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बाइक सवार महिला के कुंडल लूट के फरार

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Posted on : 11-09-2018 | By : JNI-Desk | In : CRIME, FARRUKHABAD NEWS, POLICE, जिला प्रशासन

फर्रुखाबाद:(शमसाबाद)पति के साथ जा रही महिला के कुंडल अपाचे बाइक सवार लुटेरों ने लूट लिए और फरार हो गए।पुलिस मौके पर नहीं पहुंची।
थाना क्षेत्र के ग्राम रसूलपुर तराई निवासी आजाद कुमार अपनी पत्नी सुषमा देवी के साथ बाइक से कमालगंज रिश्तेदारी से वापस घर लौट जा रहे थे। उसी दौरान थाना क्षेत्र के ग्राम फैजबाग दलेलगंज के बीच मुख्य मार्ग पर पीछे से आये अपाचे बाइक सवार लुटेरों ने महिला के एक कान से झुमकी नोच लीं और कायमगंज की तरफ फरार हो गये| सुषमा के पति ने बदमाशों का काफी दूर तक पीछा किया| बदमाश ठंडी कुइयां के निकट से दूसरे मार्ग पर खेतों में भाग गये। आजाद ने फैजबाग पुलिस चौकी पर सूचना दी।एक सप्ताह में दूसरी घटना हो जाने के बाद भी पुलिस घटना के बारे में अंजान बन रही है। फैजबाग चौकी इंचार्ज अभय कुमार ने बताया कि घटना के संबंध में कोई जानकारी नहीं है।

बदमाशों ने बाइक सबार का सिर फोड़ा

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Posted on : 11-09-2018 | By : JNI-Desk | In : CRIME, FARRUKHABAD NEWS, Politics, Politics-CONG., जिला प्रशासन

फर्रुखाबाद:(कंपिल) बीती रात बाइक से आ रहे ग्रामीण को झाड़ियों में छिपे बदमाशों ने सर फोड़कर गम्भीर रूप से जख्मी कर दिया|लहुलुहान हालत में उसे लोहिया अस्पताल में भर्ती किया गया|
थाना क्षेत्र के ग्राम कटिया निवासी 25 वर्षीय नईम पुत्र नफीस राज मिस्त्री का काम करता है| सोमबार सुबह नईम बाइक से अपनी बहन जनपद बदायूँ कादरचौक घुमने गया था। सोमबार को देर शाम वह लौट रहा था| तभी उसे ग्राम भटमई के निकट सड़क के किनारे खड़ी झाड़ियों से दो तीन बदमाश निकले घेर लिया| अचानक वह हमलावर हो गये| उन्होंने नईम के पीछे की तरफ सर में सरिया मारकर लहुलुहान कर दिया| बाइक का संतुलन ठीक कर नईम तेजी से कंपिल की ओर भगा लाया। घायल नईम रात को निजामुद्दीनपुर अपनी ससुराल पहुँचा रिश्तेदारों को घटना की जानकारी दी । उसे उपचार हेतु परिजन ले गये|
सिवारा चौकी इंचार्ज अंकुश राघव ने बताया कि तहरीर मिलने पर कार्यवाही की जाएगी| उन्हें घटना के विषय में कोई जानकारी नही दी गयी|
वही बीते दिनों रूदायन में हुई लूट की घटना के बाद एसपी संतोष कुमार मिश्रा ने पीड़ितों के घर जाकर हाल चाल लिए और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने के निर्देश पुलिस को दिये है| वही ग्रामीणों ने एसपी से रात में बिजली ना आने से घटनाओं की बढ़ोत्तरी की शिकायत की|

कांग्रेस-भाजपा महंगाई पर कांग्रेस-भाजपा एक ही थाली के चट्टे-बट्टे: मायावती

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Posted on : 11-09-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, Politics, Politics-BJP, जिला प्रशासन

लखनऊ:सोमवार को आहूत भारत बंद से दूर रही बहुजन समाज पार्टी ने देश में बनते विषम हालात के लिए भाजपा के साथ ही कांग्रेस को भी कठघरे में खड़ा किया। महंगाई जैसे जनविरोधी मसलों पर कांग्रेस-भाजपा को एक ही थाली के चट्टे- बट्टे बताते हुए तेल की कीमतों को सरकारी नियंत्रण में लेने की मांग की।
भारत बंद के एक दिन बाद मंगलवार को जारी बयान में मायावती ने कहा कि पेट्रोल -डीजल की आसमान छूती कीमतों के लिए कांग्रेस और भाजपा की सरकारें बराबर की कसूरवार हैं, दोनों की नीतियां एक जैसी हैं। कांग्रेस की संप्रग सरकार ने जून, 2010 में पेट्रोल को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया था तो भाजपा सरकार ने गत 18 अक्टूबर, 2014 को डीजल को भी नियंत्रणमुक्त कर दिया। इन गरीब व किसान विरोधी फैसलों को बड़े आर्थिक सुधार के रूप में दुनिया के सामने पेश किया गया, जिसका नतीजा सब के सामने है।
बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा की वर्तमान सरकार ना केवल कांग्रेस की गलत आर्थिक नीतियों को लागू करती रही वरन इनसे आगे बढ़ नोटबंदी और जीएसटी को अपरिपक्व ढंग से देश पर थोपा दिया। इसी कारण सवा करोड़ देशवासियों का जीवन नरकीय होता जा रहा है। मायावती ने चेताया कि जिस तरह से जनता ने वर्ष 2014 में कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया था उसी तरह भाजपा को भी 2019 में सजा देगी।
उन्होंने कहा कि संवेदनहीन भाजपा नेतृत्व जनता की परेशानियों से थोड़ा भी विचलित नहीं जिससे उनके जनविरोधी और अहंकारी होने का प्रमाण मिलता है। सरकार को चंद पूंजीपति मित्रों के हित की चिंता ज्यादा है और उन्हें नाराज नहीं करना चाहती है। भाजपा को लगता है कि वह एक बार फिर से अपने उद्योगपति मित्रों की बदौलत ही सत्ता पा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो मनमानी कर रही तेल कंपनियों पर अंकुश लगाने को सख्त नीति बना सकती है ताकि लोगों को कुछ राहत मिले।
मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी केंद्र सरकार के इस बात के पक्ष में बिल्कुल भी नहीं है कि तेल कीमतों का नियंत्रण उनके हाथ में नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार चाहे तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों को सरकारी नियंत्रण ला सकती है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों को सरकारी नियंत्रण से बाहर रखने की शुरुआत कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए 2 की सरकार में हुई थी। भाजपा भी अब उसी राह पर चल रही है जिसने डीज़ल को भी सरकारी नियंत्रण से बाहर कर दिया है। उन्होंने कहा कि डीज़ल को डीरेग्यूलेट कर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। सरकार पूंजीपतियों की मदद कर रही है।पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत को लेकर कांग्रेस के भारत बंद से दूरी पर मायावती ने कहा कि हमारी पार्टी गरीबों, दलितों, पिछड़ों व अल्पसंख्यकों के हितों की लड़ाई लड़ती है। उसके विरोध का तरीका भी अलग होता है। भारत बंद के दौरान कुछ राज्यों में हिंसा हुई, जिसका हमारी पार्टी समर्थन नहीं करती।
मायावती ने महंगाई के मुद्दे पर भाजपा को कांग्रेस की ही टीम बताया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कि केंद्र की वर्तमान सरकार अपने उद्योगपति दोस्तों को नाराज नहीं करना चाहती इसलिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम नहीं करना चाहती। वर्तमान सरकार पूर्व की यूपीए सरकार की तरह ही वही फैसले ले रही है। जिसके लिए पिछली सरकार की आलोचना हुई थी। उन्होंने कहा कि महंगाई के मुद्दे पर भाजपा-कांग्रेस एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं।
मायावती ने कहा कि यूपीए 2 की गलत नीतियों का खामियाजा उसे भुगतना पड़ा था, जनता ने उसे सत्ता से निकाल बाहर किया था। अब उसी राह पर केंद्र की मोदी सरकार भी है, जनता आने वाले चुनावों में इन्हें भी सबक सिखाएगी। उन्होंने आगे कहा कि अपनी देशविरोधी नीतियों के चलते बीजेपी सत्ता खो देगी।उन्होंने कहा कि केंद्र अगर चाहे तो महंगाई पर काबू पाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने भारत की करोड़ों जनता को लाचार बना दिया है। खासकर गरीबों-मजलूमोंकी महंगाई के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा है।
मायावती ने कहा कि केंद्र सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार पेट्रो पदार्थों की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण नहीं कर सकती। बसपा केंद्र के इस जवाब पर सहमत नहीं है।

नेताजी के आशीर्वाद से उठाया कदम,अब वापस नहीं होगा:शिवपाल

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Posted on : 11-09-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, जिला प्रशासन, सामाजिक

लखनऊ:समाजवादी पार्टी से अलग होकर समाजवादी सेक्युलर मोर्चा बनाने वाले पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने साफ कर दिया कि वह अपने उठाए कदम को वापस नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि नेताजी का आशीर्वाद लेकर यह कदम उठाया है। समाजवादी पार्टी की आजीवन सेवा की बदले में कोई पद नहीं मांगा। बस सम्मान मांगा था। मैं नहीं चाहता था कि अलग होकर कभी चुनाव लड़ूं। अब तैयारी शुरू कर दी है। जल्द ही मंडल प्रभारी के साथ हर जिले की कार्यकारिणी गठित कर दी जाएगी। महाभारत चापलूसों, ठगों और शकुनि मामा जैसे लोगों के कारण हुई थी। इस महाभारत में भी जीत धर्म की होगी। शिवपाल सिंह यादव मंगलवार को बौद्ध शोध संस्थान में आयोजित श्री कृष्ण वाहिनी के राज्य प्रतिनिधि सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
शिवपाल के निशाने पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनकी सरकार के कुछ मंत्री भी रहे। बिना नाम लिए उन्होंने कहा कि सत्ता का मद नाश कर देता है। रावण, कंस और दुर्योधन का नाश सत्ता के मद के कारण हुआ। जो बड़े आदमी हुए अधिकांश लोगों पर संकट पड़ा। उन्होंने कहा कि शरीर के साथ दिमाग से भी स्वस्थ रहना जरूरी है। कभी-कभी दिमाग कुछ गड़बड़ हो जाता है। मामा और भांजे का रिश्ता बहुत पवित्र है लेकिन, आज भी कंस पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे ही हराने में मेरी पार्टी लगी हुई थी। मेरे खिलाफ एक अपराधी चुनाव लड़ रहा था और पार्टी के कुछ लोग उसकी मदद कर रहे थे। इस पर भी मैं 53 हजार वोटों से जीता।
नेताजी का साथ नहीं छोड़ा
शिवपाल ने कहा कि जब हाईस्कूल में था तब ही नेताजी के साथ जुड़ गया। नेताजी के साथ बहुत परिवर्तन और उतार चढ़ाव देखे। सोचा था कि खेती बाड़ी या नौकरी करेंगे। एक इंटर कॉलेज में नौकरी भी लग गई, लेकिन आना तो राजनीति में था। सन 1972 में पर्ची बनाता था पोस्टर लगाता था। नेताजी की चिट्ठी को साइकिल से बांटता था। उस समय वाट्सएप और फेसबुक का दौर नहीं था। साइकिल भी मुश्किल से मिल पाती थी। मोटरसाइकिल मिलती थी तो लगता था हेलीकॉप्टर मिल गया। चुनाव के समय तीन से लेकर छह महीने साइकिल चलाना पड़ता था।
नहीं बनना है सीएम
पिछली सरकार में मैने यही कहा था कि चोरी तो बर्दाश्त है लेकिन, डकैती नहीं। समय ऐसा था कुछ नहीं कर सकता था। मैने रजत जयंती समारोह में ही लाखों लोगों के बीच कहा था कि मुझे कुछ नहीं चाहिए केवल सम्मान होना चाहिए। स्टैंप पर लिखवा लो सीएम नहीं बनना है। पुलिस भर्ती में मुझे बदनाम किया गया। लखनऊ में आज श्रीकृष्ण वाहिनी संस्था के राज्य सम्मेलन में शिवपाल सिंह यादव को काफी महिमा मंडित किया गया। उनके ऊपर गीत की रचना की गई और 2022 में उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री तक बता दिया गया। आज शिवपाल यादव जैसे ही कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पहुंचे वैैसे ही लोगों ने नारे लगाने शुरू कर दिया और कहा कि चाचा तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ है।
राज्य सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रीकृष्ण वाहिनी के कार्यकर्ता एकत्र थे। शिवपाल को इससे नई ताकत मिलती दिख रही है। इतना ही नहीं लोगों ने शिवपाल को लेकर बड़ी बात कहते नजर आ रहे हैं और कहा कि जिस तरह से भगवान राम ने 14 साल का वनवास काटा है ठीक उसी तरह से शिवपाल ने डेढ़ वर्ष का वनवास काटा है। अगले चुनाव बात दिया जायेंगा कि यूपी का नौजवान अखिलेश के साथ नहीं है बल्कि शिवपाल यादव के साथ है। इसके साथ ही कार्यकताओं ने शिवपाल को अगला सीएम बनाने के लिए प्रण किया है।
शिवपाल यादव भी इस उत्साह से काफी खुश नजर आ रहे हैं और उन्होंने इससे पहले कहा था कि उनको नेताजी का आर्शिवाद प्राप्त है और समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा केवल मुलायम और अपने अपमान के चलते बनी है।

बड़े बकायेदारों की लिस्‍ट पर कुंडली मारे बैठी रही मनमोहन सरकार:रघुराम राजन

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Posted on : 11-09-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, Politics, राष्ट्रीय, सामाजिक

नई दिल्‍ली:रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराज राजन ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर गंभीर आरेाप लगाए हैं। उन्‍होंने अपने कार्यकाल में बड़े बकाएदारों की एक सूची तत्‍कालीन पीएमओ को दी थी, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। लोकलेखा समिति के सामने पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन के बयान के बाद नॉन परफॉर्मिंग असेट (एनपीए) की समस्या और गंभीर हो गई है।
अब तक जहां कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम यह दावा करते रहे कि एनपीए की समस्या यूपीए के कार्यकाल के बाद विकट हुई, वहीं सत्तारूढ़ एनडीए का दावा है कि एनपीए की समस्या उन्हें विरासत में मिली है। ऐसे में रघुराम राजन के जवाब के बाद एनपीए की समस्‍या को सीधे-सीधे यूपीए सरकार को जिम्‍मेदार माना गया है।
राजन ने दावा किया कि बैंकों के सामने सबसे ज्यादा बैड लोन ऐसे हैं जिन्हें 2006 से 2008 के बीच आवंटित किया गया। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह ऐसा समय था जब आर्थिक विकास दर बेहद अच्छी थी और बैंकों को अधिक से अधिक कर्ज देकर इस रफ्तार को बढ़ाने की जरूरत थी लेकिन ऐसी परिस्थिति में बैंकों को चाहिए था कि वह कर्ज देने से पहले यह सुनिश्चित करता कि जिन कंपनियों को वह कर्ज दे रहा है, उनका स्वास्थ्य अच्छा है और वह समय रहते अपने कर्ज का भुगतान करने की स्थिति में हैं।
गौरतलब है कि लोकलेखा समिति ने पूर्व गवर्नर से कमेटी के सामने पेश होने की अपील की थी और बैंकों के एनपीए पर अपना पक्ष रखने के लिए कहा था। कमेटी ने राजन को अपना पक्ष पत्र के जरिए रखने की छूट दी थी, जिसके बाद पूर्व गर्वनर ने एनपीए पर लोकसभा समिति को जवाब दिया। समिति को लिखे पत्र गए में राजन ने एनपीए की समस्या के रहस्य से पर्दा उठाते हुए लिखा है कि देश के बैंक एक टाइम बम पर बैठे हैं और जल्द इस बम को निष्क्रिय नहीं किया गया तो इसे फटने से कोई रोक नहीं सकता।
गंदे तरीके से कर्ज देने की हुई शुरुआत
रघुराम राजन ने दावा किया कि जहां बैंकों ने इस दौरान नया कर्ज बांटने में लापरवाही बरती, वहीं ऐसे लोगों को कर्ज देने का काम किया, जिनका कर्ज नहीं लौटाने का इतिहास रहा है। ऐसे लिहाजा, यह बैंकों की बड़ी गलती थी और देश में गंदे तरीके से कर्ज देने की शुरुआत थी। राजन ने दावा किया कि इस दौर में कर्ज लेने वाले एक प्रमोटर ने उन्हें बताया कि बैंक ऐसे लोगों को भी कर्ज दे रहा था जिन्हें कर्ज की जरूरत नहीं थी और बैंक ने महज कंपनी से यह बताने के लिए कहा कि उसे कितने रुपयों का कर्ज चाहिए और वह कर्ज कंपनी को दे दिया गया।
बैंकों ने नहीं बरती सतर्कता
हालांकि रघुराम राजन ने कहा कि ऐसे दुनिया के अन्य देशों में भी देखने को मिला कि जब अर्थव्यवस्था अच्छा कर रही होती है तो बैंक ज्यादा से ज्यादा कर्ज बाजार को देने को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में बैंक को जरूरत से ज्यादा सजग रहने की जरूरत थी क्योंकि इन कर्जों के वापस न लौटने से तेज दौड़ती अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ सकती है।
सरकारी बैंकों की भूमिका बेहद खराब
राजन ने एनपीए का ठीकरा देश की बैंकिंग व्यवस्था पर फोड़ते हुए लिखा कि एनपीए के खेल में देश के सरकारी बैंकों की भूमिका बेहद खराब रही। पूर्व गवर्नर के मुताबिक सरकारी बैंकों से कर्ज आवंटन में ऐसी लापरवाही की उम्मीद नहीं की थी। राजन के मुताबिक कर्ज देने के बाद बैंकों ने समय-समय पर कंपनियों द्वारा कर्ज की रकम खर्च किए जाने की सुध नहीं ली, जिसके चलते ज्यादातर कंपनियां कर्ज के पैसे का गलत इस्तेमाल करने लगीं।
वहीं कुछ प्रमोटर्स ने बैंकों की इस लापरवाही के चलते सस्ते उपकरणों की महंगी खरीद दिखाने के लिए फर्जी रसीद का सहारा लिया और बैंकों ने इसकी जांच किए बगैर उन्हें पास करने का काम बड़े स्तर पर किया। राजन ने दावा किया जहां देश प्राइवेट बैंक ऐसी कंपनियों को कर्ज देने से कतराने लगे जहां पैसा डूबने का डर था लेकिन सरकारी बैंकों ने इससे कोई सीख नहीं ली और लगातार डिफॉल्टर कंपनियों को कर्ज देने का काम जारी रखा।
कोयला आवंटन रद्द किए जाने का बड़ा प्रभाव
रघुराम राजन ने लोकसभा की समिति को लिखे पत्र में दावा किया कि जहां बैंक बड़े स्तर पर कंपनियों को कर्ज देने का काम कर रहे थे, वहीं देश में पहले यूपीए और फिर एनडीए सरकारें फैसला लेने में देरी करती रहीं। इस दौरान कोयला खदानों के आवंटन पर सवाल खड़ा हुआ, अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर फैसला करने में देरी हुई। कोयला आवंटन रद्द किए जाने का नतीजा यह रहा कि कर्ज लेकर शुरू किए गए ज्यादातर प्रोजेक्ट्स या तो शुरू नहीं हो सके, शुरू हुए तो उनकी लागत में बड़ा इजाफा हो गया अथवा प्रोजेक्ट्स को बंद करने की नौबत आ गई।
राजन बोले, नीति आयोग नहीं करता होमवर्क
हाल ही में नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने आरोप लगाया था कि बीते तीन साल अर्थव्यवस्था में दर्ज हुई गिरावट के लिए रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन जिम्मेदार हैं। राजीव कुमार ने कहा कि वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही से पहले लगातार 9 तिमाही में दर्ज हुई गिरावट के लिए राजन की आर्थिक नीतियां जिम्मेदार हैं। राजीव कुमार ने कहा कि बीते तीन साल के दौरान विकास दर में गिरावट बैंक के एनपीए में हुई बढ़ोतरी के चलते है। कुमार ने कहा कि जब मोदी सरकार ने सत्ता संभाली, तब बैंकों का एनपीए चार लाख करोड़ रुपये था, लेकिन मार्च 2017 तक यह एनपीए बढ़कर 10.5 लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर गया। एनपीए में हुई इस बढ़त के चलते तीन साल के दौरान जीडीपी में लगातार गिरावट देखने को मिली और इसके लिए सिर्फ रघुराम राजन जिम्मेदार हैं।
पीएम मोदी ने भी एनपीए के लिए पूर्ववर्ती यूपीए सरकार को ठहराया था जिम्‍मेदार
कुछ दिन पहले ही पीएम मोदी ने बैंकिंग क्षेत्र में डूबे कर्ज (एनपीए) की भारी समस्या के लिये पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के समय ‘फोन पर कर्ज’ के रूप में हुए घोटाले को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा कि‘नामदारों’के इशारे पर बांटे गए कर्ज की एक-एक पाई वसूली की जाएगी। उन्होंने कहा कि चार-पांच साल पहले तक बैंकों की अधिकांश पूंजी केवल एक परिवार के करीबी धनी लोगों के लिए आरक्षित रहती थी। आजादी के बाद से 2008 तक कुल 18 लाख करोड़ रुपये के कर्ज दिए गए थे लेकिन उसके बाद के 6 वर्षों में यह आंकड़ा 52 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

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