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हाई-वे के निकट मारुती शोरुम के ताले तोड़कर लाखों की चोरीहाई-वे के निकट मारुती शोरुम के ताले तोड़कर लाखों की चोरी फर्रुखाबाद:बीती रात हाई-वे पर स्थित मारुती शोरुम का ताला तोड़कर लाखों की नकदी चोरी कर ली गयी| पुलिस ने जाँच पड़ताल के बाद शोरूम के कैशियर सहित तीन को हिरासत में ले लिया| कोतवाली फतेहगढ़ क्षेत्र के इटावा-बरेली हाई-वे पर नेकपुर पुल के मारुती का शोरुम है| बीती रात उसमे तिजोरी से...

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सोशल मीडिया पर अपने नेता का प्रचार,दावेदारों के समर्थकों में टकरारसोशल मीडिया पर अपने नेता का प्रचार,दावेदारों के समर्थकों... फर्रुखाबाद:(दीपक-शुक्ला)सोशल मीडिया फेसबुक व व्हाट्सएप पर इन दिनों सपा,भाजपा,बसपा व कांग्रेस के दावेदारों के समर्थकों में जमकर रायता फैलाया जा रहा है| समर्थक सोशल मीडिया पर पोलिंग करा रहे है| जिसके जादा लाइक उसे बेहतर प्रत्याशी माना जा रहा है| पुराने फोटो लाकर उसे नई तरह...

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फर्रुखाबाद में फूटा सडकों पर गुस्सा,जगह-जगह से एक आबाज पाकिस्तान मुर्दाबादफर्रुखाबाद में फूटा सडकों पर गुस्सा,जगह-जगह से एक आबाज पाकिस्तान... फर्रुखाबाद: जनपद में शुक्रवार सुबह से लेकर शाम तक केबल पाक के खिलाफ आक्रोश ही सडकों पर नजर आया| शाम तक में कई जगहों पर पुलवामा आतंकी हमले पर लोगों का आक्रोश दिखा। लोगों ने जमकर पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए। कई स्थानों पर पाकिस्तान के पीएम का पुतला जलाया गया। पुलवामा...

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वैलेंटाइन डे: फूलों की जुबाँ से कही गयी दिल की बातवैलेंटाइन डे: फूलों की जुबाँ से कही गयी दिल की बात फर्रुखाबाद:प्यार के इजहार के प्रेम दिवस पर फूल के बाजार सजे रहे| वेलेंटाइन डे पर फूलों की दुकानों पर व बाजारों में गुरुवार की सुबह से ही चहल कदमी दिखी। फूल विक्रेता कोलकाता व लखनऊ से गुलाब की भारी खेप मंगायी थी| बाजार में दिल की बात रखने के लिए कई तरह के गुलाब खास तौर पर मंगवाए...

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61 बंदियों के साथ रिहा हुए शिव और अली ने पेश की गंगा-जमुनी तहजीब61 बंदियों के साथ रिहा हुए शिव और अली ने पेश की गंगा-जमुनी तहजीब फर्रुखाबाद:शासन के फरमान के बाद जेल से बन्दियो के रिहा होने का सिलसिला लगातार जारी है| अभी तक कुल 65 बंदियों को रिहा किया गया था| बुधवार शाम कुल 14 जिलों के 61 और बंदियों की सेन्ट्रल जेल से रिहाई कर दी गयी| इस दौरान जेल से रिहा हुए बंदी शिवबालक व अरबी अली ने एक दूसरे के गले मिल गंगा-जमुनी...

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श्रीरामचंद्र की बारात देखने को उमड़ी भीड़

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Posted on : 25-10-2018 | By : JNI-Desk | In : CRIME, FARRUKHABAD NEWS, POLICE

फर्रुखाबाद:(राजेपुर)विकास खंड के मुस्लिम बाहुल्य गाँव अलीगढ़ में तकरीबन एक शताब्दी पूर्व से लगातार जय श्रीराम-जय हनुमान के जयकारे लगते चले आ रहे| लेकिन वर्ष गुजर जाने के बाद आज तक हिन्दू मुसलमानों में किसी भी तरह का मन मुटाव नही हुआ| गाँव के लोग ही रामलीला का मंचन करते है| और सभी एक साथ मिल बैठकर रामलीला का लुफ्त उठाते है| इसी क्रम में रामबारात का आयोजन हुआ जिसमे बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ी|
पुराने जानकार बताते है की वर्ष 1914 में रामलीला का मंचन शुरू हुआ| तभी से चली आ रही रामलीला आज भी जारी है| गुरुवार को अलीगढ़ में रामलीला के दौरान रामबारात निकाली गयी| बारात को पूर्व लोक सभा प्रत्याशी सचिन यादव ने फीता काटकर एवं श्रीगणेश की आरती व पूजा अर्चना कर शोभायात्रा को रवाना किया|
शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंहुचे| सड़क के दोनों तरफ शोभायात्रा देखने को भीड़ उमड़ी| इस दौरान अलीगढ़ के प्रधान सुशील कुमार ने भी गणेश की पूजा अर्चना की| राहुल यादव, अजय कुमार राजपूत, विपनेश कुमार कश्यप, अरुण कुंर कुशवाह, धर्मेन्द्र कुमार आदि रहे|

महीनों से बिना क्लोरीन का पानी पिला रही पालिका

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फर्रुखाबाद:नगर पालिका की लापरवाही और अनदेखी का अंदाजा यहीं से लगाया जा सकता है कि महीनों से पालिका के जिम्मेदार नगरवासियों को बिना क्लोरीन का पानी पिला रहे है। जिसके कारण लोगों को दूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसकी पुष्टि जाँच टीम ने परीक्षण के दौरान कर दी है|
गुरुवार को मलेरिया विभाग के डॉ० आरके सिंह,मलेरिया निरीक्षक नरजीत कटियार व शब्दल हुसैन ने पालिका की पांच टंकियों के पानी का परीक्षण किया| जिसमे फतेहगढ़ के स्वर्गीय ब्रह्मदत्त द्विवेदी मैदान में लगी पानी की टंकी,लकूला, आवास-विकास,लिंजीगंज व रेलवे रोड पर बनी पानी की टंकी के पानी में क्लोरीन का परीक्षण किया| जिसमें केबल रेलवे रोड पानी की टंकी में क्लोरिन की मात्रा मिली| वही अन्य चार टंकियों में क्लोरिन नही मिली|
मलेरिया विभाग के डॉ० आरके सिंह ने बताया की पानी में क्लोरिन की मात्रा ना होने से बुखार,टाइफाइड,दस्त आदि का खतरा बढ जाता है| चार टंकियों में क्लोरिन की मात्रा नही मिली|

महानाट्य: मंच पर होंगे हाथी, घोड़े और 250 कलाकार

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कानपुर:पिछले तीन दशक में अबतक विश्व में 1100 से अधिक बार मंचन के बाद उत्तर प्रदेश की धरती पर कानपुर एक से महानाट्य का गवाह बन रहा है, जो आने वाले पीढ़ी के लिए यादगार होगा। छत्रपति शिवाजी के जन्म से लेकर छत्रपति बनने तक की ऐतिहासिक गौरव गाथा महानाट्य ‘जाणता राजा’ का भव्य मंचन शहर में चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय परिसर में बने भव्य मंच पर हो रहा है।
महाराज शिवाजी के जीवन के माध्यम से भारतीय संस्कृति, संस्कार और सद्चरित्र को समाज तक पहुंचाने के उद्देश्य से महानाट्य कड़ीवार प्रस्तुति होगी। प्रतिदिन तकरीबन सात हजार लोग इसके साक्षी बनेंगे। छह दिन में 42 हजार लोग नाटक देखेंगे। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित महानाट्य का उत्तर प्रदेश में पहली बार कानपुर की धरती पर मंचन हो रहा है। यहां पर दो लाख वर्गफीट के रंगमंच पर 250 कलाकार प्रस्तुति देंगे, साथ ही हाथी, घोड़े व बैलगाड़ी का भी प्रयोग होगा।महाराजा शिव छत्रपति प्रतिष्ठान ट्रस्ट पुणे के इस महानाट्य की शुरुआत आज से 30 वर्ष पहले हुई थी। ट्रस्ट की स्थापना शिवाजी के वंशजों ने की थी। उस वक्त इसे मराठी में प्रस्तुत किया जाता था। 13 वर्ष पहले हिंदी में रूपांतरित कर इसका मंचन शुरू किया गया। अमेरिका-इंग्लैंड सहित अन्य देशों में अब तक इसके दस हजार से ज्यादा शो हो चुके हैं। लाखों लोग इसकी प्रशंसा कर चुके हैं।
महानाट्य में संवाद नहीं भाव प्रदर्शन ही इसकी विशेषता
एशिया का सबसे बड़ा और विश्व का दूसरे नंबर के इस महानाट्य जाणता राजा की विशेषता यह है कि इसका मंचन एक साथ 250 कलाकार करते हैं। खास बात ये है कि किसी भी कलाकार को संवाद नहीं बोलने होते। सिर्फ भाव प्रस्तुत करना होता है। संवाद पाश्र्व में चलते हैं। सभी कलाकार किसी न किसी व्यवसाय से जुड़े हैं। नाट्य मंचन उनका शौक और वीर शिवाजी के प्रति समर्पण है।
जाणता राजा का अभिप्राय
जाणता राजा गुरु समर्थ रामदास का अपने शिष्य शिवाजी को दिया गया विशेषण है। शिवाजी के कार्यों, निभाई गई जिम्मेदारियों और सामाजिक राजनीतिक भूमिकाओं में उभरी उनकी चारित्रिक गरिमा को शब्द देने के लिए साहित्यकारों, सहयोगियों और उनके प्रियजनों ने भिन्न संबोधनों का प्रयोग किया। इस विशेषण के जरिए शिवाजी के व्यक्तित्व, स्वभाव और चरित्र को संज्ञा देने का प्रयास है।
छत्रपति शिवाजी के जीवनकाल पर है महानाट्य
सन् 1630 का वह दौर जब महाराष्ट्र की सरजमीं पर महानायक ने जन्म लिया। शिवनेरी दुर्ग में उदित वह आभा, जिसे छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम से जाना गया। भारत के इतिहास का ऐसा महान योद्धा, जिसने पूरे देश पर अमिट छाप छोड़ी। एक कुशल संचालक और सक्षम प्रशासक, ऐसा व्यक्तित्व जिसमें अपने विशाल साम्राज्य को संचालित करने की असाधारण खूबियां थीं। जिसे नौसेना का जनक और गोरिल्ला युद्ध का आविष्कारक कहा जाता है। रणनीति के साथ-साथ उनकी दूरदृष्टि, वीरता, गुण और ज्ञान के किस्से सदियों बाद भी उतने ही महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी हैं। वह शख्सियत जिसने हर प्रकार के विदेशी सैन्य व राजनीतिक प्रभाव से मुक्ति का प्रणेता बनकर ‘हिन्दवी स्वराज’ को ऐसा नारा बनाया, जिसके बल पर संपूर्ण भारतवर्ष ने एकजुट होकर अफगानों, मुगलों, पुर्तगालियों और अन्य विदेशी मूल के शासकों की हुकूमत का विरोध किया। इन्हीं जाणता राजा (दूरदर्शी राजा) वीर छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवनकाल पर महानाट्य की रचना की गई है।
दो लाख वर्ग फीट का चार मंजिला बना है रंगमंच
सीएसए कृषि विश्वविद्यालय में दो लाख वर्ग फीट के दायरे में चार मंजिला रंगमंच तैयार किया गया है। इसमें मराठा साम्राज्य का दरबार नजर आएगा और अभूतपूर्व अभिनव प्रदर्शन लोगों को एक अनोखी समय यात्रा का अनुभव देगा। अद्वितीय साज-सज्जा, आकर्षक प्रकाश और उत्कृष्ट संगीत से सुसज्जित वह प्रस्तुति जो अमिट किस्से-कहानियां खुद में समेटे हुए है। ये न सिर्फ वीर छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवनकाल से रूबरू कराएगी बल्कि युवाओं को उनके नियमों, आदर्शों और विचारों से प्रेरित करेगी। इतिहासकार बाबा साहब पुरंदरे द्वारा रचित इस महानाट्य में शिवाजी महाराज के जन्म से लेकर राज्याभिषेक तक घटी घटनाओं का तकरीबन 250 कलाकार मंचन करेंगे। इसमें सौ कलाकार कानपुर के भी शामिल हैं।
हाथी-घोड़े और ऊंट भी होंगे
हाथी-घोड़े और ऊंट भी महानाट्य का हिस्सा बनेंगे। इसके लिए आयोजन समिति ने बाकायदा एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया से अनुमति ली है। इसमें एक हाथी, छह घोड़े, छह ऊंट और एक बैलगाड़ी होगी। आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल कैंप और फायर बिग्रेड भी होगी।
भव्य डिंडी जुलूस से होगी शुरुआत
डिंडी जुलूस दर्शकों को 16वीं शताब्दी के उस दौर से रूबरू कराएगा, जिसमें वीर शिवाजी का जन्म हुआ। हाथी, घोड़े और ऊंट से सजे जुलूस की भव्यता एकदम जीवंत होगी। एक दौर ऐसा भी आएगा जब मराठा साम्राज्य पठानों का मुकाबला करेगा। लाइट एंड साउंड के माध्यम से इसकी प्रस्तुति अलौकिक बनाने का प्रयास किया गया है। मराठा संगीत की एक विधा लावणी उत्सव का माहौल बनाएगी। शिवाजी महाराज का जन्म होगा तो महाराष्ट्र की प्रसिद्ध लोक कला गोंढाल की प्रस्तुति मन मोह लेगी। कहानी आगे बढ़ेगी और छत्रपति शिवाजी के व्यक्तित्व से रूबरू कराती हुई राज्याभिषेक तक का सफर तय करेगी।
शिवसृष्टि थीमपार्क के निर्माण में लगता है आय का हिस्सा
जाणता राजा महानाट्य का मंचन देखने के लिए दर्शक जो टिकट लेते हैं उसकी आय एक हिस्सा शिवसृष्टि थीमपार्क में लगता है। पुणे से 11 किलोमीटर दूर अम्बे गांव में इसका निर्माण किया जा रहा है। एक ऐसा विराट धरोहर स्थल जो मराठा साम्राज्य की महिमा को प्रतिबिंबित करेगा। आयोजन की सह संयोजक नीतू सिंह कहती हैं कि उत्तर प्रदेश के कानपुर में 20 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक चलने वाले आयोजन के टिकटों से होने वाली आय के दूसरे हिस्से को कानपुर में जनसहयोग से बनने वाले अस्पताल में लगाया जाएगा। यह अस्पताल ट्रस्ट का होगा जो सस्ते दाम पर अच्छा इलाज उपलब्ध कराएगा। प्रचार प्रमुख अविनाश चतुर्वेदी ने बताया कि जाणता राजा की प्रस्तुति का उद्देश्य युवाओं को उनके आदर्शों और विचारों से प्रेरित करना है।
वीर शिवाजी, एक परिचय
शिवाजी महाराज का जन्म महाराष्ट्र के प्रतिष्ठित भोसले परिवार में हुआ था। उनका पूरा नाम शिवाजी राजे भोसले था। उनके पिता शाहजी भोसले बीजापुर के आदिलशाही सल्तनत के मनसबदार थे जो बाद में राजा बने। माता जीजाबाई विदुषी, वीरांगना, धर्मपरायण और राजनीति में पारंगत महिला थीं। शिवाजी की राजनीतिक गुरु भी उनकी मां थीं। चौदह वर्ष की आयु में शिवाजी ने स्वराज्य के लिए शपथ ली थी। उनके कुशल प्रशासन का ही उदाहरण कि अपने 36 वर्ष के शासन काल में उन्होंने सिर्फ 6 वर्ष युद्ध में बिताए। बाकी 30 वर्ष सुदृढ़ व उत्तम शासन पद्धति विकसित करने को समर्पित किए। एक समय में उनके अधीन 300 से ज्यादा गढ़ थे। शिवाजी महाराज को नौसेना का जनक इसलिए माना जाता है क्योंकि उन्होंने ही सबसे पहले समुद्री खतरे को रोकने के लिए नौसेना का गठन किया था।

पटाखों के सुप्रीम फैसले पर शासन कैसे कराएगा अमल

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नई दिल्‍ली:सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली एनसीआर में दो घंटे के अंदर पटाखे जलाने को अनुमति देकर कई तरह के सवालों को हवा दे दी है। इनमें सबसे पहले और बड़ा सवाल तो यही है कि जो मियाद सुप्रीम कोर्ट ने रखी है उस पर अमल करवाने के लिए क्‍यों कोई एजेंसी है। यदि है तो क्‍या वह दिल्‍ली में दो घंटे के बाद या पहले छोड़े-जाने वाले पटाखों को रोक सकती है। वहीं एक दूसरा अहम सवाल ये भी है कि जिन ग्रीन पटाखों को छोड़े जाने की बात सुप्रीम कोर्ट की तरफ से उसके बारे में पटाखा व्‍यापारी जानते तक नहीं हैं। तीसरा सवाल ये भी है कि जिस समय यह आदेश आया है तब तक करोड़ों का पटाखा तैयार किया जा चुका है और बाजार में पहुंच भी चुका है, ऐसे में इस समय इस तरह के आदेश आने का कितना असर होगा यह सभी जानते हैं। आपको यहां पर ये भी बता दें कि देश में पटाखा कारोबार करीब बीस हजार करोड़ रुपए का है। इसमें करीब पांच हजार करोड़ की आतिशबाजी चीन से भी आती है। इसको बनाने का ज्‍यादातर काम असंगठित क्षेत्र में ही होता है।
सिवाकासी आतिशबाजी बनाने में सबसे आगे
यहां पर ये भी जानना जरूरी है कि दक्षिण भारत के राज्‍य तमिलनाडु में स्थित सिवाकासी आतिशबाजी बनाने में सबसे आगे है। यहां पर करीब ढाई से तीन लाख लोग इस कारोबार से किसी न किसी तरह से जुड़े हुए हैं। यहां से अकेले आतिशबाजी का करीब 20 बिलियन रुपए का कारोबार होता है। देश के बाजारों में मिलने वाले आतिशबाजी के ज्‍यादातर ब्रांड यहीं पर बनते हैं। लेकिन कोर्ट के ताजा फैसले ने यहां इस कारोबार से जुड़े लोगों को निराश किया है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि यहां के लोगों का जीवन-यापन का यह बड़ा स्रोत है। आपको याद होगा कि पिछले वर्ष भी कोर्ट ने दिल्‍ली एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में उन व्‍यापारियों को लाखों का घाटा हुआ था जिन्‍होंने अपने पास में दीवाली के लिए पटाखों का स्‍टॉक लेकर पहले से ही रख लिया था। इस बार भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश से यहां के कारोबारी खासा नाराज हैं। वहीं दिल्‍ली एनसीआर में पटाखा बेच रहे व्‍यापारियों के पास पिछले वर्ष का ही काफी सामान रखा है जिसको वह इस बार बाजार में नए दाम पर निकाल रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक 50 लाख किलोग्राम पटाखों का स्टॉक कारोबारियों के पास पिछले वर्ष का ही बचा हुआ है। ऐसे में पटाखा कारोबारी होने वाले नुकसान से भी दुखी हैं।
व्‍यापारी नहीं जानते ग्रीन पटाखों की परिभाषा
वहीं दिल्‍ली-एनसीआर में बाजारों में दुकादारों को ग्रीन पटाखों के बारे में कुछ पता ही नहीं है। कुछ दुकानदार फुलझड़ी, अनार और चरखी को ही ग्रीन पटाखा बताकर बेच रहे हैं। वहीं पटाखा एसोसिएशन का कहना है कि यह ग्रीन पटाखों की श्रेणी में नहीं आते। लिहाजा ग्रीन पटाखों को लेकर बाजार में असमंजस की स्थिति है। ग्रीन पटाखे को लेकर दैनिक जागरण ने कई व्‍यापारियों से बात की। इनमें से ज्‍यादातर व्‍यापारियों का कहना था कि कोर्ट के आदेश से बाजार में आतिशबाजी की बिक्री पर असर पड़ा है। व्‍यापारियों के मुताबिक अभी 2016 और 2017 का भी स्‍टॉक बचा हुआ है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बाजार में और अधिक गिरावट आई है। इनके मुताबिक आदेश से पहले बाजार में लोग इस डर से आ रहे थे कहीं पिछले वर्ष की ही तरह इस बार भी इन पर प्रतिबंध न लग जाए। लेकिन आदेश के बाद बाजार में ठंडक है।
ग्रीन पटाखों की मांग
कुछ लोग आकर ग्रीन पटाखे भी मांग रहे हैं। लेकिन चूंकि ग्रीन पटाखे इससे पहले सुने ही नहीं है, लिहाजा बाजार में असमंजस की स्थिति है। दिल्‍ली में आतिशबाजी के होलसेल व्‍यापार से जुड़ी मैजेस्टिक फायर वर्क्‍स के मालिक के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ही ग्रीन पटाखों को लेकर गाइड लाइन तय करेगा तभी इसकी परिभाषा भी तय हो सकेगी। फिलहाल बाजार में मंदी है। श्रीवास्‍तव के मुताबिक कोर्ट के आदेश के बाद व्‍यापारी नुकसान को लेकर सहमे हुए हैं। वहीं दिल्ली फायर वर्क्स एंड जनरल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान नीरज गुप्ता का भी यही मानना है इससे पहले ग्रीन पटाखा नाम की कोई चीज सुनने को मिली है। उनका कहना है कि इस साल तो कम से कम इस तरह के पटाखों का आना नामुमकिन है, लेकिन हो सकता है कि कोर्ट की सख्‍ती के बाद अगले वर्ष तक इस तरह के पटाखे बाजार में आ जाएं।
पैसो से मान्‍यता प्राप्‍त आतिशबाजी
आपको बता दें कि फिलहाल बाजार में जो आतिशबाजी बिक रही है वह केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन आने वाले पेट्रोलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेसो) से मान्यता प्राप्त है। पैसो ही पटाखों के उत्पादन और बिक्री की नियमावली तय करती है। यह नियमावली 2005 में तैयार की गई थी, जिसके मुताबिक तय मानकों के आधार पर खरा उतरने वाले पटाखे ही बाजार में बेचे जा सकते हैं। आपको यहां पर ये भी बता दें कि ज्‍यादातर व्‍यापारी इस बात से भी इत्‍तफाक रखते हैं कि चीन से आने वाले पटाखे भारत में बनने वाले पटाखों की तुलना में अधिक प्रदूषण फैलाते हैं।
क्‍या होते हैं ग्रीन पटाखे
इन सभी के बीच ग्रीन पटाखों को लेकर जो बहस छिड़ी है उसका असर आने वाले समय में जरूर दिखाई देगा। लेकिन इससे पहले हम आपको उस सवाल का जवाब दिए देते हैं जो सभी के मन में उठ रहा है। यह सवाल ग्रीन पटाखों को लेकर है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने जिन ग्रीन पटाखों का जिक्र अपने आदेश में किया है वह दरहसल, पर्यावरण को देखते हुए किया गया है। दिल्‍ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण की वजह से ही कोर्ट ने इस तरह के पटाखे जलाने का आदेश पारित किया है। ग्रीन पटाखों से कोर्ट का अर्थ वह पटाखे जिनके जलने और चलाने पर कम प्रदूषण होता हो ही है। यह पटाखे सामान्य पटाखों की तरह होते हैं। इनको जलाने पर नाइट्रोजन और सल्फर ऑक्साइड गैस का कम उर्त्सजन होता है। इन पटाखों को तैयार करने में एल्यूमीनियम का कम प्रयोग होता है। इनके लिए खास रसायन का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा इनके धमाकों की आवाज भी दूसरे पटाखों के मुकाबले कम होती है। इसके अलावा इनसे निकलने वाला धुआं भी दूसरे पटाखों के मुकाबले कम होता है।

इटावा-बरेली हाई-वे के किनारे बिजली घर का प्रस्ताव

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Posted on : 25-10-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, Politics, Politics-BJP, जिला प्रशासन

फर्रुखाबाद:(मोहम्मदाबाद) सांसद मुकेश राजपूत ने अपने गोद लिये गाँव में जाकर विभिन्य योजनाओं के स्वीकृत पत्र पात्रों को वितरित किये| साथ ही उन्हें सरकार की योजना का हर लाभ दिये जाने का भरोसा दिया गया| लेकिन उनके कार्यक्रम में कोई जिला मुख्यालय का अधिकारी नही पंहुचा|
विकास खंड के ग्राम खिमसेपुर में वृद्धावस्था,विकलांग एवं विधवा पेंशन स्वीकृति प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पंहुचे सांसद मुकेश राजपूत ने कुल 190 पात्रों में से 20 को अपने हाथों से स्वीकृति प्रमाण पत्र वितरित किये| उन्होंने सरकार की योजनाओं के विषय में सभी को अवगत कराया| सांसद ने कहा कि जल्द ही मोहम्मदाबाद क्षेत्र के इटावा-बरेली हांई-वे पर जल्द एक बिजली घर का निर्माण शुरू कराया जायेगा| जिसका प्रस्ताव भेजा गया है| कार्यक्रम आयोजक अनुज राजपूत ने तलवार पगड़ी व तलवार भेट की|
इस दौरान एडीओ पंचायत विनय चौहान, ग्राम विकास अधिकारी सुभाष कठेरिया, मंडल अध्यक्ष रामप्रकाश, सांसद प्रतिनिधि डॉ० सूरज राजपूत,महेंद्र सिंह आदि रहे|

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