाने वाले मछुआरे भी इस टापू पर गलती से नहीं आते हैं। खबरों के अनुसार वर्ष 2006 में कुछ मछुआरे इस आइलैंड पर गलती से पहुंच गए थे। उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इससे पहले भी ये लोग टापू पर आने वाले कई लोगों के साथ जानलेवा हिंसा कर चुके हैं। काफी साल पहले इस आइलैंड पर एक कैदी जेल से भागकर पहुंच गया था। आदिवासियों ने उसे भी मार दिया था। ये लोग तीर चलाने में माहिर हैं।
लॉस्ट ट्राइब हैं ये
ये जनजाति देश-दुनिया से इस कदर कटी हुई है कि इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। किसी को नहीं पता कि इस समुदाय का व्यवहार, रिति-रिवाज, भाषा और रहन-सहन कैसा है। कहा जाता है कि ये जनजाति करीब 60 हजार सालों से यहां रह रही है। इन्हें लॉस्ट ट्राइब यानि ऐसी खोई हुई जनजाति जिसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं है। कुछ रिपोर्टों में इसे सबसे अलग-थलग रहने वाली जनजाति करार दिया गया है। इन्हें किसी तरह की दखलअंदाजी पसंद नहीं है और इनका मानव सभ्यता से कोई लेनादेना नहीं है।
भारत सरकार भी यहां हस्तक्षेप की हिम्मत नहीं करती
अब तक जितने भी लोगों ने इन तक पहुंचने का प्रयास किया और इन्हें मुख्य धारा से जोड़ना चाहा, उन्हें भी इन लोगों ने मार दिया। इस टापू पर रहने वाले आदिवासी इतने खतरना हैं कि भारत सरकार भी यहां हस्तक्षेप की हिम्मत नहीं जुटा पाती है। 2004 में आयी भयंकर सुनामी के चलते अंडमान द्वीप तबाह हो गए थे। ये द्वीप भी अंडमान द्वीपों की श्रृंखला का एक हिस्सा है। भारत सरकार ने तूफान के तीन दिन बाद इन लोगों की खोज-खबर लेने के लिए सेना के एक हैलिकॉप्टर ने आइलैंड के ऊपर उड़ान भरी। जनजाति ने उस पर पत्थर और तीरों की बरसात कर दी।
1991 में भारत सरकार ने किया प्रतिबंधित
1967 से 1991 के बीच भारत सरकार ने यहां के लोगों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए उनसे संपर्क करने का काफी प्रयास किया। लेकिन टापू के लोगों की आक्रामकता की वजह से वह अपना संदेश वहां नहीं पहुंचा सके। 91 के बाद से भारत की तरह से ऐसा की प्रयास नहीं किया। सरकार ने इस इलाके को एक्सक्लूसन जोन घोषित कर यहां किसी बाहरी शख्स के प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इनकी जनसंख्या कितनी है ये भी किसी को नहीं पता।
खेती नहीं करते, शिकार पर निर्भर
इन्होंने आज तक अपनी जमीन पर किसी बाहरी व्यक्ति को पैर रखने नहीं दिया है। इसलिए उनकी ढंग की फोटो भी उपलब्ध नहीं हैं। इनकी जो भी तस्वीर व वीडियो हैं, वह बहुत दूरी से ली गई हैं। ये दिखते कैसे हैं, ये भी रहस्य बना हुआ है। ये जनजाति इतनी पिछड़ी हुई है कि आज भी इन्हें खेती करना नहीं आता। पूरे इलाके में घने जंगल हैं। इससे अनुमान लगाया जाता है कि यहां के लोग जंगली जानवरों के शिकार और जंगल के फल खाकर पेट भरते हैं।
एक मुसाफिर की नाव पर किया था हमला
1981 में एक मुसाफिर ने इस आइलैंड के बारे में बताया था। वो अपनी नाव पर साथियों के साथ भटकते हुए इस आइलैंड के करीब पहुंच गया था। उन्होंने किनारे पर ट्राइब के कुछ लोगों को तीर कमान व भाले लेकर खड़ा देखा। नजदीक पहुंचते ही उन्होंने हमला शुरू कर दिया। ये लोग तब टापू से कुछ दूरी पर थे, लिहाजा किसी तरह वह वहां से भाग निकले।
ग्रेट अंडमानी
इनमें यहां पर रहने वाले दस अलग-अलग समुदाय शामिल है। यह अंडमान में रहते हैं। 1788-89 में पहली बार यहां पर अंग्रेजों ने यहां पर इस समुदाय के लोगों की गिनती की थी। उस वक्‍त इनकी संख्‍या करीब 6000-8000 थी। यही वजह थी उस वक्‍त अंग्रेज पर इस अपना अधिपत्‍य हासिल नहीं कर सके थे। लेकिन 1859 में अंग्रेजों ने पोर्ट ब्‍लेयर पर अधिकार प्राप्‍त कर लिया। इस दौरान उनकी ग्रेट अंडमानी लोगों से काफी कड़ा संघर्ष चला जिसको इतिहास में द अबेरदिन वार के नाम से जाना जाता है। 1901 में इनकी संख्‍या 625 थी।
ओंगे
छोटा अंडमान के डूगोंग क्रीक के पास रहने वाली यह जनजाति भी अन्‍य आदिवासी समुदायों की ही तरह जल और जंगल पर टिकी है। इनकी आबादी करीब एक हजार तक है। बदलते दौर में इस समुदाय में भी कुछ बदलाव की झलक देखने को मिली है और यह बाहरी लोगों के लिए खूंखार साबित नहीं होते हैं।
जारवा
इस समुदाय की आबादी करीब 400 तक बताई जाती है। अंडमान द्वीप पर रहने वाली यह जनजाति बाहरी लोगों से बिल्‍कुल कटी हुई रहती है। यह आबादी अपने लिए पूरी तरह से जंगलों और समुद्र पर निर्भर है। यह समुदाय पूरी तरह से नग्‍न रहता है। समुद्र से प्राप्‍त सीपियों और अन्‍य पत्‍थरों से बनी माला इनका आभूषण होती है। पहले ये दक्षिण-पूर्वी अंडमान मे रहते थे लेकिन अंग्रेजों की वजह से यह इस द्वीप के पश्चिम में चले गए थे। 1990 में यहां पर जीटी रोड बनने के बाद कुछ बदलाव जरूर आया है।
सेंटिनेलिस
इन तक पहुंचना लगभग नामुमकिन होता है। इस द्वीप समूह पर रहने वाला यह समुदाय पूरी दुनिया से अलग-थलग रहना पसंद करता है। 1967 में पहली बार सरकार ने इनसे संपर्क साधने की कोशिश की थी। इसके लिए उन्‍हें खाना, नारियल आदि चीजों को देने की कोशिश की गई थी, लेकिन आदिवासियों के नाराज होने की वजह से योजना सफल नहीं हो सकी। इतना ही नहीं वर्ष 2006 में इन लोगों ने दो मछुआरों को इसलिए मार गिराया था क्‍योंकि यह इनके टापू के निकट मछली पकड़ने पहुंचे थे।

अकीदत के साथ मनायी गयी हुजूर की आमद

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Posted on : 21-11-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, धार्मिक, सामाजिक

फर्रुखाबाद:जनपद में विभिन्य जगहों पर पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम के यौमे पैदाइश का पर्व अकीदत के साथ बुधवार को मनाया गया। इस मौके पर जगह-जगह मोहम्मदी जुलूस निकाला गया। शहर में सभी बाजार से थाना चौक होते हुए जुलूस विभिन्न मांर्गों का भ्रमण किया। जुलुस सीरत कमेटी के द्वारा निकाला गया|
वहीं नगर के साथ ही साथ कमालगंज, कंपिल में शांतिपूर्ण ढंग से मोहम्मद साहब के जन्मदिन पर जुलूस-ए-मुहम्मदी निकाला गया।मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा मस्जिद में सुबह नमाज अता करने के बाद विशाल जुलूस निकाला| जुलूस में वृद्ध जनों के साथ साथ महिला, पुरुष और युवाओं ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया| ईद मिलादुन्नबी का पर्व पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है| जानकारी देते हुए मुस्लिम समुदाय के सदस्य शकील ने बताया कि जयंती के एक दिन पूर्व मस्जिद में कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. इसके बाद दूसरे दिन सुबह मस्जिद में जाकर नमाज अता की जाती है| बुधवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा भव्य जुलूस निकाला गया| वहीं जुलूस में लगाए जा रहे अल्लाह हो अकबर के नारे से सारा शहर गूंज उठा| नगर में जुलुस टाउन हाल से अंजुमन स्कूल तक गया|

अरविन्द हत्याकांड: चप्पलों के आस-पास घूम रही पुलिस की जाँच

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Posted on : 21-11-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, जिला प्रशासन, सामाजिक

फर्रुखाबाद:(राजेपुर)बीते दिन अरविन्द की ईंट से कुचलकर हत्या कर दी गयी थी| पुलिस अभी फ़िलहाल किसी नतीजे पर नही पंहुची| कई घंटे तक स्वाट टीम ने घटना पर जाकर जाँच पड़ताल की | मोबाइल सर्विलांस पर लगाकर भी घटना का खुलासा करने का प्रयास किया गया|
बीती 19 नवम्बर की रात राजेपुर के कस्बा निवासी 35 वर्षीय अरविन्द पुत्र भूरे सिंह ईंट पत्थर से कुचलकर हत्या कर दी गयी थी| अरविन्द की माँ मीना देवी ने गाँव के ही रामवीर पुत्र नबाब, नरेश पुत्र रघुवीर, राघवेन्द्र पुत्र नरेश छोटू पुत्र नरेश के खिलाफ हत्या करने का मुकदमा दर्ज कराया था| पुलिस ने बीते दिन ही शव का पोस्टमार्टम कराया था| सूत्रों ने बताया की पोस्टमार्टम में अरविन्द के चेहरे व सिर पर चोटों के गम्भीर चोटों के निशान थे| पुलिस ने फ़िलहाल एक आरोपी राघवेन्द्र को दबोच लिया| लेकिन अभी जाँच कर रही है|
बुधवार को स्वाट टीम प्रभारी कुलदीप दीक्षित अपनी टीम के साथ मृतक के अमृतपुर राजपुर स्थित शराब ठेके की जाँच करने के साथ ही कैंटीन संचालक राम रहिस व भतीजे सौरभ व देवेन्द्र सिंह से लगभग एक घंटे तक पूंछतांछ की| पुलिस को मौके पर चप्पले हरे रंग के मिली| पुलिस अभी तक किसी नतीजे पर नही पंहुची है| पुलिस जाँच पड़ताल कर रही है|
घंटो चली पंचायत के बाद भी नहीं निपटा विवाद
राजेपुर: तहसील दिवस में प्रार्थना पत्र देकर चकरोड के विवाद की शिकायत की गयी थी| विवाद प्रधान व रामजानकी मन्दिर तुसौर के पुजारी बाबा कृष्ण दास के बीच चल रहा है| जिसके चलते एसडीएम अमृतपुर ईशान प्रताप सिंह मौके पर जाकर विवाद निपटाने का प्रयास किया| लेकिन बात नही बनी| विवाद समाप्त नही हो सका| इस्पेक्टर राजेपुर राकेश कुमार,लेखपाल मनोज दीक्षित आदि रहे|

बीएएम को बर्खास्त करने पर भडके स्वास्थ्य कर्मी

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Posted on : 21-11-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, जिला प्रशासन, सामाजिक

फर्रुखाबाद: बीएएम को बर्खास्त करने पर उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ भडक गया| संगठन ने आपातकालीन बैठक बुलाकर जिला प्रशासन को चेतावनी दी|
शहर के आवास विकास स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल के आयुष विभाग में आहूत की गई बैठक में कहा गया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नवाबगंज में तैनात बीएएम नायाब खान को अकारण षड्यंत्र के तहत नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया| जिस पर संगठन द्वारा बैठक कर संविदा कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन किया| इसके साथ ही स्वास्थ्य कर्मी को वापस नौकरी पर ना लेने पर आंदोलन करने का निर्णय लिया गया| संगठन के अध्यक्ष डॉक्टर गौरव वर्मा व महामंत्री नरेंद्र मिश्रा ने बताया कि पूर्वाग्रह के कारण नायाब खान की संविदा समाप्ति का मामला न्याय संगत नहीं है इसका संगठन पूरी तरह से विरोध करता है| संगठन ने चेतावनी दी है कि 2 दिन के भीतर यदि मांग पूरी नहीं हुई तो जिले भर के स्वास्थ संविदा कर्मी धरना प्रदर्शन और आंदोलन पर बाध्य होंगे| अंकित पोरवाल, अंकित दीक्षित, सौरभ, प्रदीप, जनक सिंह, सतेंद्र पाल व साबिर हुसैन आदि रहे|

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